केंद्रीय गोवंश अनुसंधान के कार्यक्रम में विचार रखते वक्ता
मेरठ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को भा.कृ.अनु.प.–केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), मेरठ में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार मोहंती के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से आए 180 किसानों तथा संस्थान के 120 वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत किसान शैक्षणिक भ्रमण, किसान-वैज्ञानिक संवाद, तकनीकी व्याख्यान, कृषि एवं पशुपालन सामग्री वितरण और वृक्षारोपण जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजन किए गए।
नई दिल्ली से हुआ राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10:30 बजे नई दिल्ली में आयोजित आईसीएआर के राष्ट्रीय स्थापना दिवस समारोह के लाइव प्रसारण के साथ हुआ। संस्थान परिसर में बड़ी स्क्रीन के माध्यम से वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों ने कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा।
इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में कृषि अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों तक तकनीक पहुंचाने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्रियों ने सराहा आईसीएआर का योगदान
स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, राम नाथ ठाकुर तथा भागीरथ चौधरी ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन बढ़ाने और पशुधन विकास में आईसीएआर की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
इस अवसर पर आईसीएआर द्वारा विकसित कई नई कृषि किस्मों, तकनीकों और वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही कृषि अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
एल नीनो और गोवंश उत्पादन पर दिया गया विशेष व्याख्यान
राष्ट्रीय कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के बाद आयोजित दूसरे सत्र में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. सिरोही ने ‘एल नीनो का गोवंश उत्पादन पर प्रभाव’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने किसानों को बताया कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन का दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य एवं दूध उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही पशुओं के उचित पोषण, गर्मी से बचाव, रोग प्रबंधन तथा आधुनिक डेयरी तकनीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
किसान-वैज्ञानिक संवाद में मिले समस्याओं के समाधान
व्याख्यान के बाद आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में किसानों ने पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, पशु रोग, चारा प्रबंधन और आधुनिक डेयरी तकनीकों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान बताते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
किसानों को वितरित की गई कृषि एवं पशुपालन सामग्री
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत नोडल अधिकारी डॉ. संजीव कुमार वर्मा द्वारा किसानों को कृषि एवं पशुपालन से संबंधित आवश्यक इनपुट सामग्री वितरित की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक कृषि और पशुपालन तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण
समारोह के समापन पर संस्थान परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों ने पौधारोपण किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित भारत के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया।
कार्यक्रम का सफल समन्वय प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार वर्मा तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश प्रसाद ने किया। अंत में संस्थान परिवार की ओर से सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और किसानों का आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनते हैं तथा आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।