विद्यालय परिवार के साथ गणित प्रतियोगिता में शामिल छात्राएं
मेरठ। शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने, शोध की भावना को प्रोत्साहित करने तथा भारत की गौरवशाली वैज्ञानिक एवं गणितीय परंपरा से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से एक दिवसीय गणित पत्रवाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय “भारत का गणित के क्षेत्र में योगदान एवं विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग” रखा गया, जिसमें कक्षा 9 से 12 तक के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्रों ने शोधपरक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की प्राचीन गणितीय विरासत, महान गणितज्ञों के योगदान और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक में गणित की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, विषय की गहरी समझ और प्रस्तुति कौशल आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गणित केवल अंकों का विषय नहीं, बल्कि तर्क, अनुशासन और समस्या समाधान का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव पद्धति और बीजगणित जैसी अमूल्य देन दी है तथा आज के विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं विद्यालय के भूतपूर्व प्रधानाचार्य श्री कृष्ण कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को भारतीय गणितीय ग्रंथों ‘आर्यभटीय’ और ‘लीलावती’ के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति की मजबूत नींव गणित पर आधारित है और यदि विद्यार्थियों की गणितीय सोच विकसित होगी तो देश विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने प्रतियोगिता के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में शोध करने, मंच पर आत्मविश्वास के साथ बोलने तथा तार्किक ढंग से अपने विचार प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल रटने के बजाय विषय की अवधारणाओं को समझने के लिए प्रेरित करें।
दो चरणों में हुई प्रतियोगिता
प्रतियोगिता को दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में विद्यार्थियों ने लगभग 1500 शब्दों तक के शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिनमें भारत के गणितीय योगदान तथा वर्तमान समय में उसके उपयोग का विस्तृत विश्लेषण किया गया। दूसरे चरण में चयनित 12 विद्यार्थियों ने अपने शोधपत्रों का पांच मिनट का मौखिक पत्रवाचन किया।
विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान गणितज्ञों के योगदान का उल्लेख करते हुए अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बैंकिंग, इंजीनियरिंग, क्रिप्टोग्राफी, डिजिटल भुगतान प्रणाली तथा दैनिक जीवन में गणित की उपयोगिता को उदाहरणों सहित समझाया।
तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल का गठन किया गया, जिसमें श्री मुकेश कुमार शर्मा, श्री नितिन बडोला तथा श्रीमती गीता अग्रवाल शामिल रहीं। निर्णायकों ने विषय-वस्तु, शोध की गुणवत्ता, भाषा, प्रस्तुति कौशल और मौलिकता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
निर्णायक मंडल ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में जीत से अधिक महत्वपूर्ण सीखने की प्रक्रिया और ज्ञान अर्जित करना होता है।
इन विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार
कड़े मुकाबले के बाद निर्णायक मंडल ने चार सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों का चयन किया।
प्रथम स्थान कुमारी स्वाति यादव ने प्राप्त किया। उन्होंने “शून्य से सुपर कंप्यूटर तक: भारत की गणितीय यात्रा” विषय पर प्रभावशाली शोध प्रस्तुत किया, जिसमें प्राचीन भारतीय गणित से लेकर इसरो के अंतरिक्ष अभियानों तक भारत की उपलब्धियों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
द्वितीय स्थान अनन्या को मिला। उन्होंने “गणित और चिकित्सा: निदान से दवा निर्माण तक” विषय पर बताया कि आधुनिक अस्पतालों, चिकित्सा अनुसंधान और दवा निर्माण में सांख्यिकी तथा एल्गोरिदम की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
तृतीय स्थान विनय ने प्राप्त किया। उन्होंने “वित्तीय गणित और डिजिटल इंडिया” विषय पर प्रस्तुति देते हुए यूपीआई, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी में गणित की भूमिका को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
चतुर्थ स्थान कुणाल को मिला। उन्होंने “वास्तुकला और इंजीनियरिंग में भारतीय गणित” विषय पर प्राचीन भारतीय मंदिरों की ज्यामिति तथा आधुनिक पुलों एवं भवन निर्माण में गणितीय सिद्धांतों के उपयोग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
पुरस्कार वितरण समारोह में चारों विजेताओं को सम्मानित किया गया, जबकि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों ने विजेताओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
आगे होंगे विज्ञान प्रदर्शनी और कोडिंग वर्कशॉप
कार्यक्रम के अंत में श्री मुकेश कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
समापन अवसर पर प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने घोषणा की कि विद्यालय में आगामी महीनों में विज्ञान प्रदर्शनी, कोडिंग वर्कशॉप तथा अन्य शोध आधारित शैक्षणिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की शैक्षणिक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच, शोध संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गणित पत्रवाचन प्रतियोगिता ने न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का विस्तार किया, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध गणितीय विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा भी दी।