एक राष्ट्र एक चुनाव पर बैठक आयोजित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत 129वां संविधान (संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 का स्वागत करते हुए कहा है कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव (One Nation, One Election)” व्यवस्था लागू होने से देश और प्रदेश में प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, सरकारी संसाधनों की बचत होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। परिषद ने इस विषय पर गठित 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का भी स्वागत किया है।
बार-बार चुनाव से बढ़ता है आर्थिक और प्रशासनिक बोझ
विधान परिषद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। प्रत्येक चुनाव के लिए सुरक्षा बल, मतदान कर्मी, चुनावी सामग्री और प्रशासनिक संसाधनों की अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।
परिषद का मानना है कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो हजारों करोड़ रुपये की बचत संभव होगी। इस बची हुई राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आधारभूत संरचना और गरीबी उन्मूलन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा लाभ
उत्तर प्रदेश में प्रत्येक चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाई जाती है, जिससे विद्यालयों की पढ़ाई, परीक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी चुनावी कार्यों में लगाया जाता है, जिससे अस्पतालों की नियमित सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण अभियान और अन्य जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।
विधान परिषद का मत है कि यदि चुनाव एक साथ होंगे तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
विकास कार्यों में नहीं लगेगी आचार संहिता की रोक
बार-बार चुनाव होने के कारण बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है, जिससे विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है।
यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव होंगे तो जिला प्रशासन, नगर निकाय, ग्राम पंचायतें और विकास प्राधिकरण बिना रुकावट विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कर सकेंगे। साथ ही ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल प्रशासन को भी गति मिलेगी।
विधान परिषद की भूमिका होगी और प्रभावी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने कहा कि प्रदेश का विधानमंडल द्विसदनीय है और विधान परिषद एक स्थायी सदन है। लगातार चुनावी प्रक्रिया के कारण सरकार और प्रशासन का काफी समय चुनाव संबंधी तैयारियों में व्यतीत होता है।
“एक राष्ट्र, एक चुनाव” व्यवस्था लागू होने पर विधान परिषद को विधेयकों, नीतियों और विकास योजनाओं पर अधिक गंभीरता से विचार-विमर्श करने तथा विभागीय समितियों के माध्यम से प्रभावी समीक्षा करने का अवसर मिलेगा।
39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का किया स्वागत
विधान परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा के लिए गठित 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का स्वागत किया है।
समिति की अध्यक्षता पी.पी. चौधरी कर रहे हैं। बैठक में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, सांसद अनुराग ठाकुर, सांसद धर्मेंद्र यादव, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, लाल बिहारी यादव, कविता पाटीदार, सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
समिति में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के अलावा भाजपा, कांग्रेस, जनता दल (यू), राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है। इनमें प्रियंका गांधी वाड्रा, डॉ. संबित पात्रा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, संजय सिंह, सुप्रिया सुले और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय सहमति बनाने की पहल
विधान परिषद ने कहा कि यह सर्वदलीय संयुक्त संसदीय समिति सभी हितधारकों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधार पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। एक समान चुनाव प्रणाली लागू होने से शासन में स्थिरता आएगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, आधारभूत संरचना का विकास तेज होगा तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने अपने मत में कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” व्यवस्था लागू होने से न केवल सरकारी संसाधनों की बचत होगी, बल्कि शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन तथा विकास के क्षेत्र में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
अंत में विधान परिषद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश और देशहित में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” व्यवस्था को शीघ्र लागू किया जाए, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक प्रभावी एवं संसाधन-सक्षम बन सके।