रघुनाथ गर्ल्स कॉलेज में दक्षता आधारित शिक्षा से सशक्त होगा शिक्षण अधिगम विषयक वेबिनार आयोजित
मेरठ, 21 अक्टूबर। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ की ओर से “दक्षता-आधारित शिक्षा की आधारभूत अवधारणा” विषय पर ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया। प्राचार्या प्रो. निवेदिता मलिक के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को दक्षता-आधारित शिक्षा के सिद्धांतों, उपयोगिता और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीता सिंह ने किया। उन्होंने वेबिनार के उद्देश्य और वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में दक्षता-आधारित शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. गरिमा मलिक ने विषय की महत्ता बताते हुए शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और नवाचारपरक शिक्षण पद्धतियां अपनाने की आवश्यकता पर विचार रखे। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की समन्वयक प्रो. सोनिका चौधरी ने ऐसे आयोजनों को शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास और उच्च शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
विद्यार्थियों की दक्षता और प्रदर्शन पर आधारित मूल्यांकन
वेबिनार के मुख्य वक्ता आर.वी. विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के विधि संकाय के प्रोफेसर एवं डीन प्रो. (डॉ.) आलोक वर्मा रहे। उन्होंने दक्षता-आधारित शिक्षा (सीबीई) की अवधारणा, इसके विभिन्न मॉडलों और उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन केवल तय समय या लिखित परीक्षाओं के आधार पर नहीं, बल्कि अर्जित दक्षताओं और व्यावहारिक प्रदर्शन को ध्यान में रखकर भी किया जाता है।
उन्होंने विद्यालयी और उच्च शिक्षा, कॉर्पोरेट एवं कार्यस्थल प्रशिक्षण तथा ऑनलाइन और हाइब्रिड शिक्षा में सीबीई की भूमिका पर चर्चा की। व्याख्यान में पारंपरिक शिक्षा और दक्षता-आधारित शिक्षा के बीच अंतर को भी समझाया गया। पाठ्यक्रम की संरचना, मूल्यांकन पद्धति, समय में लचीलापन, सीखने के परिणाम और कौशलों की व्यावहारिक उपयोगिता जैसे पहलुओं पर विस्तार से बात हुई।
परियोजना और व्यावहारिक गतिविधियों से कौशल विकास पर जोर
प्रो. वर्मा ने कहा कि परियोजना-कार्य, व्यावहारिक गतिविधियां, केस स्टडी और कौशल-आधारित प्रमाणन विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों और रोजगार की जरूरतों के लिए तैयार करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण प्रक्रिया में नवाचार अपनाने और विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर आधुनिक शिक्षा की बदलती आवश्यकताओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए नए दृष्टिकोण अपनाने के महत्व को भी रेखांकित किया। उनकी विशेषज्ञता कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी कानून तथा कॉर्पोरेट कानून में है।
करीब 50 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
वेबिनार में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और नियोक्ताओं के लिए दक्षता-आधारित शिक्षा के लाभों पर भी चर्चा की गई। वक्ता के अनुसार, यह पद्धति विद्यार्थियों को अपनी सीखने की गति के अनुसार आगे बढ़ने, शिक्षकों को अधिगम संबंधी कमियों की पहचान करने और संस्थानों को शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती है। इससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करने के अवसर भी मिलते हैं।
विभिन्न संस्थानों के करीब 50 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन वेबिनार में हिस्सा लिया। अंत में डॉ. बबीता मांझी ने मुख्य वक्ता, प्राचार्या और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कॉलेज की ओर से कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ के सदस्यों के योगदान की सराहना की गई।