विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह के दौरान महिलाओं को प्रशिक्षण देती आयोजक
मेरठ। लाला लाजपत राय मेमोरियल (LLRM) मेडिकल कॉलेज, मेरठ में विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बाल एवं शिशु रोग विभाग तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (NNF) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के तत्वावधान में किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना रहा।
पूरे सप्ताह विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से माताओं और परिवारों को बताया गया कि नवजात शिशु के जीवन के शुरुआती छह महीने में केवल मां का दूध देना उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक, सेमिनार, पोस्टर प्रेजेंटेशन और पैनल डिस्कशन जैसे रचनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
नुक्कड़ नाटक के जरिए माताओं को किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके माध्यम से माताओं और उनके परिजनों को सरल एवं प्रभावी तरीके से बताया गया कि मां का दूध नवजात शिशु के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों ने समझाया कि शुरुआती दिनों में सही तरीके से स्तनपान कराने से शिशु को आवश्यक पोषण मिलने के साथ-साथ संक्रमण से बचाव में भी मदद मिलती है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने स्तनपान को लेकर समाज में मौजूद विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं पर भी चर्चा की तथा माताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराई।
मां का दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है
कार्यक्रम का नेतृत्व एवं अध्यक्षता बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विजय जायसवाल एवं डॉ. अनुपमा वर्मा ने किया। विशेषज्ञों ने बताया कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पोषण स्रोत है। इसमें शिशु के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के साथ ऐसे घटक भी होते हैं, जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. अमित उपाध्याय, सचिव NNF एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ, तथा विभागाध्यक्ष डॉ. विजय जायसवाल ने संयुक्त रूप से माताओं को संदेश दिया कि नवजात शिशु को जीवन के शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद बच्चे की जरूरत के अनुसार पूरक आहार शुरू करते हुए दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान शिशु के स्वस्थ विकास की मजबूत नींव तैयार करता है।
कोलोस्ट्रम को बताया प्राकृतिक सुरक्षा कवच
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शकुन सिंह और डॉ. अनुपम रानी ने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व एवं स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. शकुन सिंह ने बताया कि प्रसव के बाद निकलने वाला मां का पहला पीला और गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें मौजूद पोषक और प्रतिरक्षात्मक तत्व शिशु को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। उन्होंने माताओं को सलाह दी कि जन्म के बाद जल्द से जल्द स्तनपान शुरू कराया जाए और छह महीने तक केवल मां का दूध दिया जाए।
मां के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी स्तनपान
डॉ. अनुपम रानी ने बताया कि स्तनपान का लाभ केवल शिशु तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मां के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने में सहायक होता है। साथ ही, स्तनपान से महिलाओं में कुछ गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने महिलाओं को स्तनपान से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को समझने और किसी भी तरह की समस्या या भ्रम की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
स्तनपान की सही तकनीक की दी जानकारी
कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने माताओं की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। उन्हें शिशु को सही स्थिति में पकड़ने, सही तरीके से स्तनपान कराने और बच्चे के पर्याप्त दूध पीने के संकेतों के बारे में जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि कई बार सही जानकारी के अभाव में माताएं स्तनपान से जुड़ी परेशानियों को लेकर चिंतित हो जाती हैं। ऐसे में परिवार और स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉक्टरों, छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में डॉ. प्रियंका गुप्ता, नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ, तथा डॉ. नीलम गौतम (PSM) सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे। इनके अलावा डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. मुनेश तोमर, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. रवि सिंह चौहान, डॉ. आयशा सैफी, डॉ. सुरुचि, डॉ. तूबा कमर और डॉ. शिवम शर्मा सहित रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं, नर्सिंग स्टाफ, मरीजों और उनके परिजनों ने भी भाग लिया। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उपस्थित लोगों को स्तनपान के वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की जानकारी दी।
जागरूकता के जरिए स्वस्थ पीढ़ी का संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नवजात शिशु के स्वस्थ विकास के लिए जीवन के शुरुआती छह महीने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान केवल स्तनपान को प्रोत्साहित करने के साथ माताओं को सही जानकारी और परिवार का सहयोग मिलना जरूरी है।
LLRM मेडिकल कॉलेज के इस जागरूकता अभियान ने माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व, कोलोस्ट्रम की उपयोगिता, सही स्तनपान तकनीक और इससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देने का कार्य किया। चिकित्सकों ने कहा कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण देकर उनके स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।