अधिवक्ता सुनील चौधरी
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 77 वर्षीय अविवाहित पुत्री द्वारा मांगी गई फैमिली पेंशन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक, कौशाम्बी को निर्देश दिया है कि याचीनी महमूदा खातून की ओर से 18 जून 2026 को प्रस्तुत किए गए प्रत्यावेदन पर शासनादेशों और लागू पेंशन नियमों के अनुसार विचार करते हुए नियमानुसार निर्णय लिया जाए। न्यायालय ने संबंधित अधिकारी को सभी पक्षों को अवसर प्रदान करने के बाद कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश रिट-ए संख्या 13587 वर्ष 2026, महमूदा खातून बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश एवं 3 अन्य मामले में माननीय न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने सुनवाई के दौरान पारित किया। याचीनी की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा और उनके फैमिली पेंशन संबंधी दावे पर नियमानुसार निर्णय कराए जाने की मांग की।
उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल थे याचीनी के पिता
न्यायालय के समक्ष याचीनी के अधिवक्ता ने बताया कि महमूदा खातून के पिता स्वर्गीय हसन अहमद जाफरी उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। वह वर्ष 1970 में प्रयागराज कोतवाली से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के कुछ वर्ष बाद 30 जून 1979 को उनका निधन हो गया।
पिता के निधन के बाद उनकी पत्नी और महमूदा खातून की माता रईसा खातून को विभाग की ओर से फैमिली पेंशन प्रदान की जाने लगी। वर्ष 2006 में रईसा खातून का भी निधन हो गया। इसके बाद महमूदा खातून परिवार में अकेली रह गईं। उनकी एक सगी बहन है, जो अलग निवास करती हैं।
77 वर्ष की उम्र में भी अविवाहित, माता-पिता पर रही आश्रित
याचीनी की ओर से न्यायालय को बताया गया कि महमूदा खातून वर्तमान में लगभग 77 वर्ष की हैं और उन्होंने आज तक विवाह नहीं किया है। उनके अनुसार वह प्रारंभ से ही अपने माता-पिता पर आश्रित रही हैं। माता-पिता के निधन के बाद उनके भरण-पोषण और देखभाल के लिए उनके पास कोई व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।
याचीनी का कहना है कि आजीवन अविवाहित रहने और माता-पिता पर निर्भर रहने की स्थिति में शासनादेशों तथा लागू पेंशन नियमों के तहत उनके फैमिली पेंशन के दावे पर नियमानुसार विचार किया जाना आवश्यक है।
कई बार अधिकारियों से किया संपर्क, नहीं हुआ प्रभावी निर्णय
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायालय को बताया कि याचीनी ने फैमिली पेंशन के संबंध में संबंधित पुलिस एवं पेंशन विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया। इस संबंध में उन्होंने कई बार प्रत्यावेदन भी प्रस्तुत किए, लेकिन उनके प्रार्थना पत्रों पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया।
याचीनी की ओर से न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में वह अत्यंत कठिन आर्थिक परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रही हैं। उनके भरण-पोषण और आवश्यक देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।
18 जून 2026 के प्रत्यावेदन पर फैसला करने की मांग
मामले की सुनवाई के दौरान याचीनी के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने विशेष रूप से 18 जून 2026 को प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर निर्णय कराए जाने की मांग न्यायालय के समक्ष रखी। उनका कहना था कि याचीनी के दावे पर संबंधित शासनादेशों और लागू पेंशन नियमों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय किया जाना चाहिए।
एसपी कौशाम्बी को 12 सप्ताह में निर्णय के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक, कौशाम्बी को निर्देश दिया कि याचीनी के 18 जून 2026 के प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाए। न्यायालय ने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को उचित अवसर प्रदान करने के बाद कारणयुक्त एवं नियमानुसार आदेश पारित किया जाए।
उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारी को यह निर्णय न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से अधिमानतः 12 सप्ताह के भीतर लेने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने दावे के गुण-दोष पर नहीं की टिप्पणी
अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यानी न्यायालय ने फिलहाल यह निर्धारित नहीं किया है कि याचीनी फैमिली पेंशन की पात्र हैं या नहीं। इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी को ही लागू कानून, शासनादेशों और पेंशन नियमों के आधार पर लेना होगा।
न्यायालय के निर्देश के बाद अब पुलिस अधीक्षक, कौशाम्बी के समक्ष याचीनी के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का रास्ता साफ हुआ है। मामले में याचीनी महमूदा खातून की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने प्रभावी पैरवी की।