कलेक्ट्रेट पर राम मंदिर के दानपात्र में मिले रूपयों की चोरी के आरोप को लेकर प्रदर्शन करते कांग्रेसी
मेरठ। जिला कांग्रेस कमेटी, मेरठ ने बुधवार को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं, भूमि खरीद मामलों और दान राशि के उपयोग को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की।
जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष गौरव भाटी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि श्री राम मंदिर करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है और मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। ऐसे में यदि मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
भूमि खरीद और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
ज्ञापन में कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों में मंदिर परिसर के आसपास भूमि खरीद को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि कुछ मामलों में जमीनों की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इसके अलावा ज्ञापन में निर्माण कार्यों के ठेकों के आवंटन, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि केवल स्वतंत्र जांच के माध्यम से ही संभव है।
दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि रामभक्तों द्वारा दी गई दान राशि के उपयोग को लेकर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि ट्रस्ट को प्राप्त कुल दान राशि, उसके व्यय और विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
पार्टी नेताओं ने कहा कि जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम या संदेह न रहे, इसके लिए एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा वित्तीय ऑडिट कराया जाना जरूरी है।
SIT जांच और फोरेंसिक ऑडिट की मांग
कांग्रेस ने राज्यपाल से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट के गठन से लेकर वर्तमान समय तक के सभी वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट किसी प्रतिष्ठित एजेंसी से कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार पर निष्क्रियता का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक किसी व्यापक जांच की घोषणा नहीं की गई है। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मामले में आवश्यक हस्तक्षेप करें और राज्य सरकार को जांच तथा अन्य आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित करें।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व के समर्थन में नारेबाजी भी की और ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।