SCRIET में आयोजित कार्यशाला में छात्राओं ने किया प्रतिभाग
मेरठ, 10 सितंबर 2026। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SCRIET) में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन मनोविज्ञान विभाग एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, तनावपूर्ण परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उपाय बताना तथा जरूरत पड़ने पर अपनी समस्याओं को परिवार, मित्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित करना रहा।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्याओं को साझा करना जरूरी : प्रो. नीरज सिंघल
कार्यक्रम में SCRIET के निदेशक प्रोफेसर नीरज सिंघल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी अपनी किसी भी समस्या को मन में दबाकर न रखें। उन्हें अपनी परेशानियों और भावनाओं को परिवार, दोस्तों अथवा भरोसेमंद शिक्षकों के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय रहते अपनी बात साझा करने से मानसिक दबाव को कम करने और समस्या का उचित समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।
जीवन अनमोल, आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं : प्रो. संजय कुमार
कार्यशाला में मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के मानद अध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आत्महत्या कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं है। मनुष्य प्रकृति की सबसे रचनात्मक कृतियों में से एक है और प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अनमोल है। इसलिए अपने जीवन की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए व्यक्ति को आसपास के लोगों की नकारात्मक बातों पर अत्यधिक ध्यान देने से बचना चाहिए। इसके साथ ही अपने आसपास सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों को मित्र और साथी के रूप में शामिल करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी खूबियों को पहचानने और उन्हें लगातार निखारने के लिए प्रेरित किया।
तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए तकनीक सीखना जरूरी
प्रो. संजय कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कुछ ऐसी विशेष खूबियां होती हैं, जो उसे दूसरों से अलग पहचान देती हैं। जरूरत इस बात की है कि व्यक्ति समय रहते अपनी क्षमताओं को पहचाने और उन्हें विकसित करने का प्रयास करे। इससे जीवन में आने वाली नकारात्मक परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना अधिक संतुलित तरीके से किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तनाव से निपटने की व्यावहारिक तकनीकों को सीखना भी जरूरी है। यदि व्यक्ति मानसिक रूप से तैयार रहता है तो कठिन परिस्थितियों में तनाव और दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
विश्वविद्यालय में उपलब्ध है काउंसलिंग सेंटर की सुविधा
प्रो. संजय कुमार ने विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में संचालित काउंसलिंग सेंटर की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यहां आरसीआई अप्रूव्ड मनोवैज्ञानिक द्वारा विद्यार्थियों की समस्याओं को बिना किसी जजमेंट के सुना जाता है और बातचीत को गोपनीय रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि जो विद्यार्थी ऑनलाइन अपनी बात साझा करना चाहते हैं, वे मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के 8899333777 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। उनके अनुसार प्रथम सत्र में बिना नाम-पता पूछे निःशुल्क सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
किसी जरूरतमंद व्यक्ति का हाथ थामना भी बड़ी मदद : डॉ. सीमा शर्मा
कार्यशाला की मुख्य वक्ता एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सीमा शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी हमारे आसपास किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़ी ऐसी दुखद खबर सामने आती है, तो यह पूरे समाज को झकझोर देती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए समय रहते प्रभावित व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी बात सुनना महत्वपूर्ण है।
डॉ. सीमा शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हम सभी भगवान या सुपरहीरो नहीं बन सकते, लेकिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवनरक्षक मददगार जरूर बन सकते हैं। इसके लिए अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करना जरूरी है, जो मानसिक परेशानी से जूझ रहे हों और उन्हें समय पर उचित सहयोग तथा विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
परेशानी होने पर मन की बात शिक्षकों और साथियों से साझा करें : प्रिय पॉल
मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सुश्री प्रिय पॉल ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में जब भी किसी प्रकार की बाधा या कठिन परिस्थिति सामने आए तो उसे अकेले सहने के बजाय अपने मन की बात किसी भरोसेमंद साथी, शिक्षक या परिवार के सदस्य के साथ साझा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर बातचीत और सहयोग प्राप्त करना मानसिक दबाव को संभालने में सहायक हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर
कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर पारुल वर्श्नेय, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग, तथा सह-संयोजक डॉ. निधि चौहान ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को लेकर जागरूक रहने तथा जरूरत पड़ने पर सहायता लेने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन
कार्यक्रम की सफलता में प्रोफेसर रंजू अरोरा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो वह बिना झिझक अपनी बात साझा कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि संस्थान की ओर से उनकी समस्याओं को समझने और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रोफेसर शोभित सक्सेना, प्रोफेसर प्रियंका तथा प्रोफेसर वी.के. राम सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया।
अतिथियों और प्रतिभागियों का जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर SCRIET के निदेशक प्रोफेसर नीरज सिंघल ने कार्यशाला में उपस्थित सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी समिति सदस्यों और सहयोगियों को धन्यवाद दिया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, सकारात्मक वातावरण बनाए रखने, अपनी समस्याओं को साझा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से सहायता लेने का संदेश दिया गया।