सुरेंद्र कोहली (फाइल फोटो)
नोएडा के चर्चित और भयावह निठारी नरसंहार मामले में सुप्रीम कोर्ट से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। शुक्रवार (18 सितंबर 2026) की सुबह उसका शव भूपतवाला क्षेत्र (सप्तऋषि रोड) स्थित उसकी चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटका हुआ पाया गया। जेल से रिहा होने के बाद कोली हरिद्वार में किराए पर चाय का ठेका चलाकर अपना जीवन यापन कर रहा था।
घटना का ब्योरा: चाय की दुकान में मिला शव
पुलिस को शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे सूचना मिली कि सप्त सरोवर मार्ग पर लाल माता मंदिर के पास स्थित एक चाय की दुकान में एक व्यक्ति फांसी के फंदे पर लटका हुआ है।
- पुलिस कार्रवाई: सूचना मिलते ही सप्तऋषि चौकी पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा गया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
- पहचान: मृतक की पहचान 50 वर्षीय सुरेंद्र कोली, पुत्र शंकु राम, निवासी ग्राम मंगरूखाल (अल्मोड़ा, उत्तराखंड) के रूप में हुई।
- कोई सुसाइड नोट नहीं: शुरुआती छानबीन में मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।
निठारी कांड से सुप्रीम कोर्ट से बरी होने तक का सफर
वर्ष 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कोठी डी-5 से बच्चों और महिलाओं के अवशेष मिलने के बाद निठारी कांड का पर्दाफाश हुआ था। - आरोप और फांसी की सजा: कोठी में नौकर रहे सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाकर दर्जनों मामलों में नामजद किया गया था। निचली अदालत ने उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई थी।
- निर्दोष होकर रिहाई: लगभग 19 साल जेल में बिताने के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट और बाद में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली को साक्ष्यों के अभाव और जांच की कमियों के आधार पर अंतिम मामले में भी बरी कर दिया और तुरंत रिहाई का आदेश दिया था।
जेल से बाहर आने के बाद हरिद्वार में बना लिया था ठिकाना
सुप्रीम कोर्ट से निर्दोष साबित होने के बाद सुरेंद्र कोली ने समाज की मुख्यधारा में लौटने की कोशिश की। वह हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में रहने लगा और जीवन यापन के लिए एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने लगा।
हालांकि, वर्षों का कारावास और अतीत के दागों के बीच नया जीवन शुरू करने की चुनौतियों का सामना करते हुए अंततः उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। - देश के सबसे खौफनाक आपराधिक मामलों में से एक का केंद्र रहे सुरेंद्र कोली के इस अंत ने सभी को चौंका दिया है। अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद भी गुमनामी और अकेलेपन में चाय की दुकान चलाते हुए उसकी आत्महत्या ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।