मेरठ कॉलेज मेरठ
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा आगामी 16 जून 2026 से शुरू होने वाली बी.एड. परीक्षाओं के लिए चार अन्य परीक्षा केंद्रों के अभ्यर्थियों का केंद्र मेरठ कॉलेज निर्धारित किए जाने के बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मेरठ कॉलेज प्रशासन ने संसाधनों और कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए बाहरी परीक्षार्थियों की परीक्षा कराने में असमर्थता जताई है तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वह पहले भी कई बार विश्वविद्यालय को अपनी प्रशासनिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन संबंधी सीमाओं से अवगत करा चुका है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने कॉलेज की व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज करते हुए चार अलग-अलग केंद्रों के बी.एड. परीक्षार्थियों की परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी मेरठ कॉलेज को सौंप दी है।
पहले भी किया था अनुरोध, नहीं हुआ समाधान
मेरठ कॉलेज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि महाविद्यालय ने पूर्व में कई अवसरों पर विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर अन्य केंद्रों की परीक्षाएं मेरठ कॉलेज में आयोजित न किए जाने का अनुरोध किया था। कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि वर्तमान परिस्थितियों में अतिरिक्त परीक्षार्थियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करना संभव नहीं है।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा केंद्र निर्धारण में कॉलेज की आपत्तियों और सुझावों को महत्व नहीं दिया गया, जिससे अब परीक्षा संचालन को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।
ग्रीष्मकालीन अवकाश और जनगणना कार्य बना बड़ी चुनौती
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार वर्तमान समय में अधिकांश शिक्षक ग्रीष्मकालीन अवकाश पर हैं। वहीं बड़ी संख्या में लिपिकीय कर्मचारी जनगणना कार्य में व्यस्त हैं। ऐसे में परीक्षा संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
कॉलेज का कहना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों, कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करना बेहद कठिन हो गया है।
संसाधनों की कमी से परीक्षा संचालन पर संकट
मेरठ कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध संसाधनों, कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यवस्था की सीमाओं के कारण अन्य केंद्रों के अभ्यर्थियों की परीक्षा सुचारु रूप से संपन्न कराना संभव नहीं है।
कॉलेज का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में बाहरी परीक्षार्थियों को एक ही केंद्र पर समायोजित किया जाता है तो परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
व्यवधान होने पर कॉलेज नहीं होगा जिम्मेदार
महाविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाता और परीक्षा संचालन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या व्यवधान उत्पन्न होता है, तो उसकी जिम्मेदारी मेरठ कॉलेज प्रशासन की नहीं होगी।
कॉलेज ने इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि संसाधनों की वास्तविक स्थिति से विश्वविद्यालय को पहले ही अवगत कराया जा चुका है।
विश्वविद्यालय से पुनर्विचार की मांग
मेरठ कॉलेज ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन से एक बार फिर अपील की है कि परीक्षा केंद्रों के निर्धारण संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। कॉलेज का कहना है कि परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए व्यावहारिक और न्यायसंगत निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि बी.एड. परीक्षाएं बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि परीक्षा केंद्रों का संतुलित वितरण न केवल विद्यार्थियों के हित में होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी और सुचारु बनाएगा।
प्रेस प्रवक्ता ने रखी कॉलेज की बात
मेरठ कॉलेज के प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज ने कहा कि कॉलेज प्रशासन विद्यार्थियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अतिरिक्त परीक्षा केंद्रों का भार उठाना संभव नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से यथार्थ परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।
प्रमुख बिंदु
- 16 जून से शुरू हो रही बी.एड. परीक्षाओं को लेकर मेरठ कॉलेज की आपत्ति।
- चार अन्य परीक्षा केंद्रों के अभ्यर्थियों का केंद्र बनाया गया मेरठ कॉलेज।
- शिक्षकों के अवकाश और कर्मचारियों के जनगणना कार्य में व्यस्त होने से बढ़ी परेशानी।
- संसाधनों और मानवबल की कमी का हवाला देकर जताई असमर्थता।
- परीक्षा में व्यवधान होने पर जिम्मेदारी लेने से किया इनकार।
- विश्वविद्यालय प्रशासन से परीक्षा केंद्रों के पुनर्निर्धारण की मांग।
अब निगाहें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि वह मेरठ कॉलेज की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्रों के संबंध में कोई नया फैसला लेता है या पूर्व निर्धारित व्यवस्था को ही बरकरार रखता है।