सी सी एस यू के नित्य योग शिविर में योग अभ्यास करते लोग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के ग्यारहवें दिन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं मंगलाचरण के साथ आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण में हुआ। शिविर में बड़ी संख्या में योग साधकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और योग प्रेमियों ने सहभागिता कर योगाभ्यास, प्राणायाम और आध्यात्मिक चिंतन का लाभ प्राप्त किया।
शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में योगाचार्य अमरपाल ने उपस्थित प्रतिभागियों को योग दर्शन, जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिक उन्नति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने का मूल मंत्र “अभ्यास और वैराग्य” है। व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्य कर रहा हो, यदि वह नियमित, निरंतर और समर्पित भाव से अभ्यास करता है तो सफलता निश्चित रूप से उसके कदम चूमती है।
महर्षि पतंजलि ने भी बताया अभ्यास और वैराग्य का महत्व
योगाचार्य अमरपाल ने कहा कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि ने भी अपने योग सूत्रों में चित्तवृत्तियों के निरोध के लिए अभ्यास और वैराग्य को सबसे महत्वपूर्ण साधन बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को दीर्घकाल तक निरंतर प्रयास करना पड़ता है और परिणामों के प्रति अनावश्यक आसक्ति छोड़नी होती है।
उन्होंने कहा कि जब साधक का अभ्यास परिपक्व हो जाता है, तब उसके भीतर स्वतः वैराग्य का भाव उत्पन्न होने लगता है। वैराग्य का अर्थ संसार से दूर भागना नहीं, बल्कि कर्म करते हुए उसके फल के प्रति आसक्ति का त्याग करना है।
अष्टांग योग से होता है व्यक्तित्व का समग्र विकास
अपने व्याख्यान में योगाचार्य अमरपाल ने महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योग के आठ अंग—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—मानव जीवन के समग्र विकास का आधार हैं।
उन्होंने कहा कि यम और नियम व्यक्ति के चरित्र निर्माण, नैतिक विकास और अनुशासित जीवन की नींव रखते हैं। वहीं आसन और प्राणायाम शरीर को स्वस्थ तथा मन को संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
योगाचार्य ने बताया कि प्रत्याहार इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर भीतर की ओर केंद्रित करने की प्रक्रिया है। नियमित अभ्यास से साधक की धारणा मजबूत होती है, ध्यान में स्थिरता आती है और अंततः वह समाधि की अवस्था की ओर अग्रसर होता है।
गीता के संदेशों का किया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान योगाचार्य अमरपाल ने श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यज्ञ, तप और दान के महत्व को समझाते हुए इन्हें कभी न छोड़ने की प्रेरणा दी थी।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए, लेकिन परिणामों को लेकर अत्यधिक चिंतित नहीं होना चाहिए। यही निष्काम कर्म का सिद्धांत है, जो भारतीय दर्शन और योग परंपरा का मूल आधार है।
उन्होंने बताया कि एक कर्मयोगी को अनासक्त भाव से कर्म करते हुए कर्मफल का त्याग करना चाहिए, जबकि ज्ञानयोग का साधक स्वयं के कर्तापन के अहंकार को त्यागकर आत्मज्ञान की दिशा में आगे बढ़ता है।
आधुनिक जीवन में योग की बढ़ती आवश्यकता
योगाचार्य अमरपाल ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा, व्यस्त जीवनशैली और भौतिकवादी सोच के कारण लोगों का जीवन असंतुलित होता जा रहा है। ऐसे समय में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने वाली वैज्ञानिक पद्धति है।
उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। नियमित योगाभ्यास से न केवल अनेक रोगों से बचाव संभव है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त की जा सकती है।
साधकों को कराया गया विभिन्न योगासनों का अभ्यास
योग सत्र के दौरान प्रतिभागियों को अनेक महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास कराया गया। इनमें शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, पद्म मयूरासन और पद्मासन प्रमुख रहे।
योगाचार्य ने प्रत्येक आसन की सही विधि, उससे जुड़ी सावधानियों और शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की लचीलापन, संतुलन और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
प्राणायाम से बढ़ती है मानसिक एकाग्रता
योग शिविर में प्राणायाम सत्र के दौरान साधकों को कपालभाति, अनुलोम-विलोम, उज्जायी और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया।
योगाचार्य अमरपाल ने बताया कि नियमित प्राणायाम करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है और मानसिक तनाव व चिंता में कमी आती है। उन्होंने विशेष रूप से भ्रामरी प्राणायाम को मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे उपस्थित
शिविर में योग विज्ञान विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, अर्चना, पुष्पेंद्र कुमार, शिवानंद, ओजस्वी, राधा और ज्योति सहित अनेक योग साधक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास करने तथा योग के माध्यम से स्वस्थ, संतुलित, अनुशासित और मूल्यपरक जीवन जीने का संकल्प लिया।
योग शिविर बना स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरूकता का केंद्र
सीसीएसयू के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह नित्य योग शिविर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों के बीच योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल योगाभ्यास कराया जा रहा है, बल्कि भारतीय योग दर्शन, जीवन मूल्यों और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से भी परिचित कराया जा रहा है।