वन्य जीव सप्ताह के कार्यक्रम में किया गया सम्मान
मेरठ/हस्तिनापुर, 8 अक्टूबर 2026। वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के प्रति आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत मेरठ जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। हस्तिनापुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। इस दौरान विद्यार्थियों को प्राकृतिक पर्यावरण, पक्षियों, वनस्पतियों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से पिछले एक वर्ष के दौरान किए गए वन्यजीव संरक्षण कार्यों की जानकारी भी साझा की गई। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मेरठ वन्दना फोगाट ने बताया कि जनपद में बीते एक वर्ष के दौरान वन विभाग की टीम ने 602 वन्यजीवों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा है। इसके अलावा गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
हस्तिनापुर में विशेषज्ञों ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर किया मंथन
हस्तिनापुर में वन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘Co-existence with Wildlife & Reducing Human-Wildlife Conflict’ अर्थात वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मेरठ के वन संरक्षक आदर्श कुमार उपस्थित रहे। उनके साथ हस्तिनापुर ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल, शिक्षाविद एवं मन की बात कार्यक्रम के जिला प्रभारी सुनील पोसवाल, प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ रजत भार्गव, जंतु विज्ञानी प्रोफेसर नरेश कुमार, वनस्पति विज्ञानी विजयबीर सिंह, साहित्य के प्रोफेसर मोनू सिंह और विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. अमान सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं।
कार्यक्रम के दौरान हस्तिनापुर की समृद्ध जैव विविधता, स्थानीय पक्षियों, वनस्पतियों और गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए गए।

नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग में विद्यार्थियों ने दिखाई रुचि
कार्यक्रम की शुरुआत नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग गतिविधियों के साथ हुई। इसमें 10 प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों और उनके शिक्षकों के साथ राजकीय महाविद्यालय हस्तिनापुर के विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
इस दौरान विद्यार्थियों को हस्तिनापुर के प्राकृतिक परिवेश से परिचित कराया गया। बच्चों ने विभिन्न प्रकार के पक्षियों, स्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता को करीब से देखा तथा उनके महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की।
नेचर ट्रेल के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राकृतिक वातावरण में रहने वाले जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के बीच संबंधों को समझने का अवसर मिला। वहीं, बर्ड वॉचिंग गतिविधि के दौरान पक्षियों की पहचान और उनके संरक्षण से संबंधित जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने फोटोग्राफी चैलेंज में भी भाग लिया और प्राकृतिक दृश्यों तथा पक्षियों की तस्वीरों के माध्यम से अपनी रुचि प्रदर्शित की।
बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया।
प्रतियोगिताओं में बच्चों ने प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त सांत्वना पुरस्कार भी वितरित किए गए।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
वन विभाग की प्रदर्शनी में दिखाए गए वन्यजीव रेस्क्यू और अग्निशमन उपकरण
हस्तिनापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें वन्यजीवों के रेस्क्यू कार्यों में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों, अग्निशमन संसाधनों, नर्सरी और वृक्षारोपण कार्यों से संबंधित उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों और उपस्थित अतिथियों को वन विभाग की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। वन विभाग की टीम द्वारा वन्यजीव संरक्षण, वनाग्नि से सुरक्षा, पौधशाला संचालन और वृक्षारोपण गतिविधियों के संबंध में जानकारी साझा की गई।
इसके साथ ही अतिथियों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें हस्तिनापुर के वन्यजीवों, गंगा पारिस्थितिकी तंत्र, पक्षियों की विविधता और संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई।
एक वर्ष में 602 वन्यजीवों को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मेरठ वन्दना फोगाट ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में विभाग द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान मेरठ जनपद में कुल 602 वन्यजीवों को रेस्क्यू किया गया है।
उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम ने विभिन्न स्थानों पर वन्यजीवों के मिलने की सूचना पर रेस्क्यू अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित पकड़ा और उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।
वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसके साथ छेड़छाड़ न करें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम द्वारा सुरक्षित कार्रवाई की जा सके।
हस्तिनापुर के मोड़कला गांव में तेंदुए का किया गया था सुरक्षित रेस्क्यू
प्रभागीय निदेशक वन्दना फोगाट ने बताया कि 7 मई 2026 को हस्तिनापुर रेंज के अंतर्गत ग्राम मोड़कला में तेंदुआ दिखाई देने की सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई थी।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अभियान के दौरान एक तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार के अभियानों का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को संभावित खतरे से बचाना भी है।
गंगा में बढ़ रही डॉल्फिन की संख्या, वर्ष 2018 में 31 से बढ़कर 2024 में हुई 52
वन्यजीव सप्ताह के दौरान गंगा नदी में डॉल्फिन संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई।
प्रभागीय निदेशक वन्दना फोगाट ने बताया कि बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक गंगा नदी का क्षेत्र गंगेय डॉल्फिन के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि गणना रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में इस क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या 31 थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 52 हो गई।
वन विभाग के अनुसार, यह वृद्धि गंगा नदी में डॉल्फिन संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
गंगेय डॉल्फिन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण जीव है। इसके संरक्षण के लिए नदी की स्वच्छता, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और जलीय जैव विविधता को बनाए रखना आवश्यक है।
परीक्षितगढ़ में विद्यार्थियों को गंगा, डॉल्फिन और घड़ियाल संरक्षण की दी जानकारी
वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत परीक्षितगढ़ रेंज के माध्यमिक विद्यालय तरबियतपुर जनूबी में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी, नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी तुषार और परीक्षितगढ़ रेंज के समस्त स्टाफ ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को गंगा नदी को स्वच्छ रखने और जलीय जीवों के संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
विशेष रूप से गंगेय डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुओं के संरक्षण पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखना जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
खरखौदा और गगोल में भी वन्यजीव संरक्षण के प्रति किया जागरूक
मेरठ रेंज के अंतर्गत खरखौदा स्थित जीके इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में वन्य प्राणी सप्ताह के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं और गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
इसी प्रकार रिठानी रेंज के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गगोल में भी विश्व वन्यजीव सप्ताह मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और रिठानी रेंज के वन विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस दौरान छात्र-छात्राओं को वन्यजीवों के महत्व, उनके संरक्षण और प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया गया।
सरधना में ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण का दिया संदेश
वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत ग्राम पंचायत कार्यालय सरधना देहात में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में सरधना के क्षेत्रीय वन अधिकारी परविन्दर सिंह ने ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए जागरूक किया।
कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और संरक्षण कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए जनभागीदारी जरूरी : वन्दना फोगाट
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मेरठ वन्दना फोगाट ने बताया कि वन्य प्राणी सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य आम जनता को वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और पशु कल्याण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि पूरे सप्ताह जनपद के विभिन्न विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में गोष्ठियों, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, चित्रकला प्रतियोगिताओं तथा अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इन कार्यक्रमों में स्कूली छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षकों और ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा में योगदान देना चाहिए। वन्दना फोगाट ने वन्य प्राणी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने वाले सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जनपदवासियों से वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।