लेखिका मीना शर्मा ( समाज सुधारक )
आज मैं एक ऐसे विषय पर आपसे बात करने आयी हूँ, जो हमें सिर्फ इतिहास की गलियों तक नहीं, वर्तमान की सच्चाई और भविष्य की ज़िम्मेदारी तक ले जाता है।
हम भारतवासी—जिन्होंने हजारों वर्षों की समृद्ध सभ्यता, ज्ञान और संस्कृति को जन्म दिया—आज भी एक अदृश्य गुलामी की मानसिकता से जकड़े हुए हैं।
हमने इतिहास में देखा, जब-जब आक्रमणकारी आए, हमने विरोध करने की बजाय, समर्पण किया। और आज भी… जब कोई अत्याचार होता है, जब कोई अन्याय करता है, जब कोई भ्रष्टाचार फैलाता है—तो हम वही कहते हैं:
- “हम क्या कर सकते हैं?”
- “हमें क्या लेना-देना?”
- “यहाँ ऐसा ही होता है!”
- “चुप रहो, नहीं तो मुसीबत आ जाएगी।”
- “तुम्हारा ही दोष होगा।”
- “पागल हो गए हो क्या, सच के लिए लड़ रहे हो?”
- “उनके खिलाफ मत जाओ, वो बहुत बड़े लोग हैं।”
ये सोच ही हमारी असली गुलामी है।
अगर प्रभु श्रीराम सोचते कि “मुझे क्या करना है?”, तो क्या आज राम का नाम अमर होता?
अगर भगवान श्रीकृष्ण कहते कि “मैं तो बच्चा हूँ”, तो क्या उन्होंने अन्याय का अंत किया होता?
अगर भगत सिंह, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे योद्धा सोचते कि “हमें क्या पड़ी है?”, तो क्या आज हम स्वतंत्र होते?
नहीं…
वे उठे, जागे, लड़े, और अमर हो गए।
तो सवाल यह नहीं कि “हमें क्या करना है?”
सवाल यह है कि अब अगर हम भी चुप रहे, तो हमारे बच्चों का भविष्य कैसा होगा?
📢 आज मेरी बारी है, कल तुम्हारी होगी।
🕰️ काल कभी किसी को माफ नहीं करता।
अब समय है…
👉 आवाज़ उठाने का।
👉 अन्याय का विरोध करने का।
👉 अपने अधिकार के लिए खड़े होने का।
👉 हर पीड़ित को न्याय दिलाने का।
👉 अपने भारत को फिर से दुनिया की माथे की बिंदी बनाने का।
💡 ऐसा भारत जहाँ…
हर विदेशी सुरक्षित महसूस करे,
हर कंपनी भारत में निवेश करना चाहे,
हर नागरिक को अपने देश पर गर्व हो,
और हर दिल में “देश प्रथम” की भावना हो।
🙏 आइए हम सब मिलकर उस रामराज्य की स्थापना करें, जहाँ न्याय, धर्म, और शांति सर्वोच्च हो।
वन्दे मातरम्।
जय हिन्द।
जय भारत।
मीना शर्मा
सच्ची देश भक्त व समाज सुधारक
जिसने हमेशा अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई।
चाहे मेरठ की नाबालिग लड़की के शोषण की शिकायत महिला आयोग मे दर्ज करनी हो।
सरकार को चूना लगाने वाले सटोरिए हो।
नकली मार्कशीट बनाने वाले नेता हो।
चाहे मुझे जहर पीना पडा हो।
मैने काली बनकर भष्टाचार पर लगातार वार किया।