मेरठ पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर का शुभारंभ करती सचिव सोनिका वर्मा
मेरठ, 05 अक्टूबर 2026। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के तत्वावधान में सोमवार को मेरठ पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेष रूप से बालक-बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा संबंधी प्रावधानों और उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ की सचिव सुश्री सोनिका वर्मा ने छात्र-छात्राओं को विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी सरल एवं व्यवहारिक भाषा में दी।
बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
शिविर में सचिव सोनिका वर्मा ने बालक एवं बालिकाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों, उनके अधिकारों और संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कानून में बच्चों को विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है। किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न, हिंसा अथवा अपराध की स्थिति में बच्चों को चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि किसी असहज या अनुचित परिस्थिति का सामना होने पर अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होने से वे कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और समय पर सहायता प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं।
पॉक्सो एक्ट और अच्छे-बुरे स्पर्श की दी जानकारी
विधिक जागरूकता शिविर के दौरान विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज या अनुचित महसूस कराता है तो ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि किसी संदिग्ध अथवा अनुचित व्यवहार की जानकारी तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति को दें। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी अथवा विधिक सहायता की भी मदद ली जा सकती है। शिविर में यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के लिए कानून में प्रभावी प्रावधान मौजूद हैं और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
महिलाओं के कानूनी अधिकारों की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में महिलाओं से संबंधित विभिन्न विधिक प्रावधानों और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई। महिलाओं को घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न तथा अन्य प्रकार के शोषण से संरक्षण प्रदान करने वाले कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया।
सचिव ने कहा कि किसी भी महिला के साथ हिंसा, उत्पीड़न अथवा अन्याय होने की स्थिति में उसे चुप नहीं रहना चाहिए। वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित विधिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं से संपर्क कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर विधिक सहायता प्राप्त कर सकती है।
निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विद्यार्थियों को किया जागरूक
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में भी छात्र-छात्राओं को जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक परामर्श और सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
विद्यार्थियों को अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान उन्हें यह समझाया गया कि कानून की जानकारी केवल स्वयं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि समाज में अन्य लोगों को जागरूक करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
विद्यार्थियों ने पूछे विधिक सवाल
विधिक जागरूकता शिविर के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न कानूनी विषयों से संबंधित प्रश्न भी पूछे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सोनिका वर्मा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सरल और व्यवहारिक भाषा में समाधान किया तथा उन्हें कानून के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में कानून के प्रति समझ विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कानून की जानकारी से व्यक्ति होता है सशक्त
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और विद्यालय के शिक्षकों को संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है। अपने अधिकारों और कानूनी संरक्षण के बारे में जानकारी होने से व्यक्ति स्वयं को अधिक सुरक्षित और सशक्त महसूस कर सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि आमजन को उनके विधिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भविष्य में भी विद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में इस प्रकार के विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें कानून के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास जारी रहेगा।