विश्व फोटोग्राफी दिवस पर आयोजित कार्यशाला में तकनीकी फोटोग्राफी सिखती छात्राएं
छात्राओं ने लेंस एंड लर्न अकादमी का किया भ्रमण, कैमरा तकनीक और फोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं
मेरठ । विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के चित्रकला एवं चित्रांकन विभाग की ओर से अनुभव एवं शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को फोटोग्राफी की तकनीकी बारीकियों के साथ-साथ उसके रचनात्मक और कलात्मक पक्ष से परिचित कराना रहा। यह कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के मार्गदर्शन में तथा लेंस एंड लर्न अकादमी, मेरठ के साथ हुए एमओयू सहयोग के अंतर्गत आयोजित किया गया।
छात्राओं ने लेंस एंड लर्न अकादमी में लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के अंतर्गत छात्राओं ने लेंस एंड लर्न अकादमी का भ्रमण किया। यहां अकादमी के निदेशक श्री प्रशांत पराशर ने छात्राओं को कैमरे के प्रयोग, फोटोग्राफी की तकनीक और बेहतर तस्वीर तैयार करने की बारीकियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को केवल कैमरे के तकनीकी संचालन तक सीमित जानकारी नहीं दी गई, बल्कि एक अच्छी तस्वीर के पीछे काम करने वाली दृष्टि, प्रकाश, कोण, फ्रेमिंग और विषय चयन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी व्यावहारिक रूप से समझाया गया।
प्रकाश को समझना फोटोग्राफी की पहली आवश्यकता
श्री प्रशांत पराशर ने छात्राओं को बताया कि फोटोग्राफी में सबसे पहले प्रकाश को समझना आवश्यक है। सही प्रकाश व्यवस्था किसी भी तस्वीर को जीवंत और प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों में प्रकाश के उपयोग और उसके अनुसार कैमरे की सेटिंग को समझने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि एक ही विषय को अलग-अलग प्रकाश परिस्थितियों में कैद करने पर तस्वीर का प्रभाव पूरी तरह बदल सकता है। इसलिए फोटोग्राफर को तस्वीर लेने से पहले उपलब्ध प्रकाश और उसके प्रभाव को समझना चाहिए।
एंगल और फ्रेमिंग से तस्वीर बनती है आकर्षक
कार्यशाला में कैमरे के एंगल और फ्रेमिंग के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। छात्राओं को बताया गया कि विषय को किस कोण से कैमरे में कैद किया जा रहा है, इसका तस्वीर के अंतिम प्रभाव पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है।
प्रशांत पराशर ने कहा कि हर क्लिक से पहले फोटोग्राफर को विषय को ध्यानपूर्वक देखना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि तस्वीर में क्या दिखाना है तथा किस हिस्से को प्रमुखता देनी है। बेहतर फ्रेमिंग सामान्य दृश्य को भी प्रभावशाली तस्वीर में बदल सकती है।
फोकस और बैकग्राउंड का संतुलन जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान फोकस और बैकग्राउंड के बीच संतुलन बनाए रखने की तकनीक भी समझाई गई। उन्होंने बताया कि तस्वीर के मुख्य विषय को स्पष्ट रूप से उभारने के लिए फोकस का सही होना बेहद जरूरी है। साथ ही बैकग्राउंड का चयन भी इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वह मुख्य विषय से ध्यान न भटकाए।
छात्राओं को बताया गया कि विषय, फोकस, बैकग्राउंड और प्रकाश के बीच सही तालमेल एक प्रभावशाली तस्वीर की आधारशिला है।
फोटोग्राफी तकनीक के साथ धैर्य और दृष्टि का भी अभ्यास
श्री प्रशांत पराशर ने कहा कि फोटोग्राफी केवल तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि यह धैर्य और दृष्टि का अभ्यास भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तस्वीर अपने भीतर एक कहानी समेटे होती है और उसे संवेदनशीलता के साथ कैद किया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे किसी दृश्य को केवल कैमरे की नजर से न देखें, बल्कि उसके पीछे छिपी भावनाओं, परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं को भी समझने का प्रयास करें।
फोटोग्राफी कला और दृष्टि का संगम: प्रो. अर्चना रानी
चित्रकला एवं चित्रांकन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना रानी ने कहा कि फोटोग्राफी केवल तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि कला और दृष्टि का संगम है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं को कैमरे की तकनीक समझने के साथ यह जानने का अवसर भी मिला कि किसी चित्र के माध्यम से भावनाओं और संवेदनाओं को किस प्रकार अभिव्यक्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का प्रयास है कि छात्राएं इस प्रकार के व्यावहारिक अनुभवों को अपनी रचनात्मकता में शामिल करें और कला के नए आयामों की खोज करें।
प्रो. अर्चना रानी ने श्री प्रशांत पराशर का स्वागत करते हुए कार्यशाला के आयोजन में उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
विभिन्न प्रकोष्ठों और क्लबों का रहा सहयोग
यह कार्यशाला रवीन्द्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक क्लब, भारतीय भाषा संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ, आरजीपीजी इनोवेशन सेल तथा आईकेएस सेल के संयुक्त सहयोग से आयोजित की गई। आयोजन के माध्यम से छात्राओं को कक्षा से बाहर निकलकर वास्तविक कार्यक्षेत्र में फोटोग्राफी सीखने और उसके व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर मिला।
शिक्षिकाओं ने छात्राओं को दिए उपयोगी सुझाव
कार्यशाला में विभाग की संकाय सदस्य डॉ. नाज़िमा इरफ़ान, डॉ. पूनम लता, डॉ. गरिमा कुमारी एवं डॉ. हिना यादव भी उपस्थित रहीं। उन्होंने छात्राओं को फोटोग्राफी के क्षेत्र में उपयोगी सुझाव दिए और उन्हें इस क्षेत्र में उपलब्ध नए अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
संकाय सदस्यों ने छात्राओं से कहा कि बदलते डिजिटल दौर में फोटोग्राफी का क्षेत्र लगातार व्यापक हो रहा है। कला के विद्यार्थियों के लिए इसमें रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ व्यावसायिक अवसर भी उपलब्ध हैं।
व्यावहारिक अनुभव से समृद्ध हुई छात्राएं
कार्यशाला ने छात्राओं को फोटोग्राफी से संबंधित तकनीकी ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें रचनात्मक सोच और व्यावहारिक अनुभव से भी समृद्ध किया। छात्राओं ने कैमरे के संचालन, प्रकाश, एंगल, फ्रेमिंग, फोकस और बैकग्राउंड जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा तथा यह जाना कि एक प्रभावशाली तस्वीर केवल कैमरे से नहीं, बल्कि फोटोग्राफर की दृष्टि और संवेदनशीलता से तैयार होती है।
महाविद्यालय की ओर से कहा गया कि इस प्रकार की अनुभवात्मक कार्यशालाएं विद्यार्थियों को पारंपरिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं और उनकी रचनात्मक क्षमता को नई दिशा देती हैं