ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम में शामिल लोग
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ की ओर से प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के निर्देशन में आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस का तकनीकी सत्र संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम अनुसंधान, शैक्षणिक लेखन, अनुसंधान अखंडता और वैज्ञानिक संचार” रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शोध कार्य को अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की जानकारी दी जा रही है।
शोध आंकड़ों के विश्लेषण और दृश्यांकन पर हुई चर्चा
चतुर्थ दिवस के तकनीकी सत्र का विषय “अनुसंधान आंकड़ा विश्लेषण, दृश्यता, साहित्यिक चोरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण तथा अनुसंधान की शुचिता” रहा। सत्र का संचालन डॉ. बबीता मांझी ने किया। मुख्य वक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मयंक युवराज ने शोध कार्य में आंकड़ा विश्लेषण, आंकड़ा दृश्यांकन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शोध उपकरणों के प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
डॉ. मयंक युवराज ने विभिन्न तकनीकी उपकरणों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि शोधकर्ता किस प्रकार डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संसाधनों की मदद से शोध सामग्री की खोज कर सकते हैं। उन्होंने प्रासंगिक साहित्य के चयन, उपलब्ध शोध में शोध-अंतराल की पहचान तथा शोध के आंकड़ों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकों को भी विस्तार से समझाया।

विश्वसनीय सूचना स्रोतों की जांच पर जोर
तकनीकी सत्र के दौरान शोधकर्ताओं को शोध के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सूचना स्रोतों की विश्वसनीयता की जांच करने के लिए भी प्रेरित किया गया। वक्ता ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर बड़ी मात्रा में सामग्री उपलब्ध है, ऐसे में किसी भी सूचना को शोध में शामिल करने से पहले उसके स्रोत, प्रामाणिकता और प्रासंगिकता की जांच करना आवश्यक है।
उन्होंने शोधकर्ताओं को आधुनिक शोध उपकरणों का उपयोग करते समय तथ्यात्मक शुद्धता और अकादमिक मानकों का ध्यान रखने की सलाह दी। साथ ही बताया कि तकनीकी उपकरण शोध प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बना सकते हैं, लेकिन शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शोधकर्ता की अपनी समझ और विवेक महत्वपूर्ण है।
साहित्यिक चोरी और अकादमिक अनियमितताओं से बचने की सलाह
डॉ. युवराज ने साहित्यिक चोरी, आत्म-साहित्यिक चोरी, आंकड़ा गढ़ने तथा आंकड़ों में हेरफेर जैसी अकादमिक अनियमितताओं के प्रति शोधकर्ताओं को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि शोध में शैक्षणिक ईमानदारी और मौलिकता का विशेष महत्व है। किसी दूसरे शोधकर्ता के विचार, सामग्री या निष्कर्ष का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना शोध की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध कार्य में एक सहायक माध्यम के रूप में उपयोगी हो सकती है, लेकिन मौलिक चिंतन, विश्लेषण और अंतिम निष्कर्ष शोधकर्ता की अपनी बौद्धिक क्षमता पर आधारित होने चाहिए। शोधकर्ताओं को तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और अकादमिक मानकों के अनुरूप करने की आवश्यकता है।
देशभर से करीब 150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
ऑनलाइन आयोजित इस तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जुड़े करीब 150 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने शोध, आंकड़ा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों और अकादमिक ईमानदारी से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ता ने संवादात्मक तरीके से समाधान किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को शोध कार्य में आधुनिक तकनीकी संसाधनों के संतुलित और प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया।
प्राचार्या ने व्यक्त की प्रसन्नता
प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ शोध की गुणवत्ता और शैक्षणिक मानकों को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित होते हैं।