ज्ञानसभा मेरठ के कार्यक्रम में भारतीय कला एवं संस्कृति की छटा बिखेरते प्रतिभागी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ज्ञानसभा मेरठ-2026 के अंतर्गत शनिवार शाम विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नृत्य, गीत, अभिनय और भारतीय शास्त्रीय कलाओं की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, भक्ति, राष्ट्रभाव तथा जीवन मूल्यों के विविध आयामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
सरस्वती वंदना से हुआ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। भरतनाट्यम शैली में प्रस्तुत नृत्य-संयोजन के माध्यम से ज्ञान, विद्या और भारतीय परंपरा में मां सरस्वती की आराधना के भाव को अभिव्यक्त किया गया। प्रस्तुति ने कार्यक्रम की शुरुआत को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण प्रदान किया।
इसके बाद प्रस्तुत किए गए भक्ति गीत ने पूरे प्रेक्षागृह के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भावपूर्ण गायन और प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भारतीय भक्ति परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया।

‘चार युग’ नृत्य-नाटिका ने प्रस्तुत की भारतीय जीवन-दृष्टि
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘चार युग’ विषय पर आधारित अभिनय एवं नृत्य-नाटिका रही। कलाकारों ने विभिन्न युगों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, जीवन-दृष्टि और सामाजिक मूल्यों को नृत्य एवं अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। नृत्य-नाटिका के जरिए भारतीय परंपरा में वर्णित युगों की अवधारणा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया।
समूह नृत्य के जरिए राष्ट्रप्रेम का संदेश
विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ‘देश से है प्यार तो…’ विषय पर समूह नृत्य एवं अभिनय की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, देश के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों की भावना को अभिव्यक्त किया गया। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
‘नृत्य एवं योग समागम’ ने दिखाया कला और योग का समन्वय
सांस्कृतिक संध्या में ‘नृत्य एवं योग समागम’ भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। प्रस्तुति के माध्यम से नृत्य की कलात्मक अभिव्यक्ति और योग की भारतीय परंपरा के बीच समन्वय को प्रदर्शित किया गया। इसके माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा में शरीर, मन और कला के बीच संबंध को रेखांकित किया गया।
कथक की विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को किया प्रभावित
कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को विशेष स्थान दिया गया। कथक परंपरा में करीब 20 मिनट की विशेष प्रस्तुति प्रस्तुत की गई। कलाकारों ने नृत्य की मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लय-ताल के माध्यम से कथक की समृद्ध परंपरा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया।

शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति का संदेश
सांस्कृतिक संध्या की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रभाव, योग, कला और जीवन मूल्यों से जुड़कर शिक्षा व्यक्ति के समग्र विकास का माध्यम बनती है।
कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया। विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
प्रो. नीलू जैन गुप्ता एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद ने किया संयोजन
सांस्कृतिक संध्या का संयोजन एवं प्रस्तुतियां प्रो. नीलू जैन गुप्ता एवं समस्त साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद के सदस्यों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक, विद्यार्थी, अतिथि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
ज्ञानसभा मेरठ-2026 के अंतर्गत आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति को कला के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों एवं दर्शकों के बीच भारतीय विरासत के प्रति जुड़ाव और रुचि को अभिव्यक्त किया।