चंडीगढ़ प्रेस क्लब में वार्ता करती डॉ सिमरन कौर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के एक शिक्षण संस्थान के खिलाफ नौकरी के नाम पर कथित धोखाधड़ी, भ्रामक आश्वासन और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप सामने आए हैं। देव समाज कॉलेज ऑफ एजुकेशन की पूर्व छात्रा और असिस्टेंट प्रोफेसर पद की अभ्यर्थी डॉ. सिमरन कौर ने कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उनसे करीब चार महीने तक कार्य कराया गया, लेकिन न तो नियुक्ति पत्र दिया गया और न ही वेतन का भुगतान किया गया।
बुधवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. सिमरन कौर ने अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े दस्तावेज एवं तथ्य मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि न्याय की मांग को लेकर वह राष्ट्रपति कार्यालय, चंडीगढ़ प्रशासन, शिक्षा सचिव और विजिलेंस विभाग तक गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
मेधावी छात्रा होने का दावा
डॉ. सिमरन कौर ने बताया कि वह देव समाज कॉलेज ऑफ एजुकेशन की पूर्व छात्रा रही हैं और अपने शैक्षणिक जीवन में कई उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। उनके अनुसार उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में पंजाब यूनिवर्सिटी मेरिट प्राप्त की, एम.एड. में पंजाब यूनिवर्सिटी में चौथा तथा चंडीगढ़ में पहला स्थान हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग से भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
चयन के बाद शुरू करवाई गई सेवाएं
डॉ. सिमरन कौर के अनुसार कॉलेज द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चंडीगढ़ रोजगार कार्यालय द्वारा भेजे गए अभ्यर्थियों में उनका नाम भी शामिल था। उनका दावा है कि चयन समिति ने इंटरव्यू के बाद उनका चयन किया और निर्धारित तिथि पर उन्हें जॉइनिंग के लिए बुलाया गया।
उन्होंने बताया कि चयन के बाद कॉलेज प्रशासन ने उन्हें चंडीगढ़ के दो सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए भेजा। उन्होंने अगले ही दिन से अपनी सेवाएं शुरू कर दीं। इस दौरान उन्होंने यूजीसी द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया।
चार महीने बाद वेतन मांगने पर बदला रवैया
डॉ. सिमरन कौर का आरोप है कि लगभग तीन से चार महीने तक सेवाएं देने के बाद जब उन्होंने वेतन और नियुक्ति पत्र के संबंध में कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अग्नेस ढिल्लों से बातचीत की, तो उन्हें यह कहकर कार्यस्थल से जाने के लिए कहा गया कि वह कॉलेज की कर्मचारी ही नहीं हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें कॉलेज परिसर में प्रवेश से रोकने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद जब वह अपने परिजनों के साथ कॉलेज पहुंचीं तो प्रबंधन ने उन्हें कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया।
धमकी देने का भी आरोप
डॉ. सिमरन कौर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही तो उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई। उनका कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने प्रभावशाली संपर्कों का हवाला देते हुए किसी भी कार्रवाई से न डरने की बात कही।
उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंचा मामला
डॉ. सिमरन कौर ने बताया कि उन्होंने शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन और विजिलेंस विभाग सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने भारत की राष्ट्रपति को शिकायत भेजकर न्याय की मांग की।
उनके अनुसार राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद शिकायत चंडीगढ़ प्रशासन को भेजी गई और शिक्षा सचिव को जांच के निर्देश दिए गए। हालांकि उनका आरोप है कि बाद में हुई विभागीय कार्रवाई में भी उन्हें न्याय नहीं मिला और उनकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. सिमरन कौर का कहना है कि कॉलेज द्वारा नियुक्ति से पूर्व वेतन, सेवा शर्तों और रोजगार संबंधी जो जानकारी दी गई थी, वह वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाती। उन्होंने शिक्षा सचिव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों का भी सहारा लेंगी। उनका कहना है कि वह और उनका परिवार लंबे समय से मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
कॉलेज प्रबंधन का पक्ष
समाचार प्रकाशित किए जाने तक कॉलेज प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सका। मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कॉलेज प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
फिलहाल यह मामला संबंधित विभागों के संज्ञान में है और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं।