सीसीएसयू में हस्तनिर्मित आभूषणों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का समापन
करीब एक हजार लोगों ने देखे विद्यार्थियों के डिजाइन; प्रदर्शनी में हुआ लगभग 37 हजार रुपये का कारोबार, अतिथियों ने सराहा हुनर और उद्यमशीलता
मेरठ । #ANN चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से 3 और 4 नवंबर को आयोजित हस्तनिर्मित आभूषणों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का सफल समापन हुआ। विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार आभूषणों के जरिए रचनात्मकता, कलात्मक कौशल और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। प्रदर्शनी को आमजन का अच्छा प्रतिसाद मिला और दोनों दिन में करीब एक हजार लोगों ने इसका अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने अपने उत्पादों की बिक्री से लगभग 37 हजार रुपये का कारोबार किया।
प्रदर्शनी में रखे गए सभी आभूषण विद्यार्थियों ने स्वयं डिजाइन किए और अलग-अलग कच्ची सामग्रियों का उपयोग कर हाथों से तैयार किए थे। यहां पारंपरिक भारतीय आभूषणों के साथ आधुनिक फैशन ज्वेलरी और कस्टमाइज्ड डिजाइन भी प्रदर्शित किए गए। डिजाइन और उत्पादों की विविधता ने आगंतुकों का ध्यान खींचा।
प्रदर्शनी का अवलोकन निदेशक शोध प्रो. बीरपाल सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. भूपेंद्र सिंह, डीन आर्ट्स प्रो. अतवीर सिंह, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. नीरज सिंघल, इंजीनियर मनीष मिश्रा और प्रो. अलका तिवारी सहित अन्य अतिथियों ने किया। अतिथियों ने विद्यार्थियों के उत्पादों की कलात्मकता, बारीकी और प्रस्तुति की सराहना की।
निदेशक शोध प्रो. बीरपाल सिंह ने विद्यार्थियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके परिश्रम और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कौशल को और निखारने तथा स्वयं के ज्वेलरी ब्रांड और कंपनियां स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आभूषण उद्योग में उपलब्ध संभावनाओं और सेक्शन-8 के अंतर्गत सहयोग एवं वित्तीय सहायता की संभावनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और व्यावसायिक सोच के साथ विद्यार्थी अपने हुनर को सफल उद्यम में बदल सकते हैं।
डीएसडब्ल्यू प्रो. भूपेंद्र सिंह ने स्टॉलों की सजावट, उत्पादों की विविधता और उनकी प्रस्तुति को सराहा। उन्होंने कहा कि कस्टमाइज्ड ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है और ग्राहक अपनी पसंद, जरूरत तथा बजट के अनुरूप आभूषण चाहते हैं। विद्यार्थियों के पास बाजार की मांग को समझकर नए डिजाइन विकसित करने और उन्हें बिक्री के लिए प्रस्तुत करने का अवसर है।
डीन आर्ट्स प्रो. अतवीर सिंह ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान और तकनीकी कौशल का व्यावहारिक उपयोग करने का अवसर देती हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा मिलता है।
इंजीनियर मनीष मिश्रा ने कॉस्ट्यूम और सिमुलेंट ज्वेलरी के बाजार पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ग्राहक अपने बजट के अनुसार आकर्षक और किफायती आभूषणों के विकल्प तलाश रहे हैं। डिजाइन की विविधता और कस्टमाइजेशन की सुविधा के कारण कॉस्ट्यूम ज्वेलरी भी बाजार में अपनी जगह बना रही है। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप बताया।
विद्यार्थियों को मिला वास्तविक बाजार का अनुभव
दोनों दिन प्रदर्शनी देखने पहुंचे लोगों ने आभूषणों के डिजाइन, गुणवत्ता और बारीक काम की सराहना की। उत्पादों की लागत का आकलन, मूल्य निर्धारण और बाजार के अनुरूप कीमत तय करने की विद्यार्थियों की प्रक्रिया भी आगंतुकों के लिए खास रही। कई लोगों ने पसंद के आभूषण खरीदे।
प्रदर्शनी में करीब 37 हजार रुपये की बिक्री विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक रही। उन्हें अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने रखने, उनकी पसंद और सुझाव जानने, लागत तय करने और वास्तविक बाजार में बिक्री का अनुभव मिला। इस अनुभव से विद्यार्थियों को उत्पाद निर्माण से लेकर ग्राहक तक पहुंचने की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला।
विभाग की समन्वयक प्रो. सरू कुमारी और सह-समन्वयक डॉ. अंशु अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित प्रदर्शनी में विभागीय शिक्षकों ने सहयोग किया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव देना और उन्हें स्वरोजगार तथा उद्यमिता के अवसरों से परिचित कराना था।
दो दिवसीय प्रदर्शनी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और उद्यमशील सोच का मंच बनी। आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपने हुनर को व्यवसाय और स्वयं के ब्रांड में विकसित कर सकते हैं।