जिला बार एसोसिएशन मेरठ
मेरठ। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, मेरठ ने जून माह में अधीनस्थ न्यायालयों के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। एसोसिएशन ने जनपद न्यायाधीश, मेरठ सहित विभिन्न न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि 20 जून 2026 से 25 जून 2026 तथा 27 जून 2026 तक किसी भी वाद में प्रतिकूल आदेश पारित न किए जाएं।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार सिंह एवं महामंत्री प्रशांत गुप्ता द्वारा जारी प्रस्ताव में कहा गया है कि माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा जारी वार्षिक कैलेंडर के अनुसार जून माह में दीवानी न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित है। हालांकि राजस्व न्यायालय, परिवार न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, श्रम न्यायालय, जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग तथा कलेक्ट्रेट स्थित विभिन्न न्यायालय सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।
प्रस्ताव में कहा गया है कि अधिकांश अधिवक्ता ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान मेरठ से बाहर रहते हैं, जिसके कारण उनके लिए न्यायालयों में उपस्थित होकर वादों की प्रभावी पैरवी करना संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में वादकारियों के हित प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
एक पक्षीय कार्यवाही न करने की मांग
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में मांग की है कि निर्धारित अवधि के दौरान किसी भी वाद को खारिज न किया जाए तथा कोई एक पक्षीय (एक्स-पार्टी) आदेश पारित न किया जाए। इसके अलावा फौजदारी मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति के आधार पर प्रतिकूल आदेश अथवा वारंट जारी करने से भी परहेज किया जाए।
एसोसिएशन ने यह भी अनुरोध किया है कि उक्त अवधि में स्थगन प्रार्थना पत्र अथवा हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र दाखिल करने की आवश्यकता भी न रहे और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, जिससे अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
कई न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
बार एसोसिएशन द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रतिलिपि मेरठ मंडल के विभिन्न न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सूचनार्थ भेजी गई है। इनमें सर्किट बेंच राजस्व परिषद, मंडलायुक्त मेरठ, जिलाधिकारी मेरठ, परिवार न्यायालय, कमर्शियल कोर्ट, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग, स्थायी लोक अदालत, किशोर न्यायालय, उपश्रमायुक्त श्रम न्यायालय, तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।
अधिवक्ताओं और वादकारियों के हितों की सुरक्षा का प्रयास
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन का मानना है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान न्यायालयों में सीमित उपस्थिति के कारण किसी भी पक्ष को न्यायिक नुकसान नहीं होना चाहिए। इसी उद्देश्य से यह प्रस्ताव पारित किया गया है ताकि अधिवक्ताओं एवं वादकारियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें और किसी भी पक्ष के विरुद्ध अनुपस्थिति के आधार पर प्रतिकूल कार्रवाई न हो।
बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रशांत गुप्ता ने कहा कि यह प्रस्ताव अधिवक्ता समुदाय और न्याय पाने के इच्छुक नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा की गई है।