धार्मिक अनुष्ठानों का भक्तिभाव के साथ हुआ समापन
मेरठ। श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, आनंदपुरी में दसलक्षण धर्म पर्व के पावन अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यंत भक्तिभाव एवं हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। पर्वराज दसलक्षण के अंतिम दिन मंदिर जी के संपूर्ण प्रांगण में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और वातावरण प्रभु भक्ति के जयकारों से गुंजायमान रहा।
प्रातः कालीन बेला में धार्मिक क्रियाओं का शुभारंभ अत्यंत निष्ठा के साथ किया गया। सौधर्म इंद्रों एवं श्रद्धालुओं द्वारा दो विशाल पाण्डुक शिलाओं पर प्रथम तीर्थंकर शांति के सागर भगवान शांतिनाथ एवं 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी को परम भक्ति के साथ विराजमान किया गया। इसके उपरांत प्रभु का अलौकिक अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न की गई। विश्व शांति एवं प्राणिमात्र के कल्याण की भावना से की गई शांति धारा कराने का परम सौभाग्य चैतन्य जैन, सुनील जैन (प्रवक्ता), अरुण जैन तथा प्रदीप जैन को प्राप्त हुआ।
अभिषेक व शांति धारा के पश्चात मुख्य पंडाल में देव-शास्त्र-गुरु, सोलहकारण भावना, जिनवाणी माँ एवं वर्तमान शासननायक भगवान महावीर स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना विधि-विधान से प्रारंभ हुई। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में पिछले दस दिनों से निरंतर चल रहे अलौकिक तत्वार्थ सूत्र महामंडल विधान का बड़ी धूमधाम एवं मंत्रोच्चार के साथ समापन किया गया। विधान की पूर्णाहुति पर आयोजित महाहवन में श्रद्धालुओं ने पूर्ण आहुति देते हुए कुल 1111 आहुतियाँ समर्पित कीं। स्वाहाकार की ध्वनि के साथ दी गई इन आहुतियों से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सुगंध से महक उठा।
संध्या काल में समस्त धर्मावलंबियों एवं श्रद्धालुओं ने एकत्रित होकर प्रभु की सामूहिक संगीतमय आरती उतारी। दीपों की झिलमिलाहट और भक्ति गीतों के बीच संपूर्ण मंदिर प्रांगण भक्ति रस में सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में संपूर्ण दसलक्षण पर्व एवं विधान को सुव्यवस्थित तथा मांगलिक रीति से संपन्न कराने वाले विधानाचार्य श्री नंदन शास्त्री जी का मंदिर प्रबंध समिति एवं समाज के वरिष्ठ जनों द्वारा शॉल ओढ़ाकर तथा पुष्पमाला पहनाकर भावभीना अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।
मंदिर जी के प्रवक्ता सुनील कुमार जैन ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि दसलक्षण महापर्व के समापन के उपरांत कल आत्म-विशुद्धि और सौहार्द का प्रतीक ‘क्षमावाणी पर्व’ श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा, जिसमें क्षमावाणी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी तथा सभी जैन बंधु एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए उत्तम क्षमा की याचना करेंगे।
इस विशाल धार्मिक आयोजन को सकुशल एवं भव्य रूप से संपन्न कराने में श्री सुनील जैन (प्रवक्ता), तरस चंद जैन, अरुण जैन, सत्येंद्र जैन, शैलेंद्र जैन, रचित जैन, अरिहंत जैन, संजीव जैन, प्रमोद जैन तथा अनुराग जैन सहित समस्त आनंदपुरी जैन समाज के पदाधिकारियों एवं युवाओं का विशेष सहयोग व अतुलनीय योगदान रहा।