थापर नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में सत्संग करते गुरु राजेश सेठी
मेरठ। आर्य समाज थापर नगर के रविवारीय सत्संग में “दान क्यों और कैसे?” विषय पर उद्बोधन दिया गया। राजेश सेठी ने कहा कि जिस प्रकार लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए बीमा कराते हैं, उसी तरह इहलोक और पारलौकिक जीवन के कल्याण के लिए दान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेदों में दान देने वालों के कल्याण का संदेश दिया गया है और धर्म की रक्षा के तीन आधारों में दान भी प्रमुख है।
राजेश सेठी ने गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण ने दान, यज्ञ और तप जैसे कर्मों को कभी नहीं छोड़ने का संदेश दिया है। उनके अनुसार, समाज में ज्ञान, श्रेष्ठ विचार और भोजन का दान देकर सेवा करने वाले लोगों और कार्यों को सहयोग देना चाहिए। जरूरतमंद की तात्कालिक आवश्यकता पूरी करना उपयोगी है, लेकिन उसे आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दिया गया दान सर्वोत्तम है। विद्या और ज्ञान के प्रसार के लिए किया गया दान समाज और राष्ट्र के कल्याण में सहायक होता है।
उन्होंने कहा कि दान नम्रतापूर्वक और श्रेष्ठ उद्देश्य की पूर्ति के लिए देना चाहिए। अहंकार के साथ दिया गया दान तामसिक माना गया है। मनुष्य को यह स्मरण रखना चाहिए कि धन और अन्य भोग्य पदार्थ परमपिता परमात्मा की देन हैं; इसी भाव से दिया गया दान सार्थक होता है।
डॉ. संदीप आर्य ने भी दान के महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि दान निराभिमानी होकर और सुपात्र व्यक्ति को देना चाहिए। कार्यक्रम में धर्मवीर सिंह, प्रीति सेठी और रेखा आर्य ने सुंदर भजन प्रस्तुत किए।
आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञ के यजमान श्रीमती सुनीता और मुकेश कन्नौजिया रहे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। इस अवसर पर करुणा सागर बाली, धर्मवीर, भानु बत्रा, कमलेश चांदना, विदुला सोनी, ऋचा सेठी, आशीष सेठी, अरविंद कुमार, विकास शर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, राजन खन्ना, राकेश ओबराय, विजय बंसल और अजय सोम उपस्थित रहे।