नशा मुक्ति को लेकर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित
मेरठ। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रव्यापी “नशा मुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान” के अंतर्गत शनिवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के ललित कला संस्थान में पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर हरे कृष्ण ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रोफेसर वीरपाल सिंह, प्रोफेसर भूपेन्द्र सिंह, प्रोफेसर अर्चना सिंह तथा डॉ. मितेन्द्र गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
“नशा मुक्त भारत केवल अभियान नहीं, राष्ट्रीय संकल्प है” – प्रो. संगीता शुक्ला
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त भारत केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है। युवाओं की रचनात्मक शक्ति, सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व ही विकसित भारत की आधारशिला हैं। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से प्रत्येक युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।”
“युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगे तो विकसित भारत का सपना होगा साकार”
मुख्य अतिथि प्रोफेसर हरे कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि नशा युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और भविष्य को प्रभावित करता है। यदि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा शिक्षा, कला, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में लगाएं तो विकसित भारत का लक्ष्य शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक युवा ही देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
कला सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम संयोजिका प्रोफेसर अलका तिवारी ने कहा कि ललित कला संस्थान हमेशा सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करता रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टर और स्लोगन जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं में जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती हैं। कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रभावी शक्ति भी है।
अतिथियों ने दिया नशा मुक्ति का संदेश
प्रोफेसर वीरपाल सिंह ने कहा कि अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही युवा शक्ति की वास्तविक पहचान है। नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए घातक है।
प्रोफेसर भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों ने अपने पोस्टरों और स्लोगनों के माध्यम से नशा मुक्ति का अत्यंत प्रभावशाली संदेश दिया है, जो समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रोफेसर अर्चना सिंह ने कहा कि स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। प्रत्येक युवा को अपने व्यवहार और कार्यों से समाज के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।
डॉ. मितेन्द्र गुप्ता ने कहा कि नशा मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब युवा स्वयं जागरूक होकर दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। शिक्षा, कला और सकारात्मक संस्कार युवाओं को सही दिशा प्रदान करते हैं।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए प्रभावशाली पोस्टर और स्लोगन
प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति, स्वस्थ जीवन और विकसित भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर आकर्षक पोस्टर और प्रेरणादायक स्लोगन प्रस्तुत किए।
पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता
- प्रथम: तेजस्वी शर्मा
- द्वितीय: सिद्धांत यादव
- तृतीय: मानव प्रताप
प्रोत्साहन पुरस्कार: विनीता गुप्ता, दक्ष एवं कशिश।
स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता
- प्रथम: रिद्धिमा कथूरिया
- द्वितीय: दिव्या
- तृतीय: कशिश
प्रोत्साहन पुरस्कार: विनीता गुप्ता, गौरांगी एवं श्रेया।
प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन डॉ. शालिनी धामा, डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, कृतिका गोयल एवं निर्णय पंडाल द्वारा किया गया।
सफल आयोजन में सभी का रहा योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सुश्री दीपांजलि, मोहम्मद खालिद, आकाश एवं डॉ. रीता सिंह का विशेष सहयोग रहा। वहीं छात्र प्रतिनिधियों के रूप में रिद्धिमा कथूरिया, श्रेया कुशवाहा एवं सिद्धांत यादव ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए। साथ ही सभी विद्यार्थियों से “नशा मुक्त युवा–विकसित भारत” के संकल्प को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में जन-जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, रचनात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।