कलानिधि नैथानी, डीआईजी मेरठ रेंज
मेरठ। आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए मेरठ परिक्षेत्र पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। डीआईजी मेरठ रेंज कलानिधि नैथानी के निर्देश पर मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जिलों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे परिक्षेत्र में करीब 4500 पुलिसकर्मी, पीएसी और बीएसएफ की तैनाती की जाएगी, जबकि संवेदनशील एवं मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों पर ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी।
मेरठ रेंज कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार मोहर्रम 17 जून 2026 से प्रारंभ होगा, जबकि ताजिया एवं मुख्य जुलूस का आयोजन 26 जून 2026 को किया जाएगा। पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
परिक्षेत्र में होंगी 241 मजलिसें और 395 जुलूस
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार मेरठ परिक्षेत्र के चार जिलों में कुल 93 स्थानों पर 241 मजलिसों का आयोजन प्रस्तावित है। इनमें मेरठ में 54, बुलंदशहर में 31, बागपत में 1 और हापुड़ में 155 मजलिसें आयोजित की जाएंगी।
वहीं पूरे परिक्षेत्र में कुल 395 जुलूस निकाले जाएंगे। इनमें मेरठ में 95, बुलंदशहर में 256, बागपत में 5 तथा हापुड़ में 39 जुलूस प्रस्तावित हैं।
560 ताजिए और 81 कर्बला स्थल चिन्हित
मोहर्रम के दौरान निकाले जाने वाले ताजियों की कुल संख्या 560 निर्धारित की गई है। इनमें मेरठ में 127, बुलंदशहर में 398, बागपत में 5 और हापुड़ में 30 ताजिए शामिल हैं।
इसके अलावा पूरे परिक्षेत्र में 81 कर्बला स्थलों को चिन्हित किया गया है। मेरठ में 22, बुलंदशहर में 45, बागपत में 5 और हापुड़ में 9 कर्बला स्थल हैं जहां धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे।
1072 सीसीटीवी कैमरों से होगी निगरानी
मोहर्रम जुलूस मार्गों की सुरक्षा के लिए कुल 1072 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें मेरठ में 190, बुलंदशहर में 690, बागपत में 33 और हापुड़ में 159 कैमरे शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कैमरों की कार्यक्षमता की जांच कर उन्हें सक्रिय रखा जाए। जहां बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे, वहां अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।
83 स्थान घोषित किए गए संवेदनशील
मेरठ परिक्षेत्र में कुल 83 स्थानों को संवेदनशील एवं हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें मेरठ में 47, बुलंदशहर में 22, बागपत में 4 और हापुड़ में 10 स्थान शामिल हैं।
इन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए 24 जोन, 81 सेक्टर और 59 क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की गई हैं। वहीं जुलूस मार्गों पर कुल 47 संवेदनशील बिंदुओं की पहचान की गई है। संवेदनशीलता की दृष्टि से मेरठ का भावनपुर थाना क्षेत्र और बुलंदशहर का खुर्जा नगर थाना क्षेत्र अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
4500 से अधिक सुरक्षा कर्मी रहेंगे तैनात
मोहर्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए मेरठ परिक्षेत्र में 7 अपर पुलिस अधीक्षक, 25 क्षेत्राधिकारी, 102 निरीक्षक, 512 उपनिरीक्षक, 922 मुख्य आरक्षी, 1540 आरक्षी तथा 832 होमगार्ड और पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है।
इसके अतिरिक्त एक कंपनी पीएसी और एक कंपनी बीएसएफ भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाई गई है।
अवैध हथियारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सभी जनपद प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार के अवैध अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाए। अवैध हथियार लेकर चलने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि ताजिए निर्धारित मार्गों से ही निकाले जाएं और उनकी ऊंचाई परंपरा एवं मानकों के अनुरूप हो। किसी भी नई परंपरा को अनुमति नहीं दी जाएगी।
ड्रोन से होगी निगरानी, सोशल मीडिया पर भी नजर
संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों से निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना को समय रहते रोका जा सके।
पुलिस की सोशल मीडिया सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है और सभी जिलों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।
शांति समिति और धर्मगुरुओं के साथ हुईं बैठकें
मोहर्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए परिक्षेत्र के चारों जिलों में पुलिस द्वारा शांति समिति, धर्मगुरुओं, संभ्रांत नागरिकों और अंजुमनों के साथ व्यापक स्तर पर बैठकें आयोजित की गई हैं।
अब तक 130 शांति समिति बैठकों, विभिन्न विभागों के साथ 120 समन्वय बैठकों तथा अंजुमनों के साथ 114 गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है।
डीआईजी ने दिए विशेष निर्देश
डीआईजी मेरठ रेंज ने सभी थाना और चौकी प्रभारियों को ताजियादारों एवं शांति समितियों के साथ बैठकें करने, जुलूस मार्गों का भौतिक निरीक्षण करने, बिजली के तारों एवं अन्य बाधाओं को हटवाने, संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल गश्त बढ़ाने तथा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।