छावनी की 67वीं रामलीला में 130 फीट के रावण के साथ ड्रोन लेजर शो होगा मुख्य आकर्षण
मेरठ। श्री रामलीला कमेटी मेरठ छावनी की ओर से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक श्रीरामलीला इस वर्ष और अधिक भव्य एवं आधुनिक स्वरूप में नजर आएगी। वर्ष 1960 से प्रारंभ हुई श्रीरामलीला के आयोजन को वर्ष 2026 में 67 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस बार रामलीला महोत्सव का शुभारंभ 9 अक्टूबर को भगवान शंकर की भव्य बारात के साथ होगा, जबकि 10 अक्टूबर से अयोध्यापुरी भैंसाली मैदान, मेरठ कैंट में मंचीय रामलीला शुरू होगी। 20 अक्टूबर को विजयदशमी का मुख्य आयोजन होगा और 21 अक्टूबर को भरत मिलाप एवं भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ लीला का समापन किया जाएगा।
9 अक्टूबर को सदर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी भगवान शंकर की बारात
श्री रामलीला कमेटी के अनुसार 9 अक्टूबर को भगवान शंकर की भव्य बारात सदर क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से निकाली जाएगी। शिव बारात में काली का अखाड़ा, नंदी पर दूल्हे के स्वरूप में विराजमान भगवान शंकर, विभिन्न शहरों से आए बैंड और आकर्षक झांकियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। बारात के स्वागत के लिए मार्ग में विभिन्न स्थानों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी।
शिव बारात के आयोजन की जिम्मेदारी मुख्य संयोजक सचिन कंसल बालाजी, मनीष जायसवाल, शोभित अग्रवाल, करन गोयल, प्रिंस सोनकर एवं उनकी टीम को सौंपी गई है। कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार शिव बारात को भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
10 अक्टूबर से भैंसाली मैदान में मंचीय रामलीला
10 अक्टूबर से अयोध्यापुरी भैंसाली मैदान में मंचीय श्रीरामलीला का शुभारंभ होगा। इसके लिए भूमि पूजन 27 सितंबर को संपन्न हो चुका है। रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों को आधुनिक लाइट एंड साउंड तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
12 अक्टूबर को सीता स्वयंवर एवं राम-जानकी विवाह की लीला का मंचन किया जाएगा। इसके अगले दिन 13 अक्टूबर को भगवान श्रीराम की भव्य बारात निकाली जाएगी।
13 अक्टूबर को निकलेगी भव्य श्रीराम बारात
श्रीराम बारात सदर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी। कमेटी के अनुसार इसमें काली का करीब नौ फीट ऊंचा स्वरूप एवं अखाड़ा विशेष आकर्षण होगा। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न दूल्हे के स्वरूप में घोड़ों पर सवार होकर बारात में शामिल होंगे। बारात में विभिन्न प्रकार के सुगंधित फलों से सजाए गए डोले, अलग-अलग शहरों से आए बैंड और आकर्षक झांकियां भी शामिल होंगी।
बारात का जगह-जगह स्वागत किया जाएगा। श्रीराम बारात की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मुख्य संयोजक अभय श्रीवास्तव पटवा जी, श्याम कुमार वर्मा, रूपेश श्रीवास्तव एवं उनकी टीम संभाल रही है।
14 अक्टूबर से होंगे रामायण के विभिन्न प्रसंगों के मंचन
14 अक्टूबर से अयोध्यापुरी भैंसाली मैदान में रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित मंचीय लीला प्रस्तुत की जाएगी। आयोजन को अत्याधुनिक स्वरूप देने के लिए लाइट एंड साउंड तकनीक का विशेष प्रयोग किया जाएगा।
लीला का मंचन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्रीराम कला केंद्र से प्रशिक्षित कलाकारों की टीम द्वारा किया जाएगा। इसमें टीवी और फिल्मों से जुड़े कलाकारों के भी शामिल होने की बात कमेटी की ओर से कही गई है। आधुनिक तकनीक की सहायता से हनुमान जी तथा युद्ध करते राक्षसों को आकाश में उड़ते हुए दिखाने की भी योजना है।
150 फीट चौड़ा मंच, अयोध्या के महल का बनेगा भव्य स्वरूप
रामलीला के मंचन को भव्य बनाने के लिए करीब 150 फीट चौड़ा और 45 फीट गहरा मंच तैयार कराया जाएगा। मंच पर करीब 30 फीट ऊंचा अयोध्या के महल का स्वरूप बनाया जाएगा।
मंच पर लगभग 12 फीट गुणा 32 फीट की बड़ी एलईडी वॉल तथा दोनों ओर करीब 10 फीट गुणा 16 फीट की दो एलईडी वॉल लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन पर मंच पर चल रहे प्रसंगों के अनुरूप दृश्य और सजीव पृष्ठभूमि दिखाई जाएगी। इससे दर्शकों को रामायण के प्रसंगों का अधिक प्रभावशाली अनुभव मिल सकेगा।
विजयदशमी पर 130 फीट का रावण, 120 फीट का कुंभकरण और 110 फीट का मेघनाथ
आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 20 अक्टूबर को होने वाला विजयदशमी महोत्सव होगा। कमेटी के अनुसार इस बार विजयदशमी पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशाल पुतले तैयार किए जाएंगे।
रावण का पुतला करीब 130 फीट ऊंचा होगा और उसे सात घोड़ों के रथ पर सवार स्वरूप में तैयार किया जाएगा। रावण की आंखों से अंगारे निकलते दिखाई देंगे। इसके अलावा कुंभकरण का पुतला करीब 120 फीट और मेघनाथ का पुतला करीब 110 फीट ऊंचा होगा।
ड्रोन और लेजर शो में आकाश में दिखाई देंगे रामायण के प्रसंग
विजयदशमी समारोह में इस बार तकनीक का भी विशेष इस्तेमाल किया जाएगा। कमेटी के मुताबिक आकाश में ड्रोन शो और लेजर शो के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों का चित्रण किया जाएगा। इसके साथ ही डिजिटल एवं आधुनिक आतिशबाजी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी।
कमेटी का प्रयास है कि परंपरागत रामलीला की धार्मिक और सांस्कृतिक भावना को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक के माध्यम से आयोजन को नई भव्यता प्रदान की जाए।
21 अक्टूबर को भरत मिलाप और श्रीराम के राजतिलक के साथ समापन
विजयदशमी के अगले दिन 21 अक्टूबर को भरत मिलाप का आयोजन होगा। इसके बाद भगवान श्रीराम के राजतिलक की लीला के साथ वर्ष 2026 की श्रीरामलीला का विधिवत समापन किया जाएगा।
कमेटी के पदाधिकारी और सहयोगी तैयारियों में जुटे
श्री रामलीला कमेटी मेरठ छावनी के अध्यक्ष पवन गर्ग, महामंत्री गणेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विजय गोयल, मुख्य संरक्षक डॉ. रामकुमार गुप्ता, डॉ. ब्रजभूषण और डॉ. संजय जैन सहित कमेटी के पदाधिकारी आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं।
विजयदशमी कार्यक्रम के संयोजक अश्वनी गुप्ता तथा कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक अमित अग्रवाल हैं। वरिष्ठ संरक्षक अनिल जैन एवं राजीव मित्तल, मुख्य संयोजक विवेक रस्तोगी, वरुण अग्रवाल, नीरज मित्तल, देवेन्द्र गोयल, नीरज राठौर, सूरज गुप्ता, स्वागताध्यक्ष नितिन बालाजी व सुमित गोयल तथा लेखा परीक्षक गिरीश अरोड़ा सहित अन्य पदाधिकारी भी आयोजन में सहयोग कर रहे हैं।
इसके अलावा दीपक राजपूत, अशोक गुप्ता, राजेश खन्ना, आशीष बंसल, सुरेश लोधी, सुशील अग्रवाल, मोहनलाल गर्ग, शैंकी गोयल सहित कमेटी के अन्य सदस्य विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मीडिया व्यवस्था में पारस गोयल, संगीता श्रीवास्तव, अंकित गुप्ता एवं अन्य सहयोगियों को जिम्मेदारी दी गई है।
67 वर्षों की परंपरा को और भव्य बनाने की तैयारी
श्री रामलीला कमेटी मेरठ छावनी ने कहा कि वर्ष 1960 में शुरू हुई रामलीला आज मेरठ छावनी के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। 67वें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस आयोजन को इस बार विशाल मंच, एलईडी स्क्रीन, लाइट एंड साउंड, ड्रोन शो, लेजर शो, आधुनिक आतिशबाजी, भव्य शिव बारात और श्रीराम बारात के माध्यम से विशेष स्वरूप देने की तैयारी है।
कमेटी ने श्रद्धालुओं और शहरवासियों से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रामलीला एवं विजयदशमी समारोह में पहुंचकर आयोजन में सहभागी बनने की अपील की है।