जलवायु परिवर्तन को लेकर आयोजित सेमिनार में शामिल प्रतिभागी
मेरठ। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए समाज विकास संस्थान की ओर से 11 अक्टूबर को मेरठ के आईएमए हॉल में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। “जलवायु परिवर्तन व प्राकृतिक आपदाएं: चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर हुए कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए कृषि वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि बदलते मौसम और आपदाओं का असर खेती, जल संसाधनों, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए वैज्ञानिक तैयारी के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
36 वर्षों से जल संरक्षण और जैविक खेती पर काम
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना और माल्यार्पण से हुई। संस्थान के निदेशक डॉ. के.के. तोमर ने संस्था के कार्यों का परिचय देते हुए बताया कि समाज विकास संस्थान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 17 जनपदों में पिछले 36 वर्षों से जल संरक्षण, जैविक खेती, जलवायु परिवर्तन, किसानों की आय बढ़ाने और वंचित वर्गों को कानूनी परामर्श देने जैसे विषयों पर काम कर रहा है। उन्होंने काली और हिंडन नदियों के संरक्षण, शुद्धीकरण और वृक्षारोपण से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया। संस्था की ओर से ‘प्रेरणापुंज’ नामक अर्धवार्षिक पत्रिका के प्रकाशन की जानकारी भी दी गई।
सामूहिक प्रयास और समय पर चेतावनी पर जोर
सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना किसी एक संस्था या सरकार के प्रयासों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं, प्रशासन, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जलवायु जागरूकता, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय स्तर पर तैयारी को समाधान का अहम आधार बताया गया।

वक्ताओं ने भूस्खलन, बाढ़, सूखा, चक्रवात, हीटवेव और जंगलों में आग जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जोखिम का वैज्ञानिक आकलन, पूर्व तैयारी और समय पर चेतावनी प्रभावित लोगों तक सरल भाषा में पहुंचनी चाहिए। जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, उपग्रह तकनीक, ड्रोन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी प्रणालियों को आपदा प्रबंधन में उपयोगी बताया गया।
खेती, जल और स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर पर चर्चा
अमिटी विश्वविद्यालय नोएडा के महानिदेशक डॉ. अजय कुमार राणा ने जलवायु परिवर्तन के आर्थिक और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरता और फसल उत्पादन पर रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक इस्तेमाल तथा बदलते मौसम का असर पड़ सकता है। वक्ताओं ने कृषि अवशेष न जलाने, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ के पूर्व प्राचार्य डॉ. एस.के. गर्ग ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है। वहीं, आईसीएआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संगीता पांडे ने वायुमंडल के बढ़ते तापमान और उसके कारणों पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन, जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल तथा वनों की कटाई को प्रमुख चिंताओं में शामिल किया।
आपदा प्रबंधन और प्रकृति संरक्षण पर सुझाव
जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ डॉ. कंचन सिंह ने भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाओं के प्रभावों का उल्लेख करते हुए प्रभावी पूर्व सूचना तंत्र की जरूरत बताई। चिकित्सक डॉ. अलका गुप्ता ने बदलते पर्यावरण के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की। सेमिनार में कृषि, ओलावृष्टि, धुंध, पाला, तूफान और फसलों को होने वाले नुकसान जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने समाधान के तौर पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण, कृषि अवशेष न जलाने, जल की बचत, वन कटान पर रोक, ऊर्जा संरक्षण और पैदल या सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ के सिद्धांत अपनाने, खाद्यान्न की बर्बादी रोकने और बाढ़ प्रबंधन तथा जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे विकल्पों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।
विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार, करीब 20 लोगों को सम्मानित किया गया। जैविक खेती करने वाले 20 प्रगतिशील किसानों को पटका पहनाकर सम्मान दिया गया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. तुष्टि शर्मा को मेरठ महिला गौरव सम्मान सहित कई लोगों को उनके कार्यक्षेत्र के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने किया। समापन पर मुख्य संयोजक डॉ. एस.के. गर्ग ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। इसके बाद उपसंयोजक डॉ. अजीत सिंह तोमर ने सभी को भोजन के लिए आमंत्रित किया।