नाइजीरिया के विवाह कानून पर डॉ॰ विवेक त्यागी ने दिया अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने नाइजीरिया के विवाह के नागरिक कानून पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में व्याख्यान दिया। ग्लोबल कैंपस—इंटरनेशनल इंटर्नशिप यूनिवर्सिटी (IIU) की ओर से आयोजित इस वेबिनार का विषय “कॉन्जुगल कॉनकॉर्ड एंड द आर्किटेक्चर ऑफ लॉ: ए फिलॉसॉफिकल-डॉक्ट्रिनल इंक्वायरी इनटू द सिविल लॉ ऑफ मैरिज इन नाइजीरिया” रहा। आयोजन नाइजीरिया के 66वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया गया।
वेबिनार में अंतरराष्ट्रीय कानूनविदों, न्यायविदों, शोधार्थियों और नीति विशेषज्ञों ने सहभागिता की। डॉ. त्यागी ने अपने व्याख्यान में नाइजीरिया की वैधानिक, प्रथागत और इस्लामिक कानूनी व्यवस्थाओं के बीच संबंधों का विस्तृत कानूनी और दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
विवाह कानून के दार्शनिक आधारों पर चर्चा
डॉ. त्यागी ने व्याख्यान की शुरुआत वैवाहिक कानून के दार्शनिक आधारों से की। उन्होंने सर हेनरी मेन के ‘स्टेटस एंड कॉन्ट्रैक्ट’ सिद्धांत का उल्लेख करते हुए नाइजीरिया में प्रचलित प्रथागत और वैधानिक विवाह व्यवस्थाओं के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि प्रथागत विवाह मुख्य रूप से सामाजिक स्वीकृति, परंपरा और परिवारों के संबंधों पर आधारित होता है, जबकि वैधानिक विवाह में व्यक्तिगत सहमति, सरकारी प्रक्रिया और औपचारिक पंजीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने प्राकृतिक कानून के संदर्भ में नाइजीरियाई वैवाहिक कानून में समानता के विकास पर चर्चा की। साथ ही फ्रेडरिक कार्ल वॉन सैविग्नी के ऐतिहासिक स्कूल और ‘वॉल्क्सगाइस्ट’ की अवधारणा के माध्यम से बताया कि किस प्रकार स्थानीय समुदायों की परंपराएं कानून के विकास को प्रभावित करती हैं।
डॉ. त्यागी ने कानूनी बहुलवाद की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नाइजीरिया में वैधानिक, प्रथागत और इस्लामिक कानूनी व्यवस्थाएं एक साथ अस्तित्व में हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। उन्होंने संवैधानिक अधिकारों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए भी मौलिक अधिकारों की सर्वोच्चता कायम रहनी चाहिए।
वैवाहिक व्यवस्थाओं की कानूनी स्थिति समझाई
व्याख्यान के दौरान डॉ. त्यागी ने नाइजीरिया के त्रिस्तरीय कानूनी ढांचे के व्यावहारिक पहलुओं को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि मैरिज एक्ट और मैट्रीमोनियल कॉजेज एक्ट के तहत होने वाले वैधानिक विवाह की अपनी अलग कानूनी व्यवस्था है। इसके विपरीत प्रथागत और इस्लामिक विवाह अलग कानूनी परंपराओं के तहत संचालित होते हैं।
उन्होंने प्रथागत विवाह की वैधता से जुड़े विभिन्न पहलुओं, जैसे आपसी सहमति, ‘ब्राइड प्राइस’ और विवाह की सामाजिक प्रक्रिया पर भी चर्चा की। साथ ही ऐसे मामलों की कानूनी स्थिति को समझाया, जिनमें प्रथागत विवाह के बाद वैधानिक विवाह किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक विवाह के रहते दूसरे विवाह से जुड़े मामलों में नाइजीरियाई कानून में अलग-अलग कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं।
महिलाओं के संपत्ति अधिकार पर ऐतिहासिक फैसलों का उल्लेख
व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं के संपत्ति और उत्तराधिकार अधिकारों से संबंधित नाइजीरिया के सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों पर केंद्रित रहा। डॉ. त्यागी ने विभिन्न न्यायिक फैसलों के क्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि नाइजीरियाई न्यायपालिका ने उन प्रथागत व्यवस्थाओं पर हस्तक्षेप किया है, जिनके कारण महिलाओं को उनके संपत्ति अधिकारों से वंचित किया जाता था।
उन्होंने वर्ष 2014 के उकेजे बनाम उकेजे और अनेक्वे बनाम न्वेके जैसे महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन फैसलों में बेटियों और कुछ मामलों में विधवाओं को संपत्ति के अधिकार से वंचित करने वाली भेदभावपूर्ण प्रथाओं को संवैधानिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना गया।
आधुनिक कानून के सामने चुनौतियों पर भी चर्चा
डॉ. त्यागी ने नाइजीरियाई पारिवारिक कानून के सामने मौजूद समकालीन चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बाल विवाह की न्यूनतम आयु से जुड़े कानूनी प्रावधानों और संवैधानिक प्रावधानों के बीच मौजूद विरोधाभासों का उल्लेख किया। इसके अलावा बच्चों की कस्टडी और संपत्ति विवादों में अलग-अलग अदालतों का रुख करने की प्रवृत्ति यानी ‘फोरम शॉपिंग’ की समस्या पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप प्रथागत तथा इस्लामिक कानूनों में आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि समानता और मौलिक अधिकारों के सिद्धांतों के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित हो सके।
व्याख्यान को बताया विषय का समेकित अध्ययन
वेबिनार के समापन पर इंटरनेशनल इंटर्नशिप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. चार्ल्स यूसीहोलो इभोरिया ने डॉ. विवेक कुमार त्यागी का धन्यवाद किया। उन्होंने व्याख्यान को विषय के विभिन्न कानूनी और दार्शनिक पहलुओं को समेकित करने वाला बताया।
इस अवसर पर प्रो. बूहारी इसास और प्रो. चूकोबूयूनोओसो चार्ल्स आफोइओम सहित अन्य शिक्षाविद और प्रतिभागी उपस्थित रहे।