हृदय रोग: कारण, लक्षण, बचाव, इलाज और भारत में उपचार की सुविधाएं
महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों—किसी भी उम्र में हो सकता है हृदय रोग; समय पर जांच और इलाज से जोखिम कम किया जा सकता है
हृदय शरीर में रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब हृदय की मांसपेशियों, धमनियों, वाल्व या धड़कन की विद्युत प्रणाली में समस्या आती है, तो उसे हृदय रोग कहा जाता है। इसमें दिल की धमनियों में रुकावट, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, अनियमित धड़कन, वाल्व की बीमारी और जन्मजात हृदय दोष शामिल हैं। हृदय और रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के व्यापक समूह को कार्डियोवैस्कुलर रोग (CVD) कहा जाता है। इसमें स्ट्रोक भी शामिल है, हालांकि स्ट्रोक मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारी है। इसलिए हृदय रोग और CVD के आंकड़ों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
भारत में हृदय रोग के मामले और मौतें
भारत में हृदय रोग के हर साल होने वाले मामलों की कोई एक ऐसी वास्तविक समय की राष्ट्रीय गणना उपलब्ध नहीं है, जिसमें हर मरीज और हर अस्पताल का रिकॉर्ड शामिल हो। इसलिए विशेषज्ञ रिपोर्टें मॉडल-आधारित अनुमान देती हैं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) 2021 के अनुसार, भारत में 2021 के दौरान करीब 1.08 करोड़ नए CVD मामले अनुमानित किए गए थे। यह आंकड़ा हृदय और रक्तवाहिकाओं के व्यापक समूह का है, केवल हार्ट अटैक का नहीं।
GBD 2023 पर आधारित उपलब्ध आंकड़े भारत में 2023 के दौरान CVD से करीब 31.2 लाख मौतों का अनुमान देते हैं। वहीं भारत के मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) रिकॉर्ड में 2023 में संचार प्रणाली की बीमारियों से 6,91,086 प्रमाणित मौतें दर्ज हुईं। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग तरीकों से तैयार किए गए हैं। MCCD का आंकड़ा केवल उन मौतों को दर्शाता है जिनका चिकित्सकीय प्रमाणन हुआ; यह सभी मौतों की पूरी गिनती नहीं है। इसलिए इसे देश में CVD से हुई कुल मौतों का आंकड़ा नहीं मानना चाहिए।
हृदय रोग के प्रमुख प्रकार
- कोरोनरी आर्टरी डिजीज: हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां संकरी या बंद हो जाती हैं। इससे सीने में दर्द और हार्ट अटैक हो सकता है।
- हार्ट अटैक: हृदय की मांसपेशी तक रक्त का प्रवाह अचानक रुकने या बहुत कम होने से मांसपेशी को नुकसान पहुंचता है।
- हार्ट फेल्योर: हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप नहीं कर पाता। इसका अर्थ यह नहीं कि हृदय पूरी तरह काम करना बंद कर चुका है।
- धड़कन की अनियमितता: हृदय बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित धड़क सकता है।
- वाल्व संबंधी रोग: हृदय के वाल्व ठीक से खुल या बंद नहीं होते, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
- जन्मजात हृदय दोष: हृदय की बनावट में ऐसी समस्या जो जन्म से मौजूद हो; कुछ दोष गर्भावस्था में या जन्म के तुरंत बाद पहचाने जाते हैं, जबकि कुछ बाद में सामने आते हैं।
- रूमेटिक हृदय रोग: कुछ बच्चों में स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण के बाद होने वाला रूमेटिक बुखार हृदय के वाल्व को नुकसान पहुंचा सकता है।
महिलाओं, पुरुषों और अलग-अलग उम्र के लोगों में जोखिम
पुरुषों में धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि हृदय रोग का जोखिम बढ़ाते हैं। कम उम्र में भी हृदय रोग हो सकता है, खासकर जब कई जोखिम एक साथ मौजूद हों या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हो।
महिलाओं में भी सीने में दर्द या दबाव हार्ट अटैक का आम संकेत है। इसके अलावा सांस फूलना, मितली, उल्टी, पीठ या जबड़े में दर्द और असामान्य थकान जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप या अन्य हृदय संबंधी जटिलताओं की जांच जरूरी है। गर्भावस्था के आखिरी समय या प्रसव के बाद हृदय की मांसपेशी कमजोर होने की एक दुर्लभ समस्या भी हो सकती है; ऐसे में डॉक्टर की निगरानी जरूरी है।
बच्चों में जन्मजात हृदय दोष और रूमेटिक हृदय रोग प्रमुख चिंताएं हैं। दूध पीते समय जल्दी थकना या पसीना आना, सांस तेज चलना, होंठों या त्वचा का नीला पड़ना और वजन ठीक से न बढ़ना कुछ बच्चों में जांच की वजह बन सकते हैं। लगातार गले के संक्रमण, बुखार और जोड़ों के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए; डॉक्टर जरूरत पड़ने पर जांच और इलाज तय करेंगे। गंभीर जन्मजात दोष वाले कुछ बच्चों को दवा, कैथेटर प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
बुजुर्गों में उम्र के साथ रक्तवाहिकाओं और हृदय में बदलाव के कारण उच्च रक्तचाप, हार्ट फेल्योर और अनियमित धड़कन का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्गों और मधुमेह से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण कभी-कभी स्पष्ट नहीं होते; असामान्य थकान, सांस फूलना, चक्कर या कमजोरी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
हृदय रोग होने के कारण और जोखिम बढ़ाने वाले कारक
हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमा होने से रक्त का रास्ता संकरा हो सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और रक्त में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। धूम्रपान और तंबाकू, असंतुलित खानपान, अधिक नमक और ट्रांस फैट, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और हानिकारक मात्रा में शराब भी जोखिम बढ़ाते हैं। वायु प्रदूषण, लंबे समय का तनाव और परिवार में हृदय रोग का इतिहास भी जोखिम से जुड़े हैं। कुछ लोगों में जन्मजात समस्या, संक्रमण, गुर्दे की बीमारी या गर्भावस्था से संबंधित स्थिति कारण बन सकती है।
लक्षण जिन्हें पहचानना जरूरी है
हृदय रोग कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। हार्ट अटैक में सीने के बीच दबाव, जकड़न, भारीपन या दर्द हो सकता है। दर्द एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक फैल सकता है। सांस फूलना, ठंडा पसीना, मितली, चक्कर, बेहोशी और अचानक तेज या अनियमित धड़कन भी संकेत हो सकते हैं।
स्ट्रोक के लक्षण अलग हैं। चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन—विशेषकर शरीर के एक तरफ—बोलने या समझने में कठिनाई, नजर में अचानक समस्या, संतुलन बिगड़ना या अचानक तेज सिरदर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
हार्ट अटैक या स्ट्रोक की आशंका होने पर इंतजार न करें। भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर कॉल किया जा सकता है। मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए; आपातकालीन सेवा की मदद लें। बिना चिकित्सकीय सलाह नई दवा देना या पहले से लिखी दवा अचानक बंद करना उचित नहीं है।
जांच कैसे होती है?
डॉक्टर मरीज के लक्षण, उम्र, परिवार के इतिहास और पहले से मौजूद बीमारियों के आधार पर जांच तय करते हैं। आम जांचों में रक्तचाप मापना, रक्त में शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच, ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी, ट्रोपोनिन रक्त जांच, तनाव जांच और जरूरत पड़ने पर कोरोनरी एंजियोग्राफी शामिल हो सकती हैं। धड़कन की समस्या में होल्टर मॉनिटर या अन्य रिदम जांच की जा सकती है। हर व्यक्ति को हर जांच की जरूरत नहीं होती; जांच का चुनाव चिकित्सक करते हैं।
भारत के राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियों की जांच पर जोर दिया जाता है। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध जांच और रेफरल सेवाओं की जानकारी ली जा सकती है।
हृदय रोग की औषधियां और उपचार
हृदय रोग का इलाज बीमारी के प्रकार, गंभीरता, मरीज की उम्र, गर्भावस्था, गुर्दे की स्थिति और अन्य दवाओं पर निर्भर करता है। दवाओं के नाम नीचे सामान्य उदाहरण के रूप में दिए गए हैं; इन्हें स्वयं शुरू या बंद न करें।
- रक्तचाप नियंत्रित करने वाली दवाएं: कैल्शियम चैनल ब्लॉकर, एसीई इनहिबिटर, एआरबी और कुछ स्थितियों में बीटा ब्लॉकर। उदाहरण के तौर पर अम्लोडिपिन, एनालाप्रिल, टेल्मिसार्टन या मेटोप्रोलोल का उपयोग डॉक्टर विशेष परिस्थितियों में कर सकते हैं।
- कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाएं: स्टैटिन वर्ग की दवाएं, जैसे एटोरवास्टेटिन या रोसुवास्टेटिन, कुछ मरीजों में धमनियों में भविष्य की रुकावट का जोखिम घटाने के लिए दी जाती हैं।
- खून के थक्के बनने से रोकने वाली दवाएं: एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल जैसी एंटीप्लेटलेट दवाएं कुछ हार्ट अटैक या स्टेंट के बाद दी जा सकती हैं। एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी स्थितियों में एंटीकोआगुलेंट दवा की जरूरत हो सकती है। इनसे रक्तस्राव का जोखिम हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी जरूरी है।
- हार्ट फेल्योर की दवाएं: मरीज की स्थिति के अनुसार मूत्रवर्धक दवाएं और अन्य हृदय-सुरक्षात्मक दवाएं दी जा सकती हैं।
- एंजाइना की दवाएं: सीने के दर्द को नियंत्रित करने वाली दवाएं चिकित्सक की सलाह से उपयोग की जाती हैं।
हार्ट अटैक में अस्पताल में तत्काल उपचार के साथ एंजियोप्लास्टी और स्टेंट, कुछ मामलों में थक्का घोलने वाली दवा या बाईपास सर्जरी की जरूरत हो सकती है। वाल्व की बीमारी में वाल्व की मरम्मत या बदलाव, जबकि गंभीर अनियमित धड़कन में पेसमेकर, एब्लेशन या अन्य उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है। WHO भी उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़े हुए रक्त वसा के उपचार को हृदयाघात और स्ट्रोक का जोखिम घटाने के उपायों में शामिल करता है।
बचाव के लिए क्या करें?
- तंबाकू, सिगरेट और वेपिंग से बचें; यदि आदत है तो इसे छोड़ने के लिए चिकित्सकीय सहायता लें।
- रोजमर्रा के भोजन में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। बहुत नमकीन, तले हुए और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थ सीमित रखें।
- वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि एक सामान्य लक्ष्य है। बच्चों और किशोरों को औसतन रोज 60 मिनट गतिविधि की सलाह दी जाती है। पहले से हृदय रोग या अन्य बीमारी हो तो व्यायाम का स्तर डॉक्टर से पूछें।
- WHO वयस्कों के लिए नमक की कुल मात्रा प्रतिदिन 5 ग्राम से कम रखने की सलाह देता है। इसमें खाना बनाते समय डाला गया नमक और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद नमक दोनों शामिल हैं।
- रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराएं। जांच की आवृत्ति उम्र और जोखिम के अनुसार डॉक्टर से तय करें।
- पर्याप्त नींद लें, लंबे समय तक बैठे रहने के बीच थोड़ी गतिविधि करें और शराब का हानिकारक सेवन न करें।
भारत में हृदय रोग के प्रमुख उपचार केंद्र
भारत में सरकारी, शिक्षण और निजी अस्पतालों में हृदय रोग की जांच, दवा, कैथेटर प्रक्रिया और सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं—यह रैंकिंग या पूरी सूची नहीं है। किस अस्पताल में कौन-सी सुविधा उपलब्ध है, प्रतीक्षा समय, खर्च और पात्रता की जानकारी अस्पताल से सीधे लें।
- एम्स, नई दिल्ली: कार्डियोथोरेसिक साइंसेज सेंटर में कार्डियोलॉजी और हृदय सर्जरी की सुविधाएं हैं; बच्चों और नवजातों के लिए भी विशेष सेवाएं उपलब्ध हैं।
- पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़: एडवांस्ड कार्डियक सेंटर में कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी और कैथ लैब सेवाएं हैं।
- सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली: कार्डियोलॉजी विभाग में आपातकालीन एंजियोप्लास्टी, वयस्क और बाल हृदय रोग तथा धड़कन संबंधी उपचार की सुविधाएं हैं।
- एसजीपीजीआई, लखनऊ: वयस्क और बाल हृदय रोग, एंजियोप्लास्टी तथा अन्य कैथेटर प्रक्रियाओं के लिए कार्डियोलॉजी विभाग उपलब्ध है।
- सीएमसी, वेल्लोर: कार्डियोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के साथ ईसीजी, इको, तनाव जांच और एंजियोग्राफी जैसी सुविधाएं हैं।
- केईएम अस्पताल, मुंबई: कार्डियोलॉजी, बच्चों के हृदय रोग और कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी की सेवाएं उपलब्ध हैं।
- एसएसकेएम अस्पताल, कोलकाता: यहां कार्डियोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक-वैस्कुलर सर्जरी विभाग हैं।
- श्री चित्रा तिरुनाल आयुर्विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम: कार्डियोलॉजी और कार्डियोवैस्कुलर-थोरेसिक सर्जरी सेवाएं प्रदान करता है।
- नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज, बेंगलुरु: हृदय रोग, कैथ लैब प्रक्रियाओं, हृदय सर्जरी और बच्चों के हृदय उपचार की सेवाएं उपलब्ध हैं।
- फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली: कार्डियोलॉजी, एंजियोप्लास्टी, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, वयस्क और बाल हृदय सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान करता है।
अस्पताल चुनते समय यह देखें कि वहां मरीज की जरूरत के अनुसार कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक सर्जन, कैथ लैब, गहन देखभाल और आपातकालीन सेवा उपलब्ध है या नहीं। उपचार की लागत, सरकारी योजनाओं की पात्रता और अस्पताल में रेफरल प्रक्रिया की जानकारी पहले अस्पताल के सहायता केंद्र से लें।
निष्कर्ष: हृदय रोग केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है। बच्चों में जन्मजात या रूमेटिक रोग, वयस्कों में उच्च रक्तचाप और धमनियों की बीमारी तथा महिलाओं में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं अलग-अलग रूप में सामने आ सकती हैं। लक्षणों को पहचानना, जोखिम की नियमित जांच कराना, स्वस्थ दिनचर्या अपनाना और डॉक्टर की सलाह से इलाज करना हृदय स्वास्थ्य की रक्षा के सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं