परिजनों के संग पीड़िता पहुंची रेलवे थाना
मेरठ। मेरठ की एक विवाहिता ने अपने पति, सास, ससुर और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मेरठ को विस्तृत प्रार्थना-पत्र सौंपा है। महिला का आरोप है कि विवाह के बाद से उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया तथा पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत उसे वियतनाम ले जाकर कथित रूप से हत्या का प्रयास किया गया। पीड़िता ने मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
विवाह के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न, लगाए गंभीर आरोप
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, मेरठ निवासी श्रीमती सलोनी अरोड़ा का विवाह 4 जून 2025 को मेरठ निवासी आशीष पसरीचा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पीड़िता का कहना है कि विवाह में उनके परिवार ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च किए और वाहन, आभूषण, घरेलू सामान सहित अन्य उपहार दिए।
महिला का आरोप है कि विवाह के लगभग एक माह बाद से ही पति, सास और ससुर द्वारा उनके साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। उन्हें अपमानित किया जाता, गाली-गलौज की जाती, घरेलू नौकरानी की तरह काम कराया जाता और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी।
परिजनों के साथ भी अभद्रता का आरोप
पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने अपने माता-पिता को घटनाओं की जानकारी दी और उनके परिजन ससुराल पहुंचे, तब उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि उसी दौरान महिला के साथ मारपीट की गई और गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया गया।
वियतनाम ले जाकर हत्या के प्रयास का आरोप
प्रार्थना-पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि 10 जून 2026 को उनके पति उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वियतनाम ले गए। वहां एक होटल में बेल्ट से बेरहमी से मारपीट की गई, गला दबाया गया और गर्दन पर भारी वस्तु से प्रहार किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और सांस लेने में कठिनाई होने लगी।
महिला का आरोप है कि घटना के बाद उनके पति उन्हें होटल के कमरे में गंभीर अवस्था में अकेला छोड़कर चले गए। बाद में होटल स्टाफ की मदद से उन्हें VINMEC DA NANG INTERNATIONAL HOSPITAL, दा नांग (वियतनाम) में भर्ती कराया गया।
पीड़िता का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने कई बार उनके पति से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह न तो अस्पताल पहुंचे और न ही उपचार में कोई सहयोग किया। इलाज का पूरा खर्च उन्होंने स्वयं वहन किया।
भारत लौटने के बाद भी चला इलाज
महिला के अनुसार, भारत लौटने के बाद भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। सांस लेने में लगातार दिक्कत रहने पर उन्हें नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकीय जांच में गर्दन के सी-6 और सी-7 स्तर पर गंभीर चोट तथा नसों पर दबाव होने की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने लंबे समय तक इलाज और चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता बताई।
पीड़िता का दावा है कि चिकित्सकों के अनुसार यह चोट गर्दन और गले पर हुए गंभीर हिंसक प्रहार के कारण हुई है।
फिर मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि उपचार के बाद जब वह अपने वैवाहिक घर लौटीं तो उनके साथ फिर मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न किया गया।
उनका कहना है कि 26 जून 2026 को उनके पति ने कथित रूप से उनका गला दबाते हुए कहा, “साली, तू मर क्यों नहीं जाती”, उनका मोबाइल फोन छीन लिया और उन्हें कमरे में बंद कर दिया। अगले दिन भी उनके साथ मारपीट की गई तथा उनके पिता को जान से मारने की धमकी दी गई।
महिला के अनुसार, बाद में उन्होंने आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उनके परिजन उन्हें अपने साथ ले गए।
पहले भी शिकायतें देने का दावा
पीड़िता ने अपने प्रार्थना-पत्र में कहा है कि उन्होंने पहले भी संबंधित थाना पुलिस को कई बार लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण आरोपियों के हौसले बढ़ते गए।
जांच में प्रस्तुत किए जाएंगे दस्तावेज
महिला ने दावा किया है कि उनके पास वियतनाम के अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी बिल, भुगतान रसीदें, भारत में हुए इलाज की मेडिकल रिपोर्ट, यात्रा संबंधी दस्तावेज, पूर्व में दी गई शिकायतों की प्रतियां, कॉल विवरण तथा अन्य दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
एसएसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर पति, सास, ससुर तथा अन्य आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, कठोर कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने कहा कि यदि किसी महिला को कथित रूप से विदेश ले जाकर उसके साथ गंभीर हिंसा की गई है और उसे असहाय अवस्था में छोड़ दिया गया है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, यात्रा संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और गहन जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।