मवाना में हाउस अरेस्ट भाकियू धनसिंह कोतवाल गुट के कार्यकर्ता
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रस्तावित CJP पार्टी के कार्यक्रम से पहले कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके किसी प्रकार के कार्यक्रम की पूर्व घोषणा या प्रस्तावित आयोजन के बावजूद पुलिस उनके पास पहुंची और उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 168 के अंतर्गत नोटिस दिया गया। साथ ही कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें विरोध प्रदर्शन से रोकने के लिए हाउस अरेस्ट किया गया।
इस संबंध में जारी बयान में कहा गया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और जनता की समस्याओं को उठाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वक्ताओं ने कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत व्यापारियों, किसानों, महिलाओं तथा आम नागरिकों के हितों की आवाज़ उठाना अपना कर्तव्य मानते हैं।
बयान में कहा गया कि यदि जनता के मुद्दों को उठाना अपराध माना जाएगा, तब भी वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। प्रशासन से निष्पक्षता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा गया कि कानून का पालन करते हुए अपना पक्ष सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना समर्थन बनाए रखें। वक्ताओं ने कहा कि जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और सत्य एवं न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
इस दौरान आरिफ अंसारी (जिला महामंत्री), खालिद राजपूत, शहजाद अंसारी, सोनू अब्बासी और इमरान राजपूत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
वहीं भारतीय किसान यूनियन (धन सिंह कोतवाल गुट) के जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुहेल राणा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और किसानों की समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी मिलों पर किसानों का गन्ना भुगतान अभी भी लंबित है, बिजली कटौती से किसान और आम नागरिक दोनों परेशान हैं तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार भेदभावपूर्ण राजनीति कर रही है और जनहित के मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने वाले लोगों को हाउस अरेस्ट कर लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग से रोका जा रहा है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।