महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार को लेकर उनके आवास पर वार्ता करने पहुंचे राजुद्दीन गोदरे
शाहीन खान और नफीसा खान के आवास पर पहुंचे बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग
नई दिल्ली । सरकार और शासन-प्रशासन से सवाल पूछने वाली महिला पत्रकारों आयुष्मती शाहीन खान एवं नफीसा खान के साथ कथित पुलिस ज्यादती, दुर्व्यवहार, यातना और धमकी के आरोपों को लेकर बहुजन मुक्ति पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रभारी राजुद्दीन गादरे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकारों और उनके परिजनों से मिले राजुद्दीन गादरे
राजुद्दीन गादरे अपने आंदोलनकारी एवं समर्थक साथियों के साथ पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के आवास पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पत्रकारों और उनके परिजनों से मुलाकात कर कथित घटना के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया और कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा तथा स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गादरे ने कहा कि पत्रकारों से जुड़े किसी भी मामले में तथ्यों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘पत्रकार का सवाल सत्ता से दुश्मनी नहीं, लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी’
बहुजन मुक्ति पार्टी नेता ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। पत्रकार सरकार की नीतियों, प्रशासन की कार्यप्रणाली और आम जनता की समस्याओं को सामने रखने का काम करते हैं। ऐसे में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी पत्रकार को सवाल पूछने के कारण कथित रूप से डराना, धमकाना या प्रताड़ित करना गंभीर विषय है। उनके अनुसार सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना किसी व्यक्ति या संस्था से दुश्मनी नहीं, बल्कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी है। राजुद्दीन गादरे ने कहा, “सत्ता किसी की भी हो, पत्रकार का सवाल सत्ता से दुश्मनी नहीं होता। सवाल पूछने का अधिकार लोकतंत्र की ताकत है। यदि सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकारों पर दबाव बनाया जाएगा तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने की कोशिश होगी।”
पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
गादरे ने कहा कि पुलिस प्रशासन का मूल दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से जांच कराई जाए तथा जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे जनता से जुड़े मुद्दों को स्वतंत्र रूप से उठा सकें। विशेष रूप से महिला पत्रकारों से संबंधित शिकायतों को संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ सुना जाना चाहिए।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि महिलाओं के साथ अपराध, दुर्व्यवहार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है। पत्रकार जब ऐसे संवेदनशील विषयों को उठाते हैं तो उन्हें संरक्षण और सहयोग मिलना चाहिए, न कि किसी प्रकार का दबाव। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवालों के लिए स्थान होना जरूरी है। पत्रकारिता का काम केवल समाचार प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज के सामने महत्वपूर्ण सवालों को रखना भी है।
‘कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायिक रास्ता अपनाएगी पार्टी’
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि यदि शिकायतों और लगाए गए आरोपों पर पुलिस प्रशासन द्वारा उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है तो बहुजन मुक्ति पार्टी लोकतांत्रिक एवं कानूनी रास्ते अपनाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पीड़ित पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध कानूनी एवं न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने पत्रकार समुदाय से भी अपील की कि वे किसी भी दबाव के सामने झुकने के बजाय निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता जारी रखें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की भूमिका को कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए।
मुलाकात के दौरान कई साथी रहे मौजूद
पत्रकारों और उनके परिजनों से मुलाकात के दौरान मा. कल्लू प्रधान बीएसडीसी, मो. सलीम सैफी, डॉ. फुरकान अली, पत्रकार जान मोहम्मद, शायर एवं पत्रकार इरफान राही, असगर सैफी, कासिम, आमिर, मौहम्मद जुनैद, तकी अख्तर, बाबा खान सैफी बीएसएस, जितेन्द्र कुमार, अरविंद कुमार नागवंशी सहित अन्य साथी एवं सहयोगी मौजूद रहे।
‘पत्रकार की कलम और सवाल को दबाया नहीं जा सकता’
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकार की कलम और सवालों को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र की ताकत है और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने दोहराया कि पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए और किसी भी शिकायत की स्थिति में कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच तथा उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए