हाउस अरेस्ट विजय सोनकर
मेरठ। कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष विनोद सोनकर ने गंगानगर थाना पुलिस पर उन्हें चार दिनों के भीतर तीसरी बार हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शुक्रवार तड़के करीब एक बजे गंगानगर थाना प्रभारी विनय कुमार लगभग आठ से दस पुलिसकर्मियों और उपनिरीक्षकों के साथ उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता ने नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।
देर रात पुलिस के पहुंचने से उठे सवाल, चार दिन में तीसरी बार कार्रवाई का दावा
कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष विनोद सोनकर के अनुसार, 09 अक्टूबर की तड़के करीब एक बजे गंगानगर थाना प्रभारी विनय कुमार पुलिस टीम के साथ उनके घर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें घर से बाहर जाने से रोक दिया और नजरबंद कर लिया। विनोद सोनकर ने बताया कि उन्होंने थाना प्रभारी से सवाल किया कि आखिर चार दिनों के भीतर उन्हें तीसरी बार हाउस अरेस्ट क्यों किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई का कारण और संबंधित अधिकारी के आदेश की जानकारी भी मांगी।सोनकर के मुताबिक, उनके सवाल पर थाना प्रभारी ने केवल इतना कहा कि ऊपर से आदेश हैं। हालांकि, किस अधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई और इसके पीछे क्या कारण है, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
रामलीला और दशहरा मेले की तैयारियों में जुटे हैं विनोद सोनकर
विनोद सोनकर ने बताया कि वह इन दिनों अपनी रामलीला कमेटी के सदस्यों के साथ रामलीला और दशहरा मेले की तैयारियों में व्यस्त हैं। आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और अन्य आवश्यक कार्यों को लेकर उन्हें शुक्रवार सुबह 11 बजे जिलाधिकारी से मुलाकात करने जाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों को अपने निर्धारित कार्यक्रम और जिलाधिकारी से प्रस्तावित मुलाकात के संबंध में जानकारी देने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई। सोनकर का कहना है कि वह किसी विरोध-प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधि में शामिल होने नहीं जा रहे थे, बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की तैयारियों के सिलसिले में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलना चाहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह रामलीला और दशहरा मेले जैसे सार्वजनिक आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे हैं, तो उन्हें बार-बार घर में नजरबंद किए जाने का औचित्य क्या है।
पुलिस ने एसपी देहात से बात करने की दी सलाह
विनोद सोनकर के अनुसार, उन्होंने गंगानगर थाना प्रभारी से स्पष्ट किया कि शुक्रवार को उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करनी है और उनका घर से बाहर जाना आवश्यक है।
इस पर थाना प्रभारी विनय कुमार ने कथित तौर पर कहा कि वह शुक्रवार सुबह एसपी देहात से बातचीत कर लें। वरिष्ठ अधिकारी की ओर से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सोनकर ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि बिना स्पष्ट कारण बताए बार-बार किसी राजनीतिक कार्यकर्ता को घर में नजरबंद करना उचित नहीं है।
‘बार-बार हाउस अरेस्ट करना लोकतंत्र की हत्या’ – विनोद सोनकर
कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष विनोद सोनकर ने पुलिस की कथित कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को संविधान के अंतर्गत स्वतंत्रता और अपने अधिकारों का उपयोग करने का अवसर प्राप्त है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को बार-बार बिना कारण बताए घर में नजरबंद करना उसके संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। सोनकर ने आरोप लगाया कि पिछले चार दिनों में तीन बार उन्हें हाउस अरेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन को उनसे ऐसी कौन-सी आशंका है, जिसके चलते लगातार इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “मुझे बार-बार हाउस अरेस्ट करना लोकतंत्र की हत्या है। हमारा संविधान इस प्रकार की मनमानी कार्रवाई की इजाजत नहीं देता। यदि मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है तो उसका कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।”
पुलिस कार्रवाई के आधार और आदेश को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि प्रशासन को किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी आशंका है, तो उसके बारे में उन्हें स्पष्ट रूप से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत करने और कानून के दायरे में रहकर कार्य करने के पक्षधर हैं, लेकिन बार-बार नजरबंद किए जाने से उनके सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक आयोजन से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सोनकर ने पुलिस प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि उन्हें किस आधार पर और किस अधिकारी के आदेश से घर में नजरबंद किया जा रहा है।
पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष विनोद सोनकर की ओर से लगाए गए आरोप सामने आए हैं। गंगानगर थाना पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारण, आदेश और कानूनी आधार के संबंध में आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नजरबंदी किन परिस्थितियों में की गई और इसके पीछे प्रशासन की क्या वजह रही। वहीं, विनोद सोनकर ने बार-बार की जा रही इस कथित कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से जवाब मांगा है।