वाद विवाद प्रतियोगिता में विजय प्रतिभागियों को पुरस्कार देते मुख्य अतिथि
मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और समसामयिक विषयों के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को “ए.आई. (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) – वरदान या अभिशाप” विषय पर अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत करते हुए अपनी भाषा दक्षता, आत्मविश्वास और विश्लेषणात्मक सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रार्थना एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद कार्यक्रम के संचालक स्पर्श और देव ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा प्रतियोगिता के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से मानव जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे इसके लाभ और संभावित चुनौतियों दोनों को समझें। इसी उद्देश्य से इस वर्ष वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय “ए.आई. वरदान या अभिशाप” रखा गया।
आठ टीमों ने रखा अपना पक्ष
प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने पूरी प्रतियोगिता में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। लगभग तीन मिनट के भाषण के दौरान विद्यार्थियों ने तथ्यों, शोध, उदाहरणों और प्रभावशाली अंग्रेजी उच्चारण के साथ अपने तर्क प्रस्तुत किए, जिन्हें निर्णायक मंडल और उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।
पक्ष में बोले विद्यार्थी – ए.आई. बदल रहा दुनिया की तस्वीर
ए.आई. के समर्थन में बोलने वाले विद्यार्थियों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता और क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, परिवहन, विज्ञान और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में ए.आई. ने उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं।
प्रतिभागियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि आज ए.आई. की मदद से डॉक्टर गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर पा रहे हैं, शिक्षक प्रत्येक छात्र की आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत शिक्षण सामग्री तैयार कर सकते हैं और किसानों को मौसम, सिंचाई तथा फसल प्रबंधन से जुड़ी सटीक जानकारी समय पर मिल रही है। उनका कहना था कि यदि ए.आई. का उपयोग जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के साथ किया जाए तो यह निश्चित रूप से मानवता के लिए वरदान साबित होगा।
विपक्ष ने गिनाए संभावित खतरे
विपक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने ए.आई. से जुड़े जोखिमों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि इस तकनीक का अनियंत्रित या गलत उपयोग हुआ तो इससे बेरोजगारी बढ़ सकती है, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और साइबर अपराधों में वृद्धि हो सकती है।
विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि अत्यधिक तकनीकी निर्भरता मनुष्य की सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। मशीनों पर बढ़ती निर्भरता से रचनात्मकता और मौलिक सोच कमजोर पड़ने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद घोषित हुए परिणाम
प्रतियोगिता में सभी टीमों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद निर्णायक मंडल ने परिणाम घोषित किए।
- प्रथम स्थान: टीम नंबर-2 की छात्राएं कृतिका त्यागी एवं कृतिका श्रीवास्तव
- द्वितीय स्थान: टीम नंबर-8 की छात्राएं आराध्या एवं वाणी
- तृतीय स्थान: टीम नंबर-5 की छात्राएं अदिति एवं लक्ष्मी
- सांत्वना पुरस्कार: ऐश्वर्या एवं धरा
विजेता छात्राओं को विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने शील्ड एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
प्रधानाचार्य ने बताया – तकनीक का सही उपयोग ही सफलता की कुंजी
अपने संबोधन में प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सार्वजनिक मंच पर प्रभावी ढंग से बोलने की क्षमता तथा समसामयिक विषयों की गहरी समझ विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि ए.आई. स्वयं में न तो वरदान है और न ही अभिशाप, बल्कि यह एक शक्तिशाली तकनीकी उपकरण है। इसका स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि समाज और मानव इसका उपयोग किस उद्देश्य और किस नैतिकता के साथ करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक और सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो आधुनिक तकनीक को ज्ञान, नवाचार और मानव कल्याण के लिए अपनाएंगे।
निर्णायकों ने सराहा विद्यार्थियों का प्रदर्शन
प्रतियोगिता का मूल्यांकन श्रीमती निशा, श्रीमती शिखा शर्मा तथा कुमारी सौम्या शर्मा ने किया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के तर्क, भाषा, प्रस्तुति शैली, आत्मविश्वास और विषय पर पकड़ की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अत्यंत परिपक्वता के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सौरभ रस्तोगी, पूजा रस्तोगी, अनिरुद्ध शर्मा, क्षमा शर्मा, अंजलि अग्रवाल, रीना अग्रवाल सहित विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विद्यालय परिवार ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।