शाहजहांपुर की बिस्मिल गन्ना किस्म
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों ने गन्ना अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। परिषद की ओर से विकसित गन्ना किस्म को.शा. 17231 ‘बिस्मिल’ को अखिल भारतीय समन्वित गन्ना शोध परियोजना के तहत नॉर्थ-वेस्ट जोन में अगेती गन्ना किस्मों के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय मानक के रूप में मान्यता दी गई है। अब इस क्षेत्र में विकसित और परीक्षण की जा रही नई अगेती किस्मों का मूल्यांकन ‘बिस्मिल’ के प्रदर्शन से तुलना करके किया जाएगा।
परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि अखिल भारतीय समन्वित गन्ना शोध परियोजना के नॉर्थ-वेस्ट जोन में उत्तर प्रदेश के मध्य और पश्चिमी क्षेत्र के साथ उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नई अगेती किस्मों के प्रदर्शन का आकलन अब को.शा. 17231 के सापेक्ष किया जाएगा। किस्मों को जारी करने की प्रक्रिया में यह मानक मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। निदेशक ने इस उपलब्धि को परिषद के वैज्ञानिकों के शोध प्रयासों का परिणाम बताते हुए पूरी टीम को बधाई दी।
परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. सुजीत प्रताप सिंह ने बताया कि यह निर्णय महाराष्ट्र के राहुरी में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में लिया गया। इससे पहले पंजाब की गन्ना किस्म को.जे. 64 नॉर्थ-वेस्ट जोन की राष्ट्रीय मानक थी। अब उसके स्थान पर शाहजहांपुर में विकसित को.शा. 17231 को यह जिम्मेदारी दी गई है।
परिषद के अनुसार, को.शा. 17231 को अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में ‘बिस्मिल’ नाम से जारी किया गया था। इस किस्म को नॉर्थ-वेस्ट जोन की अगेती गन्ना किस्मों के परीक्षण का मानक बनाए जाने से शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद के अनुसंधान कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।