शहीद इंस्पेक्टर को कीर्ति चक्र प्रदान किए जाने के उपरांत उनके पैतृक आवास पर पहुंचकर एडीजी ने शुभकामनाएं दी
मेरठ। देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करने की परंपरा के तहत एडीजी जोन और एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ की टीम शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार के पैतृक गांव मसूरी पहुंची। अधिकारियों ने शहीद के परिजनों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा तथा सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
अधिकारियों ने शहीद सुनील कुमार के परिजनों को उनके मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी और परिवार के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एडीजी भानु भास्कर भी शहीद के परिवार से मिलने मसूरी पहुंचे थे और परिजनों को सम्मानित किया था।
शामली में मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए थे इंस्पेक्टर सुनील कुमार
इंस्पेक्टर सुनील कुमार की शहादत 20 जनवरी 2025 को शामली में हुई एक बड़ी पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई थी। यूपी एसटीएफ की टीम को एक लाख रुपये के इनामी अपराधी अरशद और उसके साथियों के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद शामली के झिंझाना क्षेत्र में एसटीएफ और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई।
मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी हुई। एसटीएफ टीम ने कग्गा गैंग से जुड़े चार बदमाशों को मार गिराया। इसी कार्रवाई के दौरान इंस्पेक्टर सुनील कुमार को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
गंभीर हालत में उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। करीब 36 घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 22 जनवरी 2025 को उनका निधन हो गया।
गोलियां लगने के बावजूद डटे रहे
मुठभेड़ के दौरान इंस्पेक्टर सुनील कुमार को पेट में गोलियां लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक गोली लगने से उनके लीवर समेत शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। इसके बावजूद मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया।
एसटीएफ की कार्रवाई में चार बदमाशों के मारे जाने के बाद पुलिस विभाग ने सुनील कुमार को बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में याद किया। उनकी शहादत के बाद मेरठ स्थित उनके पैतृक गांव मसूरी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।
सिपाही से इंस्पेक्टर तक का सफर
शहीद सुनील कुमार का पुलिस सेवा का सफर भी बेहद प्रेरणादायक रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह 1990 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 1997 में उन्होंने मानेसर, हरियाणा में कमांडो प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा में लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और आगे बढ़ते हुए अधिकारी के पद तक पहुंचे। वर्ष 2009 में वह उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF का हिस्सा बने। करीब 16 वर्षों तक उन्होंने एसटीएफ में रहते हुए कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया।
कई बड़े एनकाउंटर में निभाई अहम भूमिका
इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नाम कई महत्वपूर्ण पुलिस ऑपरेशनों से जुड़ा रहा। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कुख्यात अपराधियों के खिलाफ कई अभियानों में हिस्सा लिया।
उनका नाम ददुआ, ठोकिया, अनिल दुजाना और अन्य कुख्यात अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों से भी जुड़ा रहा। वर्ष 2008 में फतेहपुर में हुए एक महत्वपूर्ण एनकाउंटर में उनकी भूमिका के बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिला था।
इसके बाद भी वह लगातार एसटीएफ की टीम का हिस्सा बने रहे और अपराधियों के खिलाफ अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
अरशद समेत चार बदमाशों के खिलाफ अंतिम ऑपरेशन
इंस्पेक्टर सुनील कुमार के पुलिस करियर का अंतिम बड़ा अभियान 20 जनवरी 2025 की शामली मुठभेड़ बना। एक लाख रुपये के इनामी अपराधी अरशद और उसके तीन साथियों के खिलाफ हुई कार्रवाई में एसटीएफ टीम ने चारों बदमाशों को मार गिराया।
मुठभेड़ के दौरान सुनील कुमार को गोली लगने के बावजूद उनकी टीम ने अभियान को अंजाम तक पहुंचाया। बाद में गंभीर रूप से घायल सुनील कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया और देश तथा प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ था अंतिम संस्कार
शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार का पार्थिव शरीर जब मेरठ पहुंचा तो पुलिस लाइन में उन्हें अंतिम सलामी दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और आम लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
इसके बाद उनके पैतृक गांव मसूरी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मंजीत ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। उस समय परिवार के साथ-साथ पुलिस विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं।
शहीद परिवार को मिली आर्थिक सहायता
शहीद सुनील कुमार के परिवार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की गई थी। इसके अलावा पुलिस सैलरी पैकेज के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से उनके परिजनों को 1.80 करोड़ रुपये का चेक भी प्रदान किया गया था। यह चेक तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार और एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने पुलिस मुख्यालय में परिजनों को सौंपा था।
कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की खबर से परिवार भावुक
शहीद सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की खबर सामने आने के बाद उनके परिवार में गर्व और भावुकता का माहौल है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उनके बेटे मंजीत ने कहा कि पिता की वर्दी, ईमानदारी और देश-समाज के प्रति उनका समर्पण उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने अपने पिता की तरह पुलिस सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा करने की इच्छा भी जताई।
परिवार के लिए यह सम्मान उनके प्रियजन की कमी को तो पूरा नहीं कर सकता, लेकिन शहीद के साहस और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से परिवार को गौरव की अनुभूति जरूर हुई है।
मसूरी पहुंची STF टीम ने किया शहीद को नमन
इसी कड़ी में एडीजी जोन और एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ की टीम ने मसूरी पहुंचकर शहीद सुनील कुमार के परिवार से मुलाकात की। अधिकारियों ने शहीद के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
अधिकारियों ने कहा कि शहीद सुनील कुमार की कर्तव्यनिष्ठा, साहस और देश-समाज की सुरक्षा के लिए दिया गया बलिदान पुलिस विभाग के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। परिजनों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
शहीद परिवार से यह मुलाकात केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि उस परिवार के प्रति पुलिस विभाग की जिम्मेदारी और कृतज्ञता का प्रतीक भी है, जिसने देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपना प्रियजन खोया है।
शहीद सुनील कुमार की कहानी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सिपाही के रूप में पुलिस सेवा शुरू करने से लेकर एसटीएफ के जांबाज इंस्पेक्टर बनने तक का सुनील कुमार का सफर संघर्ष, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा। अपराधियों के खिलाफ कई अभियानों में योगदान देने वाले इस जांबाज अधिकारी ने अपने अंतिम अभियान में भी पीछे हटने के बजाय टीम का नेतृत्व करते हुए मुकाबला किया।
उनकी शहादत और परिवार के प्रति सम्मान यह संदेश देता है कि देश और समाज की सुरक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों की वीरता को हमेशा याद रखा जाएगा।