एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम की वर्कशॉप में प्रशिक्षण देते सक्षम अधिकारी
मेरठ। मेरठ के पारंपरिक खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन (ODOC) योजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय व्यंजनों से जुड़े उद्यमियों को आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे अपने उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक प्रस्तुति के साथ बड़े बाजारों तक पहुंचा सकें।
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय पैकेजिंग संस्थान (Indian Institute of Packaging – IIP) के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों डॉ. निशी एवं डॉ. प्रवीण द्वारा 27 जुलाई को यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मेरठ के प्रसिद्ध पारंपरिक उत्पाद रेवड़ी, गजक और नानखटाई से जुड़े उद्यमियों, निर्माताओं तथा अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आधुनिक पैकेजिंग से बढ़ेगी उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में पहचान
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि किसी भी खाद्य उत्पाद की सफलता केवल उसके स्वाद पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी आकर्षक पैकेजिंग, सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता संरक्षण और लंबी शेल्फ लाइफ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार की पैकेजिंग सामग्री, वैज्ञानिक पैकेजिंग तकनीकों, नमी और तापमान से बचाव के उपाय, खाद्य सुरक्षा मानकों तथा उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के व्यावहारिक तरीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर पैकेजिंग से उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं, उनकी ताजगी बनी रहती है और उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ता है। साथ ही इससे बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है और ब्रांड की विश्वसनीयता भी बढ़ती है।
ODOC योजना के उद्देश्यों से कराया गया अवगत
कार्यक्रम में जिला औद्योगिक एवं निर्यात प्रोत्साहन समिति के अधिकारियों ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन (ODOC) योजना की रूपरेखा, उद्देश्यों और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि योजना के शुभारंभ के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि मेरठ के पारंपरिक खाद्य उत्पादों से जुड़े उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और जरूरतमंद हितधारकों को अधिकतम लाभ मिल सके। योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
अधिकारियों ने कहा कि ODOC योजना का उद्देश्य केवल स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना ही नहीं है, बल्कि उन्हें एक संगठित पहचान देकर देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाना भी है। बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से मेरठ के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय उद्यमियों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विशेषज्ञों और उद्यमियों के बीच हुआ ज्ञानवर्धक संवाद
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा पैकेजिंग, विपणन, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादों के दीर्घकालिक संरक्षण से जुड़े कई व्यावहारिक सुझाव भी रखे।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में क्षमता निर्माण (Capacity Building) के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को बताया उपयोगी
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों, गुणवत्ता सुधार और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। उनका मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण भविष्य में उनके व्यवसाय को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे।
स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा नया प्रोत्साहन
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से मेरठ के पारंपरिक उत्पादों की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि होगी, स्थानीय उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलेगा तथा रेवड़ी, गजक और नानखटाई जैसे पारंपरिक व्यंजन राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकेंगे। इससे जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।