नशा मुक्त युवा सशक्त भारत
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ, सकारात्मक एवं मूल्यपरक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के समाजशास्त्र विभाग में ‘नशा-मुक्त युवा, सशक्त भारत’ विषयक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता ने विद्यार्थियों को नशे से जुड़े स्वास्थ्य, पारिवारिक और सामाजिक प्रभावों के बारे में जानकारी देते हुए जागरूक किया।
युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने पर जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजशास्त्र विभाग के सह-विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार ने किया। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता डॉ. तुंगवीर आर्य का स्वागत करते हुए कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच के साथ अपने भविष्य के प्रति सजग रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर डॉ. नेहा गर्ग, डॉ. डी.एन. भट्ट, डॉ. अरविंद सिरोही एवं डॉ. अजित सिंह सहित विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
नशे की शुरुआत और उसके प्रभावों को व्यावहारिक उदाहरणों से समझाया
कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. तुंगवीर आर्य ने विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने दैनिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कई बार नशे की शुरुआत जिज्ञासा या सामाजिक दबाव जैसी परिस्थितियों से हो सकती है, लेकिन समय के साथ यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, परिवार और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. आर्य ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर सजग रहने तथा किसी भी प्रकार के नशे से बचने के लिए प्रेरित किया।
नैतिक शिक्षा और जीवन-मूल्यों से जोड़ा गया विषय
विशेषज्ञ वक्ता ने नशा मुक्ति के विषय को नैतिक शिक्षा, जीवन-मूल्यों और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ा। उन्होंने आत्मसंयम, सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति के निर्णय और व्यवहार का प्रभाव केवल उस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है। इसलिए युवाओं के लिए सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश
कार्यशाला के दौरान मानव जीवन के विभिन्न आयामों और सामाजिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि दैनिक जीवन में आने वाली सामाजिक समस्याओं का सामना तार्किक, वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाना चाहिए।
सामाजिक सरोकारों एवं समस्याओं को समझने के लिए विद्यार्थियों को पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर तथ्यों और तार्किक चिंतन के आधार पर परिस्थितियों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
कार्यशाला का सत्र संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक रहा। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विशेषज्ञ वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। डॉ. तुंगवीर आर्य ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और स्वस्थ जीवनशैली, आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डाला।
नशा-मुक्त युवा स्वस्थ समाज की आधारशिला
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि युवाओं को नशे से दूर रखकर स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जा सकता है। कार्यक्रम में युवाओं से स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की अपील की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला युवाओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनशीलता और सकारात्मक जीवन-मूल्यों को बढ़ावा देने पर केंद्रित रही। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया।