सुरेन्द्र कोहली [फाइल फोटो]
दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में हुए भयावह नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। कारोबारी मनिंदर सिंह पंढेर की कोठी डी-5 के पीछे नाले से बच्चों और महिलाओं के कंकाल और इंसानी अवशेष बरामद हुए थे। इस मामले में पंढेर के नौकर सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया गया था। कोली पर मासूमों का अपहरण, दुष्कर्म, हत्या और शरीर के टुकड़े-टुकड़े करने जैसे संगीन आरोप लगे थे। लगभग दो दशकों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब यह मामला अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है।
निठारी कांड का खुलासा और सुरेंद्र कोली की भूमिका
निठारी कांड तब सामने आया जब इलाके से लगातार लापता हो रहे बच्चों की तलाश में परिजनों ने पुलिस पर दबाव बनाया। जांच के दौरान डी-5 कोठी के पीछे से कंकाल मिले।
- सीबीआई (CBI) की जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई।
- आरोप और इकबालिया बयान: सीबीआई के अनुसार, सुरेंद्र कोली बच्चों को टॉफी और लालच देकर कोठी के अंदर बुलाता था। इसके बाद उनके साथ घिनौना कृत्य कर उनकी हत्या कर देता था और शवों को काट कर नाले में फेंक देता था। शुरुआत में कोली ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल भी किया था।
निचली अदालत से फांसी की सजा और लंबी कानूनी लड़ाई
निठारी कांड से जुड़े करीब 16 मामलों में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। - गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट: निचली अदालत ने अधिकांश मामलों में साक्ष्यों और बयानों के आधार पर सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया और उसे फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई।
- फांसी की सजा में देरी: कोली की दया याचिका के निपटारे में अत्यधिक देरी होने के आधार पर 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जांच एजेंसियों को फटकार
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी कांड में एक बड़ा मोड़ ला दिया। अदालत ने सुरेंद्र कोली को उसके खिलाफ दर्ज मामलों में बरी कर दिया। - जांच की कमियां: हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी (CBI) आरोपियों के खिलाफ ठोस और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रही।
- स्वीकारोक्ति पर सवाल: अदालत ने माना कि पुलिस हिरासत में लिया गया इकबालिया बयान नियमों के तहत दर्ज नहीं था और यह प्रलोभन या दबाव में लिया गया हो सकता है। इसके अलावा मानव अंगों के व्यापार (Organ Trade) के कोण की सही जांच न होने पर भी सवाल उठाए गए।
सुप्रीम कोर्ट से अंतिम बरी और रिहाई का आदेश
सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। - अंतिम फैसले में बरी: नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुरेंद्र कोली को उसके खिलाफ बचे हुए अंतिम मामले में भी बरी कर दिया।
- अदालत की टिप्पणी: शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या कमजोर साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जब एक ही तरह के साक्ष्यों पर 12 अन्य मामलों में बरी किया जा चुका है, तो एक केस में सजा बनाए रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
CONCLUSION:
सुरेंद्र कोली को लगभग 18-19 साल जेल में बिताने के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत से निर्दोष मानते हुए रिहा कर दिया गया। हालांकि, इस फैसले ने भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। निठारी के पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी वहीं है कि अगर मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली दोषी नहीं थे, तो आखिरकार उनके मासूम बच्चों का कातिल कौन था?