आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, नसबंदी और टीकाकरण अभियान की मांग करते कोशिश सामाजिक संगठन के पदाधिकारी
कोशिश सामाजिक संगठन की विचार गोष्ठी में उठा मुद्दा, बोले- बच्चों और बुजुर्गों में बढ़ रहा डर, नगर निगम गंभीरता से चलाए अभियान
मेरठ। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों की घटनाओं को लेकर कोशिश सामाजिक संगठन की ओर से रविवार को प्रहलाद नगर स्थित हर मिलाप मिशन इंटर कॉलेज में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में वक्ताओं ने आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नियमित नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित किए जाने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजय सेठी ने की, जबकि संचालन एजाज अहमद एडवोकेट ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में अरविंद रस्तोगी दीप उपस्थित रहे। गोष्ठी में शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या, उनके हमलों तथा नगर निगम की ओर से चलाए जाने वाले अभियानों की निरंतरता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बच्चों को घर से बाहर भेजने में अभिभावक चिंतित
गोष्ठी में सम्राट वर्मा ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। उनका कहना था कि कई माता-पिता बच्चों को ट्यूशन, दुकान या अन्य जरूरी कामों के लिए अकेले भेजने में डरते हैं। इसी तरह बुजुर्गों को भी रात के समय अकेले घर से निकलने में परेशानी और भय का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खुले में मांस के टुकड़े और खाद्य सामग्री कूड़े के ढेर में फेंके जाने से भी आवारा कुत्तों की समस्या बढ़ रही है। इसके लिए कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है।

कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नियमित व्यवस्था की मांग
मोहन लाल वर्मा ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या काफी बढ़ चुकी है। उन्होंने आवारा कुत्तों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को लेकर भी चर्चा की और कहा कि इस विषय पर नगर निगम तथा स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान केवल कुछ दिनों तक अभियान चलाने से नहीं होगा। इसके लिए लगातार नसबंदी, टीकाकरण और जरूरत के अनुसार शेल्टर होम की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
नसबंदी अभियान बीच में रुकने से समस्या बढ़ने की बात
पंकज कोहली ने कहा कि नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान शुरू तो किया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद अभियान की गति कम हो जाती है या वह रुक जाता है। उन्होंने कहा कि यदि नसबंदी और टीकाकरण का अभियान नियमित रूप से चलता तथा शेल्टर होम की पर्याप्त व्यवस्था होती तो स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी। उन्होंने आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक और नियमित कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता बताई।
सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर भी चर्चा
अजय सेठी ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, बस अड्डों, सरकारी कार्यालयों, जिला अस्पतालों, खेल परिसरों, स्कूलों और कॉलेज परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर कुत्ते पकड़ने का अभियान कुछ दिनों तक चलाया गया, लेकिन उन्हें रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्या दोबारा सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि अभियान को केवल अस्थायी तौर पर चलाने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे आवारा कुत्तों की संख्या को लगातार नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
नियमित अभियान चलाने की मांग
गोष्ठी में उपस्थित सभी वक्ताओं ने शहर में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने, नसबंदी एवं टीकाकरण अभियान को नियमित रूप से चलाने तथा शेल्टर होम की व्यवस्था को सुचारू बनाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम को प्रभावी और निरंतर अभियान चलाना चाहिए। साथ ही लोगों से अपील की गई कि कूड़े में खुले तौर पर मांस या खाद्य पदार्थ न फेंके जाएं, ताकि आवारा कुत्तों के झुंड एक ही स्थान पर एकत्र न हों और समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में नवीन शुक्ला, करण कामरा, ओमकार सिंह, गुलशन कुमार, रामपाल सिंह, सम्राट वर्मा, मुकेश चंद्र जैन, संजीव रस्तोगी, बलदेव राज, राहुल बंसल, विनय पुरी, नरेंद्र शर्मा, सुरेंद्र सचदेवा, सुमित पुरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।