बच्चों से पूछताछ करते श्रम विभाग के अधिकारी
मेरठ। बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में मेरठ में सोमवार को एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभियान चलाया गया। श्रम विभाग, जनहित फाउंडेशन तथा थाना एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करते हुए बाल श्रम में लगे पांच बच्चों को मुक्त कराया। सभी बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उनके पुनर्वास की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
यह अभियान शास्त्रीनगर, हापुड़ रोड और लोहियानगर क्षेत्र में संचालित किया गया। अभियान का उद्देश्य बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी अंकुश लगाना, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना तथा नियोजकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
विभिन्न प्रतिष्ठानों पर की गई छापेमारी
संयुक्त टीम ने कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, जहां बाल श्रमिकों के कार्यरत होने की आशंका थी। निरीक्षण के दौरान जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
पंकज मयूरी ई-रिक्शा, मानसरोवर, सीएमओ कंपाउंड, मवाना बस अड्डे के पास, मेरठ।
हिमानी ऑटो सर्विस सेंटर, प्रवेश विहार, मेरठ।
चमन कमानी वाले, सीएनजी पेट्रोल पंप के सामने, हापुड़ रोड, मेरठ।
जनता मोटर गैराज, लोहियानगर, मेरठ।
निजाम मैकेनिक्स वर्कशॉप, हापुड़ रोड, मेरठ।
निरीक्षण के दौरान इन प्रतिष्ठानों से पांच बच्चों को बाल श्रम करते हुए पाया गया, जिन्हें तत्काल मुक्त कराया गया।
बाल कल्याण समिति के समक्ष किया गया प्रस्तुत
अभियान के दौरान मुक्त कराए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मेडिकल परीक्षण कराने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। साथ ही संबंधित विभागों द्वारा उनके पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
नियोजकों के खिलाफ श्रम विभाग की कार्रवाई
श्रम विभाग ने बाल श्रम कराने वाले सभी संबंधित प्रतिष्ठानों एवं नियोजकों के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
बाल श्रम के प्रति जागरूकता की अपील
अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि यदि कहीं किसी बच्चे से मजदूरी कराई जाती दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल श्रम विभाग, पुलिस या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें।
श्रम विभाग ने यह भी बताया कि जनहित फाउंडेशन एवं एएचटीयू के सहयोग से आगे भी जिले में ऐसे संयुक्त अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे, ताकि बाल श्रम पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित हो सके।