पीड़िता
मेरठ। मेरठ की रहने वाली एक युवती ने एक डॉक्टर पर शादी का झांसा देकर वर्षों तक यौन शोषण करने, कई बार जबरन गर्भपात कराने, दहेज की मांग करने, मारपीट करने तथा शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज न किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने शनिवार को मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए एफआईआर दर्ज कराने और आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
वर्ष 2016 में हुई थी मुलाकात
प्रार्थना पत्र के अनुसार पीड़िता वर्ष 2016 में पेट के संक्रमण के इलाज के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज गई थी। वहीं उसकी मुलाकात एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र डॉक्टर से हुई। पीड़िता का आरोप है कि इलाज के दौरान दोनों की बातचीत बढ़ी और डॉक्टर ने शादी का प्रस्ताव रखा। उसने पढ़ाई पूरी होने के बाद कोर्ट मैरिज करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद दोनों के बीच संबंध बने।
शादी का झांसा देकर साथ रखने का आरोप
पीड़िता का कहना है कि डॉक्टर उसे मेरठ के जागृति विहार स्थित किराए के मकान में अपने साथ रखने लगा। आरोप है कि शादी का भरोसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए गए। जब भी वह शादी की बात करती, आरोपी उसे टाल देता और बाद में मारपीट करने लगा।
चार बार गर्भधारण और जबरन गर्भपात का आरोप
प्रार्थना पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पीड़िता चार बार गर्भवती हुई, लेकिन हर बार आरोपी डॉक्टर ने अपने परिजनों तथा कुछ अन्य लोगों की मदद से उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराया। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि विभिन्न स्थानों पर डॉक्टरों और नर्सों की सहायता से गर्भपात कराए गए। उसने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उसे ऐसा इंजेक्शन भी लगाया गया जिससे भविष्य में संतान होने की संभावना प्रभावित हो सकती है।
दहेज मांगने और जान से मारने की धमकी का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि जब उसने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने उससे 14 लाख रुपये की कार और 25 लाख रुपये नकद दहेज की मांग की। मांग पूरी न होने पर शादी से इनकार कर दिया। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने कई बार मारपीट की, अप्राकृतिक यौन शोषण किया तथा जान से मारने की धमकी भी दी।
अप्रैल 2026 में संबंध समाप्त होने का दावा
पीड़िता के अनुसार 2 अप्रैल 2026 को आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और उसके बाद मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। वर्तमान में आरोपी डॉक्टर के गाजियाबाद में कार्यरत होने का दावा भी प्रार्थना पत्र में किया गया है।
पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसने 14 जून 2026 को थाना मेडिकल में तहरीर दी थी, लेकिन आज तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। उसका कहना है कि उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ सहित अन्य अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र भेजे और दस्तावेज व फोटो उपलब्ध कराए, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष से जुड़े एक पुलिस उपनिरीक्षक के प्रभाव के कारण थाना स्तर पर उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एडीजी से की हस्तक्षेप की मांग
पीड़िता ने एडीजी मेरठ जोन से अनुरोध किया है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ को निर्देशित किया जाए ताकि थाना मेडिकल में उसकी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो और मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
फिलहाल यह मामला पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों और एडीजी मेरठ जोन को दिए गए प्रार्थना पत्र पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अथवा आरोपी पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।