सरचार्ज के खिलाफ एम. डी पावर को ज्ञापन देते व्यापारी नेता लोकेश कुमार अग्रवाल
मेरठ। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश (पंजी.) ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जून माह से बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लगाए जाने की घोषणा का कड़ा विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग से इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को एक ज्ञापन भेजकर कहा है कि बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला यह निर्णय पूरी तरह अनुचित एवं जनविरोधी है। उन्होंने कहा कि बिजली दरों में इस प्रकार की बढ़ोतरी से प्रदेश के उद्योग, व्यापार और आम जनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि ईंधन अधिभार लागू करने से पूर्व राज्य सरकार एवं विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।
व्यापार मंडल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि वर्तमान में औद्योगिक एवं घरेलू बिजली उपभोक्ताओं से पहले ही फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। वहीं वाणिज्यिक श्रेणी (एलएमवी-2) के उपभोक्ताओं पर फिक्स चार्ज के साथ-साथ न्यूनतम शुल्क (मिनिमम चार्ज) का भी अतिरिक्त भार डाला जाता है। इसके अलावा सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं से 7.5 प्रतिशत विद्युत शुल्क (इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) भी लिया जा रहा है।
लोकेश अग्रवाल ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग प्रत्येक वर्ष बिजली उत्पादन लागत, वितरण खर्च और अन्य आर्थिक पहलुओं की समीक्षा करने के बाद सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करता है तथा उपभोक्ताओं के सुझाव प्राप्त करने के बाद बिजली दरों का निर्धारण करता है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के बीच में अचानक 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस प्रकार के अधिभार लगाने की परंपरा शुरू हुई तो भविष्य में भी बिना व्यापक समीक्षा के बिजली दरों में वृद्धि की जा सकती है, जिससे महंगाई को बढ़ावा मिलेगा और आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
व्यापार मंडल का कहना है कि बिजली दरों में अचानक वृद्धि से प्रदेश के उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की लागत बढ़ जाएगी। उत्पादन और संचालन खर्च बढ़ने से छोटे एवं मध्यम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि ईंधन अधिभार के नाम पर बिजली बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत की वृद्धि को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जारी किए जाएं, ताकि उद्योग, व्यापार और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि आयोग जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में उचित निर्णय लेगा और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगा।