कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करती डॉ दिव्या शर्मा
मेरठ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास एवं कार्यकुशलता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शनिवार को शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में “तनाव प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों को तनाव से निपटने के व्यावहारिक उपायों, सकारात्मक सोच, कार्य-जीवन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या शर्मा रहीं। उन्होंने शिक्षकों को तनाव प्रबंधन की वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक तकनीकों से परिचित कराया।
वैदिक परंपरा के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सामूहिक सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. दिव्या शर्मा का विद्यालय परिवार की ओर से पटका पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया।
इस अवसर पर कमला देवी सरस्वती शिशु मंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता अग्रवाल तथा शिशु वाटिका की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता का अभिनंदन किया।
शिक्षक का मानसिक रूप से स्वस्थ होना समाज के लिए आवश्यक
स्वागत उद्बोधन में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने कहा कि शिक्षक समाज का निर्माता होता है। यदि शिक्षक स्वयं तनावग्रस्त रहेगा तो स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ विद्यालय प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया है।
कार्यक्रम में समिति के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद अग्रवाल, विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य श्री कृष्ण कुमार शर्मा, समस्त आचार्यगण, कर्मचारी एवं शिशु वाटिका का स्टाफ भी उपस्थित रहा।
“तनाव नहीं, उसके प्रति हमारी प्रतिक्रिया समस्या बनती है” – डॉ. दिव्या शर्मा
मुख्य वक्ता डॉ. दिव्या शर्मा ने अपने प्रेरक व्याख्यान में कहा कि आज के समय में तनाव जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि “तनाव स्वयं समस्या नहीं है, बल्कि उसके प्रति हमारी प्रतिक्रिया समस्या बन जाती है।”
उन्होंने बताया कि सकारात्मक सोच, समय का प्रभावी प्रबंधन, आत्मअनुशासन और संतुलित जीवनशैली अपनाकर तनाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कार्य का अत्यधिक दबाव, समय की कमी, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बढ़ती अपेक्षाएं तथा डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग तनाव के प्रमुख कारण हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, उच्च रक्तचाप और शिक्षण क्षमता में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
योग, प्राणायाम और ‘ब्रीदिंग ब्रेक’ अपनाने की सलाह
डॉ. शर्मा ने शिक्षकों को नियमित योग, प्राणायाम और सूक्ष्म व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कक्षा के दौरान केवल पांच मिनट का ‘ब्रीदिंग ब्रेक’ भी तनाव कम करने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।
उन्होंने मानसिक ध्यान, सकारात्मक चिंतन, नियमित लेखन की आदत विकसित करने, अपनी भावनाओं को पहचानने तथा कार्य और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि “एक शिक्षक तभी विद्यार्थियों का प्रभावी मार्गदर्शन कर सकता है, जब वह स्वयं मानसिक रूप से स्वस्थ, प्रसन्न और सकारात्मक रहेगा। शिक्षक का मुस्कुराता चेहरा ही कक्षा की सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
संवादात्मक गतिविधियों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यशाला को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए पूरी तरह संवादात्मक बनाया गया। विभिन्न समूह चर्चाएं, रोल-प्ले गतिविधियां, प्रश्नोत्तर सत्र तथा ‘स्ट्रेस लेवल असेसमेंट’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को तनाव प्रबंधन की व्यावहारिक तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक इन गतिविधियों में भाग लिया और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।
शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
समापन सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ आचार्य नरेंद्र वर्मा ने कहा कि इस कार्यशाला से यह सीख मिली कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें अपनाकर बड़े तनाव से भी बचा जा सकता है। उन्होंने इसे अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।
‘हैप्पी टीचर्स क्लब’ के गठन की घोषणा
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने मुख्य वक्ता डॉ. दिव्या शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास और कार्यक्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान को केवल नोट्स तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन और शिक्षण कार्य में भी लागू करें।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय में ‘हैप्पी टीचर्स क्लब’ के गठन की घोषणा भी की, जिसके माध्यम से प्रत्येक माह तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मुख्य वक्ता का धन्यवाद किया तथा तनावमुक्त, सकारात्मक और संतुलित जीवन जीने का सामूहिक संकल्प लिया।
विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।