हाथिनी माधुरी की नांदनी मठ वापसी की जानकारी देते सुदीप जैन
पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में 45 किलोमीटर की पदयात्रा, मेरठ से सुदीप जैन ने सड़क से न्यायालय तक उठाई आवाज; देशभर से मिला समर्थन
मेरठ/कोल्हापुर। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के नांदणी मठ से जुड़ी हाथिनी माधुरी, जिसे स्थानीय स्तर पर महादेवी के नाम से भी जाना जाता है, लंबे सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी संघर्ष के बाद अपने घर नांदणी लौट आई है। गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से 10 सितंबर को उसे नांदणी के लिए रवाना किया गया था। 11 सितंबर को उसकी वापसी को लेकर नांदणी और कोल्हापुर में उत्साह का माहौल रहा। करीब एक वर्ष तक वनतारा में रहने के बाद माधुरी की वापसी को उसके समर्थक लंबे संघर्ष, जनभावना और लगातार किए गए प्रयासों की बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।
माधुरी की वापसी की मांग को लेकर लंबे समय से सामाजिक और कानूनी स्तर पर प्रयास चल रहे थे। इस अभियान में नांदणी मठ के पीठाधीश स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के मार्गदर्शन में समाज के लोगों ने आवाज उठाई। समय के साथ यह मुद्दा केवल एक धार्मिक संस्था या समुदाय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पशु संरक्षण, अहिंसा, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और जनभावना से जुड़ा व्यापक विषय बन गया।
नांदणी मठ से उठी आवाज ने लिया जनआंदोलन का रूप
माधुरी की वापसी की मांग की शुरुआत नांदणी मठ और स्थानीय समाज की भावनाओं से हुई। जैसे-जैसे माधुरी की वापसी का मुद्दा आगे बढ़ा, बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते गए। स्थानीय स्तर पर विरोध, ज्ञापन, सामाजिक अभियान और जनसंपर्क के साथ मामला प्रशासनिक और न्यायिक स्तर तक पहुंचा। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि माधुरी नांदणी मठ और स्थानीय लोगों की भावनाओं से लंबे समय से जुड़ी रही है। इसी भावनात्मक जुड़ाव ने उसकी वापसी की मांग को लगातार मजबूती दी। पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में करीब 45 किलोमीटर की पदयात्रा भी निकाली गई, जिसमें जैन समाज के साथ अन्य वर्गों के लोगों की भागीदारी बताई गई है।
राजू शेट्टी के नेतृत्व में 45 किलोमीटर की पदयात्रा
माधुरी की घर वापसी के संघर्ष में पूर्व सांसद राजू शेट्टी प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में करीब 45 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग माधुरी की वापसी की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। राजू शेट्टी ने आंदोलन को जमीनी स्तर पर नेतृत्व देने के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया में भी लगातार प्रयास किए। उनके अनुसार, लंबे संघर्ष, जनदबाव और विभिन्न स्तरों पर हुई प्रक्रिया के बाद माधुरी की नांदणी वापसी का रास्ता साफ हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों में 45 किलोमीटर की पदयात्रा के साथ उपवास और सोशल मीडिया अभियान को भी आंदोलन का हिस्सा बताया गया है।
मेरठ से सुदीप जैन ने सड़क से न्यायालय तक उठाई आवाज
माधुरी की वापसी के संघर्ष में मेरठ निवासी और विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुदीप जैन ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए इसे केवल स्थानीय या सामुदायिक मुद्दे के बजाय अहिंसा, पशु संरक्षण, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और जनभावना से जुड़ा विषय बताया। सुदीप जैन ने पिछले वर्ष अगस्त में लखनऊ में भी माधुरी की वापसी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना देकर उन्होंने इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। इसके बाद भी वह विभिन्न स्तरों पर माधुरी की वापसी की मांग को लेकर प्रयास करते रहे। उनका कहना रहा कि माधुरी की वापसी का अभियान लोकतांत्रिक तरीके से जनभावना को सामने रखने का प्रयास था। मेरठ से उठी आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने और सड़क से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक विषय को उठाने में उनकी भूमिका को आंदोलन से जुड़े लोग महत्वपूर्ण मानते हैं।
साधु-संतों और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन
माधुरी की वापसी की मांग को जैन समाज के अनेक साधु-संतों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, विभिन्न संतों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने माधुरी को नांदणी वापस लाने की मांग का समर्थन किया। इस समर्थन से आंदोलन को धार्मिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक आधार मिला। धीरे-धीरे यह मुद्दा देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा और सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों के जरिए लोगों ने माधुरी की वापसी की मांग को समर्थन दिया।
माधुरी को वनतारा क्यों ले जाया गया था?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार माधुरी को 28 जुलाई 2025 को उपचार के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा ले जाया गया था। इसके बाद नांदणी और कोल्हापुर क्षेत्र में उसे वापस मठ में लाने की मांग लगातार उठती रही। समय के साथ मामला प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। माधुरी के स्वास्थ्य, पुनर्वास और उसके लिए उपयुक्त स्थान को लेकर संबंधित संस्थाओं और समितियों के स्तर पर प्रक्रिया चली। नांदणी में उसकी वापसी के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी मठ प्रशासन ने तैयारी की।
हाई-पावर कमेटी की प्रक्रिया के बाद साफ हुआ वापसी का रास्ता
माधुरी की वापसी के लिए नांदणी में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण भी कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 10 अगस्त 2026 को संयुक्त समिति ने नांदणी में माधुरी के लिए उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट उच्चस्तरीय समिति के समक्ष रखी। इसके बाद ऑनलाइन सुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी। 9 सितंबर को उच्चस्तरीय समिति के स्तर पर माधुरी को नांदणी वापस ले जाने की अनुमति का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार, वन विभाग, वनतारा प्रशासन और मठ प्रशासन के बीच समन्वय के माध्यम से उसकी वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

10 सितंबर को वनतारा से नांदणी के लिए रवाना हुई माधुरी
उच्चस्तरीय समिति की अनुमति के बाद माधुरी को 10 सितंबर को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से नांदणी के लिए रवाना किया गया। रिपोर्टों के अनुसार उसके परिवहन के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई और उसे बंद वाहन के माध्यम से महाराष्ट्र लाया गया। 11 सितंबर को उसके नांदणी पहुंचने की जानकारी सामने आई। माधुरी की वापसी के साथ उसकी आगे की देखभाल भी महत्वपूर्ण विषय है। रिपोर्टों में बताया गया है कि वनतारा उसकी चिकित्सकीय देखभाल में सहयोग जारी रखेगा। वहीं नांदणी में उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित नियमों और पशु कल्याण मानकों के अनुसार निभाई जानी है।
नांदणी मठ में माधुरी के स्वागत को लेकर उत्साह
माधुरी की वापसी की खबर के बाद नांदणी और कोल्हापुर क्षेत्र में खुशी का माहौल बना। लंबे समय से उसकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे लोगों ने इसे भावनात्मक उपलब्धि के रूप में देखा। नांदणी मठ में चरित्र चक्रवर्ती श्री 108 शांतिसागरजी महाराज की 71वीं पुण्यतिथि का कार्यक्रम भी 17 सितंबर को प्रस्तावित है। आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए यह भी महत्वपूर्ण था कि माधुरी इस धार्मिक आयोजन के समय नांदणी में मौजूद रहे।
देश के अलग-अलग हिस्सों से मिला समर्थन
माधुरी की वापसी का अभियान केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा। मेरठ, लखनऊ, इंदौर, बहराइच सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों द्वारा समर्थन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुदीप जैन के अनुसार, अभियान से जुड़े लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर ज्ञापन, प्रदर्शन और सोशल मीडिया गतिविधियों के माध्यम से माधुरी की वापसी की मांग को आगे बढ़ाया। इस अभियान में दर्शन जैन, मयंक जैन, सिद्धार्थ जैन, मनीष जैन और शुभम जैन सहित कई लोगों के सहयोग का उल्लेख किया गया है।
वनतारा की भूमिका भी रही महत्वपूर्ण
माधुरी की वापसी की प्रक्रिया में वनतारा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वापसी के बाद भी माधुरी की मेडिकल केयर को लेकर वनतारा की ओर से सहयोग जारी रखने की बात कही गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि माधुरी की घर वापसी के साथ उसके स्वास्थ्य और पशु कल्याण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। नांदणी में उसकी देखभाल के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जांच और आवश्यक व्यवस्थाओं की प्रक्रिया भी इसी उद्देश्य से की गई थी।

महाराष्ट्र सरकार और संबंधित पक्षों का जताया आभार
माधुरी की वापसी के बाद सुदीप जैन ने महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वनतारा प्रशासन, अनंत अंबानी परिवार, सर्वोच्च न्यायालय और हाई-पावर कमेटी सहित इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देशभर से मिले समर्थन और लगातार किए गए प्रयासों के कारण माधुरी की वापसी का विषय संबंधित स्तरों तक पहुंचा। उनके अनुसार, यह केवल एक हथिनी की वापसी नहीं बल्कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों की भावनाओं के सम्मान का अवसर है।
माधुरी की वापसी को अहिंसा और पशु संरक्षण से जोड़कर देखा गया
सुदीप जैन ने माधुरी की वापसी को अहिंसा, पशु संरक्षण और संवेदना से जुड़ा विषय बताया। उनका कहना है कि इस अभियान ने यह संदेश दिया कि किसी पशु के प्रति समाज की भावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं और पशु कल्याण के साथ-साथ जनभावनाओं को भी उचित मंच पर रखा जा सकता है। हालांकि माधुरी की वापसी के बाद भी उसकी देखभाल और पुनर्वास से जुड़े नियमों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। उपलब्ध रिपोर्टों में नांदणी मठ में उसके लिए सुविधाएं विकसित किए जाने और आगे पशु कल्याण संबंधी मानकों के अनुसार उसकी देखभाल किए जाने की बात कही गई है।
करीब एक साल बाद पूरी हुई घर वापसी
माधुरी की कहानी करीब एक वर्ष तक चले संघर्ष की कहानी बन गई। उपचार के लिए वनतारा ले जाए जाने के बाद उसकी वापसी की मांग लगातार उठती रही। आंदोलन, पदयात्रा, सामाजिक अभियान, प्रशासनिक प्रयास और न्यायिक प्रक्रिया के कई चरणों के बाद अंततः नांदणी में उसके पुनर्वास का रास्ता साफ हुआ। पूर्व सांसद राजू शेट्टी की 45 किलोमीटर की पदयात्रा और मेरठ से सुदीप जैन सहित देशभर के लोगों द्वारा उठाई गई आवाज इस पूरे अभियान के प्रमुख हिस्सों में रही। 10 सितंबर को वनतारा से माधुरी की रवानगी और 11 सितंबर को नांदणी वापसी के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे लंबे संघर्ष की बड़ी सफलता बताया है।
माधुरी की कहानी के प्रमुख पड़ाव
28 जुलाई 2025: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार माधुरी को उपचार के लिए वनतारा ले जाया गया।
2025-26: उसकी वापसी की मांग को लेकर सामाजिक और कानूनी स्तर पर अभियान जारी रहा।
45 किलोमीटर पदयात्रा: पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में माधुरी की वापसी की मांग को लेकर पदयात्रा निकाली गई।
10 अगस्त 2026: नांदणी में माधुरी के लिए उपलब्ध सुविधाओं का संयुक्त समिति द्वारा निरीक्षण किया गया।
9 सितंबर 2026: उच्चस्तरीय समिति की प्रक्रिया के बाद माधुरी को नांदणी वापस ले जाने की अनुमति का रास्ता साफ हुआ।
10 सितंबर 2026: माधुरी को वनतारा से नांदणी के लिए रवाना किया गया।
11 सितंबर 2026: माधुरी की नांदणी वापसी की खबर सामने आई और क्षेत्र में खुशी का माहौल बना।
निष्कर्ष
माधुरी की नांदणी वापसी ने एक लंबे सामाजिक और कानूनी संघर्ष को नया पड़ाव दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय लोगों की भावनाओं, जैन समाज के प्रयासों, पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व वाले आंदोलन और मेरठ से सुदीप जैन सहित देश के विभिन्न हिस्सों से उठी आवाज की भूमिका रही। माधुरी की वापसी के साथ अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उसकी सुरक्षित, स्वस्थ और नियमों के अनुरूप देखभाल की है। आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए उसकी घर वापसी जनभावना और एकजुटता की जीत है, जबकि आगे की व्यवस्था में पशु कल्याण और निर्धारित कानूनी मानकों का पालन सर्वोपरि रहेगा।