स्वाभिमान सम्मेलन में मंचासीन अतिथिगण
मेरठ। मेरठ की ऐतिहासिक कान्तिधरा पर रविवार को वाल्मीकि समाज के तत्वावधान में “विशाल वाल्मीकि समाज सामाजिक एकता एवं स्वाभिमान महासम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में मेरठ सहित दिल्ली, हरियाणा, सहारनपुर, देवबंद, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, बरेली और आगरा सहित विभिन्न जनपदों एवं राज्यों से आए हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और समाज प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता, शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक नेतृत्व को मजबूत करना रहा।
महासम्मेलन का आयोजन मुख्य संयोजक विजेन्द्र सूद के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी सतपाल सिंह वाल्मीकि (गाजीपुर) ने की, जबकि संचालन सह-संयोजक रवि नागवंशी और सोहनवीर सिंह टांक ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी संजय कुमार टांक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ आदि कवि महर्षि वाल्मीकि, भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा समाज के अन्य महापुरुषों के चित्रों पर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने समाज की एकता, स्वाभिमान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।
समाज को एकजुट होने का आह्वान
मुख्य संयोजक विजेन्द्र सूद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय वाल्मीकि समाज के लिए निर्णायक दौर है। यदि समाज को सम्मान, समान अधिकार और सशक्त सामाजिक पहचान स्थापित करनी है तो उसे आंतरिक मतभेदों, कुरीतियों और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व को स्वीकार करना होगा।
उन्होंने कहा कि समाज के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए व्यापक चिंतन, मजबूत संगठन और एकजुट प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में वाल्मीकि समाज अपने सम्मान, स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है और अब समय आ गया है कि प्रत्येक व्यक्ति समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर संघर्ष करे।
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”
अपने संबोधन में विजेन्द्र सूद ने कहा कि इतिहास उन्हीं समाजों का लिखा जाता है जो अपने महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलते हुए शिक्षित, संगठित और संघर्षशील बनते हैं। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज अब सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक शोषण के विरुद्ध संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेगा तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष करेगा।
हजारों लोगों ने लिया सामाजिक जागरूकता का संकल्प
महासम्मेलन में उपस्थित हजारों लोगों ने शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता और सामूहिक नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के युवाओं को शिक्षा और नेतृत्व से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य मजबूत हो सके।
विभिन्न राज्यों और जनपदों से पहुंचे प्रतिनिधि
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से आए सामाजिक प्रतिनिधियों ने समाज के सर्वांगीण विकास, सामाजिक एकता और स्वाभिमान को मजबूत करने पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि यह महासम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वाल्मीकि समाज में सामाजिक जनजागरण और संगठित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
ये रहे प्रमुख अतिथि एवं गणमान्य लोग
महासम्मेलन में वरिष्ठ समाजसेवी संतोष कुमार वाल्मीकि, सेवानिवृत्त वाणिज्यकर आयुक्त जे.पी. सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह (प्रोफेसर, इग्नू विश्वविद्यालय), एडवोकेट दीपचंद चावरिया, सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक देवकबीर, जयकुश उर्फ लाखन सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष, झाड़ू मंच, दिल्ली), डॉ. प्रवीण कुमार (इतिहासकार), डॉ. नरेंद्र वाल्मीकि (शिक्षक एवं साहित्यकार, सहारनपुर) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा आयोजन समिति के सदस्य गंगाशरण वाल्मीकि, रवि नागवंशी, संतोष वाल्मीकि, चंदन चौहान, शैलेन्द्र सिंह, मनोज खौबे, रोविन खखैरवाल, अंकित वाल्मीकि, विशाल, आनंद चंडालिया, कपिल वेदी, हरिकिशन टांक, गौतम, दीपक चौहान, संजय सूद, संदीप दतावली, सुधीर पहलवान, सागर ताजीपुर, गुलशन कल्याणे, रोहन बेनीवाल, सुधीर वाल्मीकि, निक्की पावटी, तेजपाल सिक्का, सुदेश भगत, पप्पू मकवाना, आकाश आनंद चंडालिया, अमित टांक, मिनेश पिवाल, रोकी सूद, विपिन महरोल, शिल्पी चौहान, दीक्षा मनोठिया सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
निष्कर्ष
सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सामाजिक एकता, शिक्षा, संगठन और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता ही समाज की प्रगति का आधार है। कार्यक्रम का समापन समाज के उत्थान, स्वाभिमान और सामूहिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने इसे वाल्मीकि समाज के सामाजिक जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल बताया।