विष्णु कुमार शर्मा, राष्ट्रीय खिलाड़ी फुटबॉल
मेरठ। मेरा जन्म 24,दिसंबर 1956 को घनानंद इन्टर कॉलेज मसूरी(उत्तराखंड) में हुआ था।मैं मिशन इन्टर कॉलेज पिथौरागढ का 1964 से 1967 तक छात्र रहा।दस वर्ष की आयु से फुटबाल खेलना शुरु किया। वहां फुटबाल लीग हुआ करती थी।मेरा भी खेलने का शौक जागा। नंगे पैर खेलना शुरु किया।फुटबाल एक ऐसा सस्ता खेल था कि उस समय के अधिकतर छात्र एवं वरिष्ठ खेला करते थे। तत्पश्चात मेरठ आने के बाद भिन्न भिन्न कॉलेज की टीमों से प्रतिनिधित्व करता रहा।साथ ही हाकी और क्रिकेट का भी खिलाड़ी रहा ।सर्व प्रथम 1974 में राष्ट्रीय कैम्प मेरठ में कोचिंग का अवसर प्राप्त हुआ। बाजवा साहब एवं जेम्स वेलिंगटन हमारे कोच थे।
पहली बार कोचिंग ली,उससे पहले हमारे सीनियर्स जैसा बताते थे हम सीखते थे,उनका बहुत मान सम्मान था। मेरठ यूनिवर्सिटी का कई वर्षों तक हाकी,फुटबाल में प्रतिनिधित्व किया।1979 में मेरठ यूनिवर्सिटी का कप्तान घोषित हुआ। 1980 से 1982 तक उत्तर प्रदेश फुटबाल टीम का सदस्य रहा (राष्ट्रीय खिलाड़ी) हुआ। तब हमको फुटबाल कोच मिले,उससे पहले यूनिवर्सिटी में भी कोई कोच नहीं होता था।हां अच्छी बात यह थी कि उस समय क्लब होते थे टूर्नामेंटस खेलने का मौका मिलता था,मेरठ में आर्मी सेन्टरस थे जिनके साथ अक्सर मैच आर्गनाइज होते थे जिससे खेल में सुधार हुआ। उस समय में जहां तक मेरा विचार है कि खेल मंत्रालय का जूनियर लेवल पर कुछ हास्टल स्थापित हुए थे लेकिन अधिकांश खिलाड़ी अपने अपने कॉलेज से खेलते थे। मंत्रालय का उच्च स्तरीय शिक्षा संस्थानों में नगण्य था।
मेरे समय के बहुत साथियों ने फुटबाल और हाकी में प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। मेरा स्पोर्ट्स कोटे में 1984 में केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क में निरीक्षक पद पर नियुक्ति मिली,और बीस वर्षो तक नोर्थ जोन रिवेन्यू मीट में हाकी,फुटबाल एवं क्रिकेट में प्रतिनिधित्व किया,2016 में सहायक आयुक्त पद से सेवानिवृत हुआ।आज के समय में सरकार खेलों को बहुत प्रोत्साहन दे रही है,खेल सुविधाएं उपलब्ध हें,खिलाड़ियों को ट्रेन्ड करने के लिए एन.आई. एस.कोच हैं।हां अन्त में एक बात कहना चाहुंगा कि बेसिक स्तर पर खेल अनिवार्य होना चाहिए तथा क्लब कल्चर होना चाहिए। जैसा क्रिकेट खिलाड़ियों पर धन वर्षा हो रही है सरकार का ध्यान आपके माध्यम से फुटबाल एवं हाकी के लिए भी आकर्षित करना चाहुंगा।