स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल छात्राएं
मेरठ, 9 अक्टूबर 2026। रघुनाथ गर्ल्स पीजी कॉलेज, मेरठ में छात्राओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महाविद्यालय के स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा वनस्पति विज्ञान शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में ‘व्यवहार में प्रकृति: हर्बल उत्पाद एवं स्वास्थ्य देखभाल’ विषय पर प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को औषधीय वनस्पतियों, प्राकृतिक संसाधनों और हर्बल उत्पादों के निर्माण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्या एवं संरक्षिका प्रो. निवेदिता कुमारी के निर्देशन एवं संरक्षण में किया गया। इस अवसर पर शिक्षिकाओं ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक उपयोग तथा हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग समय की आवश्यकता: प्रो. निवेदिता कुमारी
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। प्रकृति में उपलब्ध औषधीय पौधे और अन्य उपयोगी वनस्पतियां मानव जीवन तथा स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान करना भी है, जिनके माध्यम से वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
प्राचार्या ने कहा कि इस प्रकार के कौशल आधारित प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्राओं को पाठ्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करने तथा अर्जित ज्ञान का उपयोग अपने व्यक्तित्व विकास और भविष्य के करियर निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया।
केवल डिग्री नहीं, व्यावहारिक कौशल भी जरूरी: प्रो. नीना बतरा
कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभाग की प्रभारी प्रो. नीना बतरा ने कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों का कुशल होना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है।
उन्होंने कहा कि बदलते रोजगार बाजार में केवल किताबी ज्ञान और शैक्षणिक डिग्री के आधार पर नौकरी प्राप्त करना अथवा व्यवसाय में सफलता हासिल करना पर्याप्त नहीं रह गया है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार नए कौशल विकसित करने होंगे।
प्रो. नीना बतरा ने कहा कि हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं के लिए उद्यमिता के नए अवसरों को समझने में सहायक हो सकता है। ऐसे पाठ्यक्रम छात्राओं को अपनी शिक्षा के साथ अतिरिक्त कौशल अर्जित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों के निर्माण का मिलेगा प्रशिक्षण
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुपमा सिंह ने प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य छात्राओं को औषधीय एवं उपयोगी वनस्पतियों, प्राकृतिक संसाधनों तथा स्वास्थ्य देखभाल में पौधों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है।
उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं को विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों की उपयोगिता, पारंपरिक वनस्पति ज्ञान और उसके वैज्ञानिक आधार को समझने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त हर्बल मिश्रणों तथा स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित उत्पादों के निर्माण की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
डॉ. अनुपमा सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे छात्राओं में प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ उनकी व्यावहारिक दक्षता का भी विकास होगा।
हर्बल उत्पादों के प्रति बढ़ रही जागरूकता: डॉ. गरिमा मलिक
कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान समन्वयक डॉ. गरिमा मलिक ने सभी अतिथियों, शिक्षिकाओं और छात्राओं का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। हर्बल फॉर्मूलेशन और स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक वनस्पति ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को समझा जा सकता है।
डॉ. गरिमा मलिक ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वनस्पति आधारित उत्पादों के प्रति एक बार फिर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, ऐसे उत्पादों का उपयोग वैज्ञानिक जानकारी, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि छात्राओं को हर्बल उत्पादों के निर्माण से संबंधित ज्ञान उपलब्ध कराना उनकी शैक्षणिक दक्षता बढ़ाने के साथ भविष्य में रोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं को समझने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
लगभग 50 छात्राओं ने लिया भाग, हर्बल उत्पादों के प्रति दिखाया उत्साह
प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के शुभारंभ कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। छात्राओं ने प्राकृतिक संसाधनों, औषधीय वनस्पतियों तथा हर्बल उत्पादों के निर्माण से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में विशेष रुचि दिखाई।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि वनस्पति विज्ञान का अध्ययन केवल पौधों की संरचना और उनके वैज्ञानिक वर्गीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध स्वास्थ्य देखभाल, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और विभिन्न व्यावहारिक उपयोगों से भी है।
महाविद्यालय की इस पहल से छात्राओं को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ अतिरिक्त कौशल विकसित करने और भविष्य में उपलब्ध करियर विकल्पों को समझने का अवसर मिलेगा।
शिक्षिकाओं की रही विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रो. छाया तेवतिया, प्रो. अमिता शर्मा, निरलप कौर, प्रो. दीक्षा यजुर्वेदी, संयोगिता, डॉ. गीता सिंह और डॉ. शीतल सहित महाविद्यालय की अनेक शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के आयोजन में वनस्पति विज्ञान विभाग तथा संबंधित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी प्रो. सुनीता चौधरी एवं डॉ. पूनम लता सिंह ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की।
रघुनाथ गर्ल्स पीजी कॉलेज में शुरू किया गया यह प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम छात्राओं को पारंपरिक वनस्पति ज्ञान के साथ आधुनिक वैज्ञानिक समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े व्यावहारिक कौशल के माध्यम से छात्राओं को आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।