सुभारती में आयोजित कार्यक्रम में अतिथि को सम्मानित करते आयोजक
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के अंतर्गत सुभारती मेडिकल कॉलेज एवं छत्रपति शिवाजी सुभारती अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा गुरुवार को “सुभारती साइकियाट्री अपडेट-2026: रीसेंट एडवांसेज” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरि सिंह नालवा कन्वेंशन सेंटर स्थित काउंसिल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और नई शोधों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मेडिकल कॉलेज, मेरठ के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण पाल का व्याख्यान रहा। उन्होंने “पेरिनेटल साइकियाट्री एंड वूमेंस मेंटल हेल्थ – 2026 अपडेट” विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए महिलाओं के प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों और उनके समाधान पर प्रकाश डाला। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. विवेक कुमार ने की।
गर्भावस्था और प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
अपने व्याख्यान में डॉ. तरुण पाल ने कहा कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद का समय महिलाओं के जीवन का अत्यंत संवेदनशील चरण होता है। इस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के साथ-साथ मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है, जिसके कारण कई महिलाएं अवसाद (डिप्रेशन) और चिंता (एंग्जायटी) जैसी मानसिक समस्याओं का सामना करती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इन समस्याओं की समय रहते पहचान कर उचित उपचार शुरू कर दिया जाए तो महिलाओं को गंभीर मानसिक परेशानियों से बचाया जा सकता है। उन्होंने प्रसवकालीन अवसाद और चिंता की स्क्रीनिंग तथा उपचार में हुई हालिया वैज्ञानिक प्रगति की भी विस्तृत जानकारी दी।
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान दवाओं के सुरक्षित उपयोग पर दिया जोर
डॉ. पाल ने बताया कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मनोरोग संबंधी दवाओं (साइकोट्रॉपिक मेडिकेशन) का उपयोग विशेषज्ञ चिकित्सक की निगरानी में सुरक्षित ढंग से किया जा सकता है। सही उपचार पद्धति अपनाकर मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि उपचार के दौरान वैज्ञानिक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए मरीजों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन को कमजोरी नहीं, बीमारी समझें
सामान्य जनता को संबोधित करते हुए डॉ. तरुण पाल ने कहा कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसव के बाद होने वाला अवसाद) किसी महिला की कमजोरी नहीं, बल्कि एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसका समय पर इलाज पूरी तरह संभव है।
उन्होंने परिवार के सदस्यों से अपील की कि यदि नई मां में लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, अत्यधिक चिंता या बच्चे के प्रति रुचि में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लें।
विशेषज्ञों ने साझा किए मानसिक स्वास्थ्य के नवीन शोध
सीएमई कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए मनोचिकित्सा विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई समसामयिक विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को मानसिक रोगों के उपचार में हो रही नई प्रगति और आधुनिक उपचार पद्धतियों से अवगत कराना था।
उत्कृष्ट योगदान के लिए किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने डॉ. तरुण पाल को उनके ज्ञानवर्धक व्याख्यान तथा मनोचिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर सुभारती मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट चिकित्सक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने कार्यक्रम के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं में प्रसवकालीन मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान एवं उपचार को समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।