कथा व्यास आचार्य हेमांशु गेरोला
मेरठ, 8 अक्टूबर 2026। मेरठ के पांडव नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में गढ़वाल सभा मेरठ के तत्वावधान में आयोजित श्री पंच महापुराण कथा महोत्सव में गुरुवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ज्ञान की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। कथा महोत्सव के दौरान विभिन्न आचार्यों ने शिव महापुराण, देवी भागवत महापुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। इस अवसर पर भगवान शिव के अग्निलिंग प्राकट्य, जालंधर के मोक्ष, मां आदिशक्ति भुवनेश्वरी की महिमा तथा भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था, प्रेम, विश्वास और समर्पण का संदेश दिया गया।
कथा महोत्सव में आचार्यों ने धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक सद्भाव के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को भारतीय सनातन परंपरा के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
शिव महापुराण में अग्निलिंग के प्राकट्य और जालंधर के मोक्ष की कथा का वर्णन
श्री पंच महापुराण कथा महोत्सव के अंतर्गत शिव महापुराण की कथा सुनाते हुए आचार्य विवेकानंद जी ने भगवान शिव के अग्निलिंग के प्राकट्य का धार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने शिव महापुराण में वर्णित भगवान शिव के अनंत और दिव्य स्वरूप की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
आचार्य विवेकानंद जी ने बताया कि भगवान शिव का अग्निलिंग स्वरूप उनकी अनंत सत्ता और परम दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। शिव महापुराण में भगवान शिव के इस स्वरूप का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।

उन्होंने कथा के माध्यम से भगवान शिव की महिमा, उनकी सर्वोच्च सत्ता और सृष्टि में उनके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके साथ ही आचार्य विवेकानंद जी ने जालंधर से जुड़े पौराणिक प्रसंग और उसके मोक्ष की कथा का वर्णन किया। उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से धर्म, अहंकार, शक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण के महत्व को समझाया।
कथा में बताया गया कि पौराणिक प्रसंगों का उद्देश्य केवल धार्मिक घटनाओं का वर्णन करना नहीं, बल्कि मानव जीवन को सदाचार, धर्म और आध्यात्मिक चेतना की दिशा में प्रेरित करना भी है।
देवी भागवत महापुराण में मां आदिशक्ति भुवनेश्वरी की महिमा का गुणगान
श्री पंच महापुराण कथा महोत्सव के दौरान देवी भागवत महापुराण की कथा में आचार्य अनिल मलासी जी ने मां आदिशक्ति की दिव्य महिमा का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि देवी भागवत महापुराण में मां आदिशक्ति को संपूर्ण सृष्टि की मूल शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। मां भुवनेश्वरी को जगत की अधिष्ठात्री शक्ति माना गया है, जिनकी कृपा से सृष्टि की रचना, पालन और संचालन का कार्य संपन्न होता है।
आचार्य अनिल मलासी जी ने देवी भागवत के पौराणिक प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि मां आदिशक्ति भुवनेश्वरी ने ब्रह्मा जी को मां सरस्वती, भगवान विष्णु को मां लक्ष्मी और भगवान रुद्र को मां रुद्राणी की शक्ति प्रदान की।
इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि देवी भागवत की मान्यता के अनुसार सृष्टि के सृजन, पालन और संहार की शक्तियों का मूल स्रोत मां आदिशक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि मां सरस्वती ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री हैं, मां लक्ष्मी समृद्धि और ऐश्वर्य की प्रतीक हैं, जबकि मां रुद्राणी शक्ति और दिव्य ऊर्जा का स्वरूप हैं।
आचार्य अनिल मलासी जी ने श्रद्धालुओं को देवी उपासना का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए बताया कि भारतीय सनातन परंपरा में शक्ति की आराधना का विशेष स्थान है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा ने दिया प्रेम और समर्पण का संदेश
श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य हिमांशु गैरोला जी ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रेम, अटूट विश्वास, श्रद्धा और समर्पण का महत्वपूर्ण संदेश देता है।
आचार्य हिमांशु गैरोला जी ने कहा कि रुक्मिणी जी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम सांसारिक आकर्षण से कहीं ऊपर था। उनका प्रेम भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण का प्रतीक था।
उन्होंने बताया कि सच्चा प्रेम मनुष्य को स्वार्थ की भावना से ऊपर उठाकर त्याग, विश्वास, मर्यादा और समर्पण का मार्ग दिखाता है।
भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि जीवन में प्रेम के साथ विश्वास और सम्मान का होना अत्यंत आवश्यक है।
जहां प्रेम, विश्वास और सम्मान हो, वहीं संबंधों में आती है स्थिरता : आचार्य हिमांशु गैरोला
कथा व्यास आचार्य हिमांशु गैरोला जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह समाज को पारिवारिक और सामाजिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि जहां प्रेम के साथ विश्वास, सम्मान और समर्पण की भावना होती है, वहीं संबंधों में वास्तविक सुख और स्थायित्व आता है।
आज के समय में परिवार और समाज में आपसी प्रेम, सम्मान तथा विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पारिवारिक संबंधों में एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना और कठिन परिस्थितियों में साथ निभाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आचार्य हिमांशु गैरोला जी ने कहा कि धार्मिक कथाओं से मिलने वाले संदेशों को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों का अनुसरण करते हुए प्रेम, सेवा, सद्भाव, मर्यादा और संस्कारों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
धार्मिक कथाओं के माध्यम से सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों का संदेश
गढ़वाल सभा मेरठ के तत्वावधान में आयोजित श्री पंच महापुराण कथा महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को प्रस्तुत किया गया।
शिव महापुराण में भगवान शिव की महिमा और अग्निलिंग के प्राकट्य की कथा ने श्रद्धालुओं को शिव तत्व के आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराया। वहीं देवी भागवत महापुराण में मां आदिशक्ति भुवनेश्वरी की महिमा के माध्यम से सृष्टि में शक्ति के महत्व का वर्णन किया गया।
इसी प्रकार श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग ने प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का संदेश दिया।
कथा महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ समाज में संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों और आपसी सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करना है।
गढ़वाल सभा मेरठ के आयोजन में धर्म और संस्कृति का संगम
पांडव नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में आयोजित श्री पंच महापुराण कथा महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम बना हुआ है।
आयोजन के दौरान विभिन्न आचार्यों द्वारा सुनाए जा रहे पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षाओं की जानकारी दी जा रही है।
गुरुवार की कथा में आचार्य विवेकानंद जी ने भगवान शिव की महिमा, आचार्य अनिल मलासी जी ने मां आदिशक्ति के दिव्य स्वरूप और आचार्य हिमांशु गैरोला जी ने भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक संदेश को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कथा महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, प्रेम, सेवा, विश्वास और समर्पण जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।