ओ बी सी जनसुनवाई कार्यक्रम में मंचासीन अतिथिगण
मेरठ। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा मंगलवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित अटल सभागार में स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण व्यवस्था की वर्तमान स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों तथा आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पंचायतों में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर अपने सुझाव, आपत्तियां और अनुभव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का प्रतीक चिन्ह और शॉल भेंट कर स्वागत किया।
ओबीसी आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी पर हुई विस्तृत चर्चा
जनसुनवाई के दौरान आयोग ने यह जानने का प्रयास किया कि पंचायतों में ओबीसी वर्ग का राजनीतिक प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में है या नहीं। साथ ही यह भी चर्चा की गई कि आर्थिक स्थिति, सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और अन्य वर्गों का प्रभाव ओबीसी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को किस प्रकार प्रभावित करता है।
आयोग ने विभिन्न पिछड़ी जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, पंचायतों में उनकी भागीदारी और आरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता से जुड़े बिंदुओं पर भी सुझाव आमंत्रित किए। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के समक्ष रखे।
70 प्रतिशत आबादी पर 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का सवाल
जनसुनवाई के दौरान मवाना ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि योगेश कुमार ने प्रश्न उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 70 प्रतिशत से अधिक है तो क्या उन्हें 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण दिया जाएगा। इस पर आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि आरक्षण का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति के अध्ययन के आधार पर किया जाएगा।
पिछड़ी जातियों के भीतर समान प्रतिनिधित्व की मांग
जिला पंचायत सदस्य दीपक गून ने सुझाव दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर समुदाय की राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है, जबकि पाल, प्रजापति, सैनी, माली, कश्यप, जोगी, नाई, जलाहा सहित अनेक पिछड़ी जातियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उन्होंने ऐसी जातियों को अधिक अवसर देने की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं जिला पंचायत सदस्य अनिकेत भारद्वाज ने क्रीमीलेयर व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार करने का सुझाव दिया।
वार्ड और ग्राम प्रधानों की संख्या बढ़ाने की मांग
जिला पंचायत सदस्य अजीत प्रताप सिंह ने सुझाव दिया कि बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप वार्डों और ग्राम प्रधानों की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ सके।
क्षेत्र पंचायत सदस्य योगेश त्यागी ने सभी वर्गों की तरह सामान्य वर्ग के लिए भी आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग रखी।
ब्लॉक प्रमुख कपिल मुखिया ने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या के आधार पर ग्राम प्रधान पदों का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां एक हजार वोटर हैं वहां भी एक प्रधान चुना जाता है और जहां आठ हजार वोटर हैं वहां भी एक ही प्रधान होता है। ऐसी स्थिति में मतदाताओं की संख्या के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जाना चाहिए।
आयोग ने दर्ज किए सभी सुझाव और आपत्तियां
जनसुनवाई के दौरान आयोग के सदस्यों ने सभी सुझावों, आपत्तियों और अभिमतों को विधिवत दर्ज किया। आयोग ने आश्वासन दिया कि प्रदेशभर से प्राप्त आंकड़ों, अनुभवों और सुझावों का विस्तृत विश्लेषण कर एक तथ्यात्मक और न्यायसंगत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य स्थानीय पंचायत निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समग्र अध्ययन करना है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जाकर जनसुनवाई की जा रही है ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन कर सरकार को विधिसम्मत और तथ्यपरक अनुशंसाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उन्होंने कहा कि आयोग सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों और आंकड़ों का निष्पक्ष परीक्षण करेगा ताकि भविष्य में ओबीसी आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े निर्णय वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप लिए जा सकें।
आज मेरठ, कल परीक्षितगढ़ में होगी जनसुनवाई
आयोग की मेरठ मंडल में यह पहली जनसुनवाई थी। आयोग ने जानकारी दी कि बुधवार, 24 जून 2026 को विकासखंड परीक्षितगढ़ तथा ग्राम पंचायत आलमगीरपुर बढ़ला में भी जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। यहां आयोग ग्रामीण नागरिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनके सुझाव प्राप्त करेगा।
इसके बाद आयोग मेरठ मंडल के अन्य जनपदों सहित पूरे प्रदेश में भ्रमण कर तथ्य संकलन और जनसुनवाई की प्रक्रिया जारी रखेगा।
सरकार को सौंपी जाएगी अनुशंसात्मक रिपोर्ट
आयोग द्वारा प्रदेशभर से प्राप्त सुझावों, आंकड़ों और तथ्यों का व्यापक अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत अनुशंसात्मक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संबंध में भविष्य की नीतियों और निर्णयों को दिशा मिल सकेगी।
इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह, सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एस.पी. सिंह एवं असलम अंसारी, मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कुंवर वीरेन्द्र मौर्य, पीडी डीआरडीए सुनील कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी वीरेन्द्र सिंह, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।